
*सेवा की कहानी*
रायपुर,15 अक्टूबर 2026/
‘जब हाथ मजबूत हों, तो संकल्प धरातल पर उतर ही आता है।’छत्तीसगढ़ के सुदूर एवं वनांचल जिले नारायणपुर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ न केवल माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को संबल दे रहा है, बल्कि धरातल पर काम कर रही हमारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सशक्त भी बना रहा है। इसकी मिसाल बेनूर परियोजना के कोलियारी-03 केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दामिनी नाग की कहानी से स्पष्ट झलकती है।
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी और जनहितैषी ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ गर्भवती एवं धात्री माताओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित मातृत्व को प्रोत्साहित करने में एक प्रभावशाली पहल साबित हो रही है। इस योजना के तहत प्रथम जीवित संतान के जन्म पर 5,000 रुपए तथा द्वितीय संतान के रूप में बालिका के जन्म पर 6,000 रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से पात्र हितग्राहियों का समयबद्ध पंजीयन किया जा रहा है।
नारायणपुर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,192 पात्र महिलाओं जिसमें ओरछा विकासखंड के 332 हितग्राही शामिल हैं और वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 557 महिलाओं जिसमें ओरछा के 122 हितग्राही शामिल हैं, को योजना से लाभान्वित किया जा चुका है। इससे संस्थागत प्रसव, नियमित जांच, पूर्ण टीकाकरण और कुपोषण में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को नई गति मिली है।
इस सफलता के पीछे दामिनी नाग जैसी जमीनी कार्यकर्ताओं की मेहनत और बदलती सोच है। दामिनी वर्षों से अपने केंद्र में सेवाएं दे रही थीं, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म (PMMVY ऐप एवं वेबसाइट) पर ऑनलाइन आवेदन और तकनीकी प्रक्रियाओं के लिए उन्हें हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। स्थिति तब और चुनौतीपूर्ण हो गई जब उनके केंद्र की एक लाभार्थी का मामला बैंक खाते की NPCI या आधार सीडिंग की तकनीकी अड़चन के कारण महीनों से प्री-रजिस्ट्रेशन चरण में ही अटका रहा।
स्थिति में निर्णायक मोड़ तब आया जब दामिनी ने महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से आयोजित विशेष PMMVY प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कार्यकर्ताओं को बिना किसी बाहरी सहायता के ऐप और वेबसाइट के माध्यम से पंजीयन करने में सक्षम बनाना था। प्रशिक्षण पूरा होते ही दामिनी में एक नया आत्मविश्वास जागा। उन्होंने बिना समय गंवाए अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग कर सबसे पहले उसी महीनों से लंबित मामले की आधार सीडिंग सफलतापूर्वक पूरी की। इसके तुरंत बाद, उन्होंने गाँव में एक नई लाभार्थी को स्वयं खोजकर उसका पंजीकरण भी पूरी तरह स्वतंत्र रूप से संपन्न कर दिया।
आज दामिनी नाग डिजिटल माध्यमों पर आत्मविश्वास के साथ कार्य कर रही हैं। उनकी यह प्रेरक गाथा दर्शाती है कि जब फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन मिलता है, तो उनकी क्षमता और आत्मनिर्भरता तेजी से निखरती है, जिससे शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक बेहद पारदर्शिता और तेजी से पहुँच पाता है। आने वाले समय में भी नारायणपुर जिला प्रशासन अधिक से अधिक महिलाओं को इस सुरक्षा चक्र से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।









