
अम्बिकापुर 15 अक्टूबर 2026/ किसी भी जिले का वास्तविक विकास तब दिखाई देता है, जब शासन की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने लगे। जब आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद विद्यार्थी उच्च शिक्षा की ओर आगे बढ़ें, महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से परिवार की जिम्मेदारी संभालें और उद्यमी उद्योग स्थापित कर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करें, तब विकास की तस्वीर अधिक व्यापक और सार्थक बनती है। सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हितग्राहियों के अनुभव विकास, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की संभावनाओं को सामने ला रहे हैं।
पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें लोगों को अपनी जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इन योजनाओं से आर्थिक सहायता के साथ परिवारों को खर्च कम करने, शिक्षा जारी रखने, स्वरोजगार अपनाने और आय के नए साधन विकसित करने में मदद मिल रही है।
सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन
बढ़ती बिजली जरूरतों और घरेलू खर्च के बीच सौर ऊर्जा आम उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी विकल्प बन रही है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी पंकज साहू ने योजना का लाभ लेकर अपने घर में तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है।
पंकज साहू के अनुसार, पहले गर्मी के दिनों में उनके घर का बिजली बिल प्रतिमाह लगभग चार से पांच हजार रुपये तक आता था। बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सोलर सिस्टम लगवाया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये, कुल एक लाख आठ हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई।
सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई। कई बार जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजे जाने के कारण उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है।
छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा की राह हुई आसान
शिक्षा सामाजिक और आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता प्रदान करने वाली छात्रवृत्ति योजनाएं उनके शैक्षणिक सफर को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कृष्णा यादव की कहानी इसी दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
कृष्णा के पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय वाले परिवार के लिए घर की आवश्यकताओं के साथ उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता है। किताबें, कॉपी और कॉलेज आने-जाने के खर्च जैसी जरूरतों को पूरा करने में छात्रवृत्ति कृष्णा के लिए सहायक बन रही है।
छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता उन्हें पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और कॉलेज तक आने-जाने के खर्च में राहत प्रदान करती है। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिलती है और कृष्णा को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।
स्वरोजगार से उद्योग स्थापना और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
किसी भी क्षेत्र की आर्थिक प्रगति में उद्यमिता और रोजगार सृजन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है। अम्बिकापुर की श्रीमती हर्षिता खत्री ने इस योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है।
श्रीमती हर्षिता खत्री श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं, जबकि उनके पति दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा लंबे समय से थी, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उद्योग स्थापित करना संभव नहीं हो पा रहा था। जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद उनकी पत्नी के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। ऋण प्राप्त होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई स्थापित की गई।
इस इकाई में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उद्योग की स्थापना से न केवल एक परिवार की आर्थिक गतिविधि बढ़ती है, बल्कि उससे जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिलता है।
सक्षम योजना से इंदु लता ने बदली परिवार की आर्थिक तस्वीर
महिला सशक्तीकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें अपने परिवार के भविष्य के लिए निर्णय लेने का अवसर प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना का लाभ लेकर इंदु लता गुप्ता ने कठिन परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया।
पति के निधन के बाद इंदु लता पर अपनी चार बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी। परिवार की नियमित आय का साधन नहीं होने के कारण दैनिक खर्च और बेटियों की पढ़ाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें सक्षम योजना की जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त होने पर उन्होंने अपनी ओर से भी राशि जोड़कर दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय शुरू किया।
वर्तमान में दोनों भैंसों से प्राप्त दूध की बिक्री से परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की शिक्षा में सहायता कर रही है। इंदु लता की एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है, दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटियों की पढ़ाई जारी रखना इंदु लता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
महतारी वंदन योजना से सिलाई कार्य को मिला आर्थिक संबल
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं अपने कौशल के माध्यम से आय अर्जित करें, तो इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी सरिता तिग्गा इसका उदाहरण हैं। उनके पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं और परिवार में तीन बच्चे हैं। सीमित आय में परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ बच्चों का पालन-पोषण करना उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
