
शासन की योजना ने बढ़ाया आत्मविश्वास, स्वरोजगार से बदल रही जिंदगी*
रायपुर, 2 अगस्त 2026/छत्तीसगढ़ सरकार की दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम योजना दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आसान ऋण, कम ब्याज दर, प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा मिलने से कई दिव्यांगजन अपने छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं।
*प्रेरक सफलता की कहानी*
ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है श्री सोना थालिया की। उन्होंने निगम से ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू किया और समय पर ऋण की अदायगी भी की। उनकी मेहनत और ईमानदारी को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। उनकी सफलता से अन्य दिव्यांगजन भी प्रेरित हो रहे हैं।
*ब्याज दर और ऋण प्रावधान*
दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने समीक्षा बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार दिव्यांगजनों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। निगम के माध्यम से 50 हजार रुपये तक 5 प्रतिशत, 5 लाख रुपये तक 6 प्रतिशत और 10 लाख रुपये तक 7 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है। आवश्यकता होने पर 50 लाख रुपये तक ऋण देने का प्रावधान भी है। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को सब्सिडी का लाभ भी मिलता है।
*प्रशिक्षण और उद्यमिता विकास*
निगम के प्रबंध संचालक श्री पंकज वर्मा ने बताया कि योजना का उद्देश्य केवल ऋण देना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को सफल उद्यमी बनाना है। इसके लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्पाद निर्माण, डिजिटल मार्केटिंग, वित्तीय प्रबंधन और लेखा-जोखा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उनके उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
*प्रदर्शनी और प्रतिभा प्रदर्शन*
बैठक के दौरान दिव्यांग बच्चों द्वारा तैयार किए गए हर्बल साबुन, मालाएं और हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। इन उत्पादों की गुणवत्ता की सभी ने सराहना की। इससे यह स्पष्ट हुआ कि उचित अवसर और सहयोग मिलने पर दिव्यांगजन भी अपनी प्रतिभा के बल पर सफल उद्यमी बन सकते हैं।
*प्रशासनिक निर्देश और निरीक्षण*
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पात्र दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले। बैठक के बाद श्री लोकेश कावड़िया ने आकार आवासीय संस्था का निरीक्षण किया और 12 बच्चों की सुधारात्मक शल्य चिकित्सा शीघ्र कराने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में 100 नए दिव्यांगजनों को स्वरोजगार ऋण से जोड़ने के भी निर्देश दिए।
यह पहल दिव्यांगजनों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान कर रही है।









