
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अगस्त में हुई जांच, समय पर पहचान और उपचार से गंभीर बीमारियों से बचाव संभव*
रायपुर , 15 अक्टूबर 2026/
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत हेपेटाइटिस बी, सी, ए एवं ई की जांच की जा रही है। विभाग की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस बी की रैपिड जांच में 2,087 तथा हेपेटाइटिस सी की रैपिड जांच में 2,083 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसके अलावा हेपेटाइटिस ए के 57 और हेपेटाइटिस ई के 52 लोगों की जांच की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, हेपेटाइटिस बी की रैपिड जांच में 48 और हेपेटाइटिस सी की रैपिड जांच में 19 लोग पॉजिटिव पाए गए। हेपेटाइटिस बी की एलिसा जांच में 77 लोगों में से 63 पॉजिटिव मिले, जबकि वायरल लोड जांच में 42 लोगों में से 25 की रिपोर्ट पॉजिटिव रही। हेपेटाइटिस सी की एलिसा जांच में 38 लोगों में से 30 पॉजिटिव मिले तथा वायरल लोड जांच में 12 लोगों में कोई पॉजिटिव नहीं मिला।
हेपेटाइटिस ए की जांच में एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया, जबकि हेपेटाइटिस ई की जांच में कोई पॉजिटिव मामला दर्ज नहीं हुआ। ये आंकड़े अलग-अलग जांच चरणों के हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग व्यक्तियों की कुल संख्या नहीं माना जाना चाहिए।
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम में समय पर जांच, सही निदान और वैज्ञानिक उपचार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
माइक्रोबायोलॉजी के दृष्टिकोण से देखें तो हेपेटाइटिस बी और सी के कई संक्रमण शुरुआती अवस्था में बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकते हैं। ऐसे में जांच के माध्यम से संक्रमण की पहचान करना और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आगे की जांच कराना बेहद जरूरी है। हेपेटाइटिस बी और सी की पुष्टि के लिए आवश्यकतानुसार एलिसा तथा वायरल लोड जैसी जांचें संक्रमण के आकलन और उपचार संबंधी निर्णयों में मदद करती हैं। हेपेटाइटिस बी के लिए टीकाकरण प्रभावी बचाव का उपाय है, जबकि हेपेटाइटिस सी का उपचार उपलब्ध दवाओं से संभव है।
उन्होंने कहा कि लोगों को बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के स्वयं दवा लेने से बचना चाहिए। सिम्स में संचालित यह कार्यक्रम संक्रमण की पहचान, उपचार से जुड़ाव और जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। आम नागरिकों को भी रक्तदान, इंजेक्शन और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं के दौरान सुरक्षित तरीकों का पालन करना चाहिए।
विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा बारापात्रे ने बताया कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए स्वच्छ पानी, सुरक्षित भोजन, हाथों की सफाई, सुरक्षित रक्त और स्टरलाइज्ड सुई का उपयोग जरूरी है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीकाकरण कराएं तथा जांच में पॉजिटिव आने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर आगे की जांच और उपचार कराएं।