सरिता घर पर सिलाई का काम करती हैं और इस माध्यम से परिवार की आय में योगदान देती हैं। सिलाई कार्य को जारी रखने के लिए उन्हें समय-समय पर धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदनी पड़ती है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि का उपयोग वे इन जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। सरिता का उदाहरण बताता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके कौशल और मेहनत को स्वरोजगार से जोड़ने में उपयोगी हो सकती है।
सरगुजा जिले के ये उदाहरण बताते हैं कि जब योजनाओं से मिलने वाली सहायता लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ती है, तो वह उनके लिए आगे बढ़ने का आधार बन सकती है। सौर ऊर्जा से घरेलू खर्च में राहत, छात्रवृत्ति से शिक्षा को संबल, उद्यमिता से रोजगार और महिला सशक्तीकरण से परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार-ये सभी प्रयास जिले में आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की संभावनाओं को मजबूत करते हैं।
अम्बिकापुर 15 अक्टूबर 2026/ एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, शिवपुर-बतौली, जिला सरगुजा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए PGT अर्थशास्त्र के अतिथि शिक्षक पद पर भर्ती हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 20 अक्टूबर 2026 को शाम 5 बजे तक अपना बायोडाटा एवं शैक्षणिक दस्तावेज ई-मेल girlseklavyabatuli54@gmail.com पर भेज सकते हैं।
पद के लिए अर्थशास्त्र में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए.) एवं बी.एड. अनिवार्य है। वॉक-इन-इंटरव्यू 22 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10 बजे से विद्यालय परिसर में आयोजित होगा। अभ्यर्थियों को मूल प्रमाण-पत्र, स्व-प्रमाणित छायाप्रतियां एवं पासपोर्ट साइज फोटो साथ लाना होगा। अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 7340641335 एवं 7080367975 पर संपर्क किया जा सकता है।
अम्बिकापुर 15 अक्टूबर 2026/ आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत प्रयास आवासीय विद्यालय (घंघरी) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु चतुर्थ ओपन काउंसलिंग का आयोजन 16 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। काउंसलिंग पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर आयोजित होगी। इच्छुक एवं पात्र छात्र-छात्राओं को निर्धारित तिथि और समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ काउंसलिंग स्थल पर उपस्थित होना अनिवार्य है।
आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर द्वारा जारी पत्र के अनुसार काउंसलिंग 16 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। काउंसलिंग का स्थान कार्यालय आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, इन्द्रावती भवन, नवा रायपुर, अटल नगर, ब्लॉक-5, तृतीय तल, हॉल नंबर-4 निर्धारित किया गया है। काउंसलिंग से संबंधित तिथि एवं जानकारी विभागीय वेबसाइट https://eklavya.cg.nic.in/ पर भी प्रदर्शित की गई है।
काउंसलिंग में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं को कक्षा 8वीं में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने की अंकसूची (न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक), पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी नक्सल पीड़ित प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र तथा संबंधित पात्रता के अनुसार विशेष पिछड़ी जनजाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। अल्पसंख्यक वर्ग के अंतर्गत पात्रता का दावा करने वाले विद्यार्थियों को 10 रुपये के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा।
विशेष श्रेणी के अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को अपनी संबंधित पात्रता के समर्थन में प्रमाण पत्र लाना अनिवार्य है। इसमें दिव्यांग विद्यार्थी, दिव्यांग माता-पिता के बच्चे, अनाथ बच्चे, विधवा माता के बच्चे, परित्यक्ता महिला के बच्चे तथा देश की रक्षा करते हुए अथवा कर्तव्य निर्वहन के दौरान शहीद हुए पुलिस, अर्द्धसैनिक बल, सशस्त्र बल के जवानों के बच्चे शामिल हैं। संबंधित श्रेणी का प्रमाण पत्र काउंसलिंग के समय प्रस्तुत करना होगा।
काउंसलिंग के बाद प्रवेश के लिए पात्र पाए जाने वाले विद्यार्थियों को दो दिवस के भीतर संबंधित प्रयास आवासीय विद्यालय में जिला शिक्षा अधिकारी से काउंटर हस्ताक्षरित स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) तथा जिला चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी सिकलसेल जांच प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि उपलब्ध रिक्त सीटों की संख्या में वृद्धि अथवा कमी हो सकती है। इसलिए प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित तिथि पर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ काउंसलिंग में उपस्थित हों तथा विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी का अवलोकन कर लें।
अम्बिकापुर 15 अक्टूबर 2026/ प्रधानमंत्री आवास योजना से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के परिवारों का पक्के आवास का सपना साकार हो रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मानिकप्रकाशपुर निवासी दिलबंधु भी योजना का लाभ पाकर खुश हैं। कभी मिट्टी के कच्चे मकान में रहने वाले दिलबंधु अब पक्के घर में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसके साथ ही गांव में सड़क, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से उनके परिवार का दैनिक जीवन भी आसान हुआ है। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत दिलबंधु की यह कहानी शासकीय योजनाओं से ग्रामीण जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।
बरसात में टपकती थी छत, खपरा लगाकर करनी पड़ती थी मरम्मत
दिलबंधु ने बताया कि पहले उनका परिवार मिट्टी के कच्चे मकान में रहता था। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण काफी परेशानी होती थी। बारिश से बचाव के लिए खपरा लगाकर छत की मरम्मत करनी पड़ती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनने से अब इन समस्याओं से राहत मिली है। परिवार को सुरक्षित आवास मिलने के साथ ही हर वर्ष बारिश के मौसम में होने वाली परेशानियों से छुटकारा मिला है।
बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली गांव की तस्वीर
