
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि अपनी भावनाओं और विचारों को कला के माध्यम से अभिव्यक्त करना भी एक विशेष हुनर है। उन्होंने कहा कि कार्टून और कैरिकेचर केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और विकास के सकारात्मक संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की सशक्त कला है। इस अवसर पर महापौर श्री संजय पांडेय एवं एमआईसी सदस्य श्री संग्राम सिंह, स्थानीय कार्टूनिस्ट श्री सुभाष पांडे और स्कूली शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।
कार्यशाला में दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट श्री माधव जोशी और पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर कलाकार श्री शुभम जिंदे ने लाइव डेमो के माध्यम से विद्यार्थियों को कार्टून एवं कैरिकेचर निर्माण की तकनीकें सिखाईं। उन्होंने विद्यार्थियों को कला के सामाजिक महत्व, रचनात्मक संभावनाओं तथा रोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर विकास, विश्वास और नई संभावनाओं के साथ नई पहचान बना रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, बस्तर दशहरा तथा जनजातीय संस्कृति जैसी धरोहरें बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिला रही हैं। ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला का उद्देश्य इन्हीं सकारात्मक पहलुओं को कार्टून कला के माध्यम से रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करना है।
‘कार्टून वॉच’ के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच विकसित करना और बस्तर की खूबियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ बस्तर की सकारात्मक पहचान को देशभर में स्थापित करने की दिशा में एक अभिनव प्रयास है। यह आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और
प्राकृतिक धरोहर से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर कैरिकेचर कलाकार श्री शुभम जिंदे ने वनमंत्री और महापौर का कैरिकेचर बनाकर उनको भेंट की। ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने पहुंचकर प्रतिभागी स्कूली बच्चों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने बच्चों द्वारा बनाए जा रहे कार्टून और रचनात्मक चित्रों का अवलोकन किया तथा उनकी कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति की सराहना की।
कलेक्टर श्री छिकारा ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रभावी साधन भी है। कार्टून जैसी विधा बच्चों में रचनात्मक सोच, संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों को विकसित करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी कल्पनाओं को रंगों और रेखाओं के माध्यम से समाज के सामने प्रस्तुत करें तथा सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें। कार्यशाला में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और पुरस्कार प्राप्त किया ।









