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बिहार में बारिश कम, फिर भी क्यों उफन रहीं गंगा-गंडक और कोसी? नदियों में कहां से आ रहा इतना पानी, समझिए पूरा खेल

अतिस दीपांकर

Bihar Flood: बिहार में इस साल अगस्त में बारिश सामान्य से काफी कम रही. इसके बावजूद राज्य की कई बड़ी नदियां उफान पर हैं. गंगा, गंडक, कोसी, सोन, पुनपुन, बागमती और बूढ़ी गंडक का जलस्तर बढ़ा है. कई जगह नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि जब बिहार में बारिश कम हुई, तो नदियों में इतना पानी आया कहां से? इसका जवाब सिर्फ बिहार के मौसम में नहीं है. इसके पीछे नेपाल और हिमालयी इलाकों में हुई भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और अलग-अलग नदियों में एक साथ बढ़े पानी की बड़ी भूमिका है.

अगस्त में सामान्य से 33 फीसदी कम बारिश

इस साल अगस्त में बिहार में करीब 155 मिलीमीटर बारिश हुई. यह सामान्य से लगभग 33 फीसदी कम है. यानी अगस्त में बिहार में जितनी बारिश आमतौर पर होती है, उससे काफी कम पानी बरसा.

कम बारिश का असर तापमान और उमस पर भी पड़ा. कई इलाकों में गर्मी बनी रही. लेकिन बिहार में कम बारिश का मतलब यह नहीं है कि यहां की नदियों में भी पानी कम रहेगा.

नेपाल की बारिश से कैसे बढ़ता है बिहार की नदियों का जलस्तर?

बिहार की कई बड़ी नदियों का संबंध नेपाल और हिमालयी क्षेत्र से है. नेपाल के पहाड़ी इलाकों में जब अचानक बहुत ज्यादा बारिश होती है, तो वहां फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है.

पहाड़ों से पानी तेजी से नीचे की ओर आता है. छोटी नदियां और नाले भी भर जाते हैं. इनका पानी बड़ी नदियों में पहुंचता है. यही पानी आगे चलकर बिहार की नदियों का जलस्तर बढ़ाता है.

इसका असर सबसे पहले सीमावर्ती इलाकों में दिख सकता है. इसके बाद पानी नीचे की ओर बढ़ता है और गंगा जैसी बड़ी नदियों पर भी दबाव बढ़ने लगता है.

पटना में बारिश कम, फिर गंगा क्यों बढ़ जाती है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए.

मान लीजिए पटना में सिर्फ 10 मिलीमीटर बारिश हुई. लेकिन गंगा के ऊपरी हिस्से में भारी बारिश हुई. वहां से निकला पानी अलग-अलग नदियों के जरिए धीरे-धीरे गंगा में पहुंचता रहेगा.

गंगा का नदी क्षेत्र बहुत बड़ा है. इसमें कई राज्यों के इलाके शामिल हैं. इसलिए पटना में कम बारिश होने के बावजूद गंगा का जलस्तर बढ़ सकता है. यानी नदी का पानी सिर्फ उस जगह की बारिश पर निर्भर नहीं करता, जहां नदी बह रही है.

गंडक ने भी बढ़ाया गंगा पर दबाव

गंडक बिहार की प्रमुख नदियों में शामिल है. इसका जलग्रहण क्षेत्र नेपाल तक फैला है. नेपाल में भारी बारिश और फ्लैश फ्लड के बाद गंडक में अचानक पानी बढ़ सकता है.

जब गंडक में पानी बढ़ता है, तो आगे चलकर इसका असर गंगा पर भी पड़ता है. यही वजह है कि गंडक के बढ़ते जलस्तर के साथ गंगा पर भी दबाव बढ़ सकता है.

एक साथ कई नदियां बढ़ें तो खतरा ज्यादा

बिहार में इस समय सिर्फ एक नदी की स्थिति चिंता की वजह नहीं है. कई नदियों का जलस्तर एक साथ बढ़ा है.

  • गंगा का जलस्तर बढ़ा है.
  • गंडक में पानी बढ़ा है.
  • कोसी में भी उफान आया है.
  • बागमती का जलस्तर बढ़ा है.
  • बूढ़ी गंडक में भी पानी बढ़ा है.
  • सोन और पुनपुन ने भी चिंता बढ़ाई है.
  • घाघरा समेत अन्य नदियों में भी पानी बढ़ा है.

जब कई नदियां एक साथ बढ़ती हैं, तो निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.

पहाड़ों का पानी मैदानों तक कैसे पहुंचता है?

नेपाल और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश का पानी पहाड़ों से तेजी से नीचे आता है. वहां की भौगोलिक स्थिति इसके लिए जिम्मेदार है.

जब यही पानी मैदानी इलाकों में पहुंचता है, तो बड़ी नदियों का हिस्सा बन जाता है. इसलिए नेपाल में बारिश रुकने के बाद भी बिहार में कुछ समय तक नदी का जलस्तर बढ़ सकता है. इसका कारण ऊपर से लगातार नीचे आ रहा पानी होता है.

बैराज से छोड़े गए पानी का भी पड़ता है असर

नदियों के पानी को नियंत्रित करने के लिए कई जगह बैराज बनाए गए हैं. ऊपर से पानी की आवक बढ़ने पर बैराजों पर भी दबाव बढ़ता है. स्थिति के अनुसार बैराज से पानी छोड़ा जाता है. गंडक नदी पर बने वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़ा गया पानी भी बिहार में नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है.

यानी बिहार की नदियों में पानी बढ़ने की कहानी सिर्फ स्थानीय बारिश तक सीमित नहीं है. इसके पीछे नेपाल की बारिश, पहाड़ी इलाकों से आने वाला पानी, सहायक नदियों का बढ़ता जलस्तर और बैराजों से पानी छोड़े जाने जैसी कई वजहें एक साथ काम करती हैं.

यही कारण है कि बिहार में बारिश कम होने के बावजूद बड़ी नदियां उफान पर पहुंच सकती हैं.

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