
लगातार वर्षा एवं अधिक नमी को देखते हुए किसानों को फसल की नियमित निगरानी की सलाह
धमतरी, 11 सितंबर 2026। जिले में खरीफ वर्ष 2026 के दौरान लगभग 1.39 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में धान की फसल कंसे निकलने से लेकर बालियां आने की अवस्था में है। विगत दिनों लगातार हुई वर्षा तथा वातावरण में अधिक नमी के कारण धान की फसल में विभिन्न कीट एवं रोगों के प्रकोप की संभावना बढ़ गई है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को फसल का नियमित भ्रमण कर कीट एवं रोगों की स्थिति का अवलोकन करने तथा आर्थिक क्षति स्तर से अधिक प्रकोप दिखाई देने पर तत्काल अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है।
तना छेदक के प्रकोप में पौधे की बीच की कंसे सूख जाती हैं, जिसे डेड हार्ट कहा जाता है। बाली अवस्था में बालियां सफेद दिखाई देने लगती हैं। इसके नियंत्रण के लिए कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत दानेदार 10 किलोग्राम प्रति एकड़ अथवा कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 50 प्रतिशत एसपी 400 ग्राम प्रति एकड़ अथवा क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.4 प्रतिशत एससी 60 मिली प्रति एकड़ का उपयोग किया जा सकता है। विभागीय सलाह के अनुसार बाईफेनथ्रीन 10 ईसी 250 मिली प्रति एकड़ के साथ कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 50 एसपी 200 ग्राम प्रति एकड़ का छिड़काव भी किया जा सकता है।
भूरा फुदका (बीपीएच) पौधे के निचले भाग से रस चूसता है, जिससे पौधे सूखने लगते हैं और हॉपर बर्न की स्थिति बनती है। नियंत्रण के लिए खेत से अतिरिक्त पानी निकालने तथा पौधों के कंसे वाले भाग में इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 50 मिली, डाइनोटेफ्यूरॉन 20 प्रतिशत एसजी 80 ग्राम अथवा ट्राईफ्लूमैजोपाइरिम 10 एससी 100 मिली प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
पत्ता लपेटक/पत्ता मोड़क कीट पत्तियों को लपेटकर अंदर से खाता है। इसके प्रकोप की स्थिति में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल अथवा कारटाप का अनुशंसित मात्रा में प्रयोग प्रभावी पाया जाता है। वहीं पेनिकल माइट के प्रकोप में बालियां निकलने से पहले ही दानों को नुकसान पहुंचता है। बालियों पर भूरे-काले धब्बे, दाने नहीं भरना तथा बाली का मुड़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं। नियंत्रण के लिए डायफेथ्यूरॉन 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 ग्राम प्रति एकड़ तथा प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी 200 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव किया जा सकता है।
रोग प्रबंधन के लिए भी सतर्कता जरूरी
धान में ब्लास्ट रोग के प्रकोप में पत्तियों पर आंख के आकार के धब्बे तथा बाली के गले में काले धब्बे दिखाई देते हैं, जिससे बाली टूट सकती है। इसके नियंत्रण के लिए ट्राइसाइक्लाजोल 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी 120 ग्राम प्रति एकड़ अथवा एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत + डाइफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत एससी 200 मिली प्रति एकड़ का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
जीवाणु पत्ता झुलसा रोग में पत्तियां किनारों से पीली होकर सूखने लगती हैं। इसके नियंत्रण के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट + टेट्रासाइक्लिन 60 ग्राम तथा कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 500 ग्राम प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा में छिड़काव की सलाह दी गई है। साथ ही नाइट्रोजन उर्वरक का अत्यधिक उपयोग नहीं करने कहा गया है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि कीटनाशक एवं फफूंदनाशक का छिड़काव सुबह या शाम के समय ही करें और निर्धारित मात्रा से अधिक दवा का प्रयोग न करें। दवाओं के डिब्बे पर दिए गए निर्देशों एवं सुरक्षा सावधानियों का अनिवार्य रूप से पालन करें। किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशक का प्रयोग करने से पहले ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेना उचित होगा।
किसान कीट एवं रोग की पहचान तथा नियंत्रण संबंधी अधिक जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं। साथ ही कृषि विभाग के मैदानी अमले से भी आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त किया जा सकता है।