दिलबंधु ने बताया कि पहले गांव में झाड़ी-झंखाड़ अधिक थे और सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं होने से आवागमन में कठिनाई होती थी। अब सड़क निर्माण से ग्रामीणों का आना-जाना सुगम हुआ है। सड़क पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था के साथ ही पीने के पानी और गैस चूल्हे की सुविधा भी उपलब्ध हुई है। इन सुविधाओं से परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी करने में आसानी हो रही है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार
पक्का आवास मिलने से प्रसन्न दिलबंधु ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पहले कच्चे मकान में बरसात के समय काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब पक्का घर बनने से परिवार को बड़ी राहत मिली है। गांव में अन्य सुविधाओं का विस्तार होने से रहन-सहन भी बेहतर हुआ है।
पीएम जनमन योजना से आवास एवं बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिलने से विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है।
अम्बिकापुर 15 अक्टूबर 2026/ प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से नागरिकों को सौर ऊर्जा अपनाने और घरेलू बिजली खर्च कम करने का अवसर मिल रहा है। अम्बिकापुर के प्रतापपुर रोड निवासी कृष्ण कुमार गुप्ता ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कर बिजली उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनके अनुसार सोलर सिस्टम से प्रतिदिन लगभग 20 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जो उनके परिवार की घरेलू खपत से अधिक है। इससे बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ ही वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को लेकर उत्साहित हैं। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत उनकी यह कहानी सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ती जागरूकता और शासकीय योजना से मिल रहे लाभ को दर्शाती है।
’प्रतिदिन लगभग 20 यूनिट बिजली का उत्पादन, घरेलू खर्च में बचत’
कृष्ण कुमार गुप्ता ने बताया कि पहले वे घरेलू जरूरतों के लिए पूरी तरह विद्युत आपूर्ति पर निर्भर थे। बिजली की खपत के अनुसार हर महीने बिल का भुगतान करना पड़ता था। पीएम सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपने घर पर 5 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगवाया। अब इससे प्रतिदिन औसतन 20 यूनिट बिजली प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि सोलर सिस्टम से उत्पादित बिजली उनकी घरेलू आवश्यकता से अधिक होने के कारण बिजली पर होने वाले खर्च में कमी आई है।
’1.08 लाख रुपये की सब्सिडी से सोलर सिस्टम लगवाना हुआ आसान’
कृष्ण कुमार ने बताया कि योजना के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी का प्रावधान है। इससे सोलर सिस्टम स्थापित करने में आर्थिक सहायता मिलती है। उन्होंने बताया कि शेष राशि के लिए बैंक से ऋण लेकर किस्तों में भुगतान करने की सुविधा भी उपलब्ध है। उनके अनुसार मासिक किस्तों के माध्यम से राशि चुकाने का विकल्प होने से इच्छुक परिवारों को सोलर सिस्टम लगवाने में आसानी हो सकती है।
’ऊर्जा उपभोक्ता से ऊर्जा उत्पादक बनने पर जताई खुशी’
कृष्ण कुमार ने कहा कि सोलर सिस्टम लगवाने के बाद उनके परिवार को बिजली खर्च में राहत मिल रही है। उन्होंने कहा, पहले हम ऊर्जा उपभोक्ता थे, अब ऊर्जा दाता बन गए हैं। हमारे घर में जितनी बिजली की जरूरत है, उससे अधिक बिजली सोलर सिस्टम से मिल रही है। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाने और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी लेकर इसका लाभ उठाने की अपील की। उनका कहना है कि सौर ऊर्जा के उपयोग से घरेलू बिजली खर्च कम करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलता है।
योजना का लाभ मिलने पर कृष्ण कुमार गुप्ता ने केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सोलर सिस्टम स्थापित होने से परिवार को आर्थिक राहत मिली है और भविष्य में भी इसका लाभ मिलता रहेगा। उनकी यह पहल घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा उत्पादन और बिजली खर्च में बचत की दिशा में एक उदाहरण बन रही है।
अम्बिकापुर 15 अक्टूबर 2026/ स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। इसकी प्रेरक मिसाल हैं जल कुमारी, जिन्होंने महज 1500 रुपये से सूअर पालन शुरू कर आज अपनी सालाना आमदनी डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंचा दी है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली जल कुमारी अब किराना दुकान, आटा-धान चक्की, सूअर एवं बकरी पालन जैसी आजीविका गतिविधियों से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
’समूह से जुड़कर बचत की शुरुआत, स्वरोजगार को मिली नई दिशा’
जल कुमारी बताती हैं कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उन्हें बैंकिंग प्रक्रिया और बचत की जानकारी भी नहीं थी। 16 मार्च 2013 को स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत शुरू की। समूह से मिले 1500 रुपये से सूअर पालन का व्यवसाय प्रारंभ किया, जिससे वर्तमान में सालाना लगभग 30 से 35 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
इसके बाद उन्होंने समूह के माध्यम से 70 हजार रुपये का ऋण लेकर किराना दुकान शुरू की तथा आटा चक्की और धान चक्की स्थापित की। अतिरिक्त आय के लिए दो बकरियों से बकरी पालन की शुरुआत की। आज उनके पास 17 से 18 बकरियां हैं, जिनसे सालाना लगभग 25 से 30 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है।
’आर्थिक आत्मनिर्भरता से परिवार के जीवन में आया बदलाव’
जल कुमारी के अनुसार विभिन्न आजीविका गतिविधियों से अब उनकी कुल वार्षिक आमदनी लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला पा रही हैं। समूह से जुड़ने के बाद उनमें बचत, बैंकिंग और व्यवसाय संचालन के प्रति आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
अपनी सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए जल कुमारी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के साथ समाज में नई पहचान मिल रही है। उनकी सफलता छोटी बचत और स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की प्रेरक उदाहरण है।








