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पारंपरिक खेती से समृद्धि की राह लछन गर्दी ने आधुनिक कृषि और सरकारी योजनाओं से बदली अपनी तकदीर

​ ​रायपुर, 07 जुलाई 2026 / हौसलों में उड़ान हो और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो बंजर जमीन से भी सोना उगाया जा सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जिले के ग्राम केरलापाल के प्रगतिशील किसान लछन गर्दी ने। लछन ने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और सरकार की आधुनिक कृषि सुविधाओं का सटीक तालमेल बिठाकर न केवल अपनी खेती की तस्वीर बदली है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का एक बेमिसाल स्त्रोत बन गए हैं।

​पारंपरिक ढर्रे को छोड़, अपनाया वैज्ञानिक दृष्टिकोण

​कुछ समय पहले तक लछन भी अन्य आम ग्रामीणों की तरह पारंपरिक और लकीर-के-फकीर वाले तरीकों से खेती करते थे, जिसमें लागत अधिक और मुनाफा बेहद सीमित था। लेकिन उन्होंने समय के साथ बदलने का फैसला किया। लछन ने कृषि विभाग से संपर्क साधा और शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाना शुरू किया।
​विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने ​उन्नत किस्म के प्रमाणित बीजों को अपनाया साथ ही​संतुलित मात्रा में उर्वरकों (खाद) का प्रयोग करना सीखा। ​समय पर बुवाई और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया।

​उत्पादन में उछाल और बढ़ा आत्मविश्वास

​आधुनिक तकनीकों, समय पर सिंचाई और गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज के इस त्रिवेणी संगम का असर जल्द ही उनके खेतों में दिखने लगा। फसलों की पैदावार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। उत्पादन बढ़ने से लछन की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज वे न सिर्फ अपने परिवार की हर छोटी-बड़ी जरूरत को बेहद गरिमापूर्ण ढंग से पूरा कर पा रहे हैं, बल्कि खेती को लेकर उनका आत्मविश्वास भी सातवें आसमान पर है। श्री लछन गर्दी ने कहा कि अगर हम सही समय पर सरकारी सुविधाओं, उन्नत बीजों और सिंचाई के संसाधनों का सही इस्तेमाल करना सीख जाएं, तो कम जमीन पर भी बंपर मुनाफा कमाया जा सकता है।

​गांव के लिए बने ‘कृषि दूत’

​अपनी सफलता का स्वाद चखने के बाद लछन अब स्वार्थी नहीं बने हैं। आज वे अपने गांव के चौपालों पर अन्य साथी किसानों को भी पारंपरिक खेती से बाहर निकलकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं।
​लछन गर्दी की यह सफलता कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब सरकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन होता है और उसे किसान की लगन का साथ मिलता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनने से कोई नहीं रोक सकता।बिजली, पानी और उन्नत खाद-बीज के समन्वय से लछन ने खेती को घाटे के सौदे से उबारकर एक बेहद लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है। उनकी यह यात्रा छत्तीसगढ़ के समृद्ध होते किसान की एक खूबसूरत बानगी है।

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