
यमन के अदन शहर का एक मामूली पेट्रोल पंप… भारत में ईंधन की भयंकर कमी… और एक आम से हिंदुस्तानी की आंखों में पल रहा एक ऐसा दुस्साहसी ख्वाब, जिसने आगे चलकर वैश्विक ऊर्जा बाजार की धुरी ही बदल दी।
यह कहानी है दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनरी प्लांट जामनगर के जन्म की और वह सपना देखने वाले शख्स कोई और नहीं, बल्कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के फाउंडर धीरूभाई अंबानी थे।
इस रिफाइनरी का रुतबा आज ऐसा है कि इसने दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के गुरूर को भी अपने दरवाजे पर आने को मजबूर कर दिया। जी हां, जिस अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी रूस से तेल खरीदने के नाम पर भारत को टैरिफ और प्रतिबंधों की धमकियां देते थे, आज वही ट्रंप सरकार के अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस प्लांट का मुआयना करने खुद चलकर भारत आए।
यूं तो बिहार, पश्चिम बंगाल और असम से लेकर केरल के समुद्री तटों तक, पूरे देश में 22 रिफाइनरियां दिन-रात धड़कती हैं।
यहां हर रोज लाखों बैरल कच्चे तेल को साफ करके देश के कोने-कोने में पेट्रोल-डीजल दौड़ाया जाता है। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल उठता है कि आखिर अमेरिकी विदेश मंत्री ने बाकी 22 रिफाइनरियों को छोड़कर सिर्फ अरबपति मुकेश अंबानी के जामनगर कॉम्प्लेक्स का ही रुख क्यों किया?
आइए, इस रिपोर्ट में डिकोड करते हैं जामनगर के उस ग्लोबल पावर प्ले को जिसने अमेरिका को भारत आने पर मजबूर कर दिया। साथ ही जानेंगे देश की उन सभी 22 रिफाइनरियों का पूरा खाका वो कहां हैं, कितनी ताकतवर हैं और उन्हें कौन सी कंपनी चलाती है।
3 बातें जो मुकेश अंबानी की जामनगर को खास बनाती हैं?
1.ज्यादा तेल निकालने की क्षमता
भारत में सरकारी, प्राइवेट और जॉइंट वेंचर की फैक्टरियों को मिलाकर कुल रिफाइनिंग क्षमता 267 मिलियन मीट्रिक टन सालाना (MMTPA) से ज्यादा है. यह सड़कों पर पेट्रोल-डीजल से लदे दिखने वाले लगभग 1.33 करोड़ टैंकर ट्रक के बराबर है. इसमें से अकेले जामनगर में बनी रिलायंस की दो यूनिट्स देश की कुल ऑपरेटिंग कैपेसिटी का एक-चौथाई से भी अधिक हिस्सा रखती हैं.
2. भारत और दुनिया के लिए अलग-अलग यूनिट
यह कॉम्प्लेक्स दो यूनिट में है, जो एक दूसरी से जुड़ी युनिट में फैला हुआ है. जिसमें पहली 1999 में शुरू हुई और भारत में तेल की जरूरत को पूरा करती है. वहीं दूसरी 2008 में शुरू हुई जो भारत से बाहत निर्यात पर फोकस करती है. इन दोनों को मिलाकर, इनकी टोटल क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग कैपेसिटी करीब 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन (68.2 MMTPA) है. यह इसे दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट कच्चा तेल रिफाइनरी बनाता है, जो दुनिया की रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 1.5% हिस्सा है.
3. खराब तेल भी यहां रिफाइन हो जाता है
हालांकि, साइज केवल एक पहलू है. लगभग 21.1 की बहुत ज्यादा ‘नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स’ रेटिंग के साथ, यह सुविधा इस तरह से डिजाइन की गई है कि यह भारी, खट्टे और सल्फर युक्त कच्चे तेल को आसानी से प्रोसेस कर सकती है. यानी बहुत ज्यादा अशुद्धियों से भरे तेल को भी यहां रिफाइन किया जा सकता है. जिसे कई सामान्य रिफाइनरियां ठीक तरीके से प्रोसेस नहीं कर पातीं। इस प्लांट में अब तक 216 से अधिक अलग-अलग प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस किया जा चुका है.
रिलायंस को वेनेजुएला से कितना तेल भेजेगा अमेरिका?
अब अमेरिका के कच्चे तेल के लिए इस एक खास केंद्र बनाना चाहता है. एनर्जी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, रिलायंस को वेनेजुएला से प्रतिदिन 350,000 से 370,000 बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति देने का अनुमान है.
अपनी यात्रा से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, सेक्रेटरी रुबियो ने कहा, “हम वेनेजुएला के और अधिक कच्चे तेल को रिफाइन करने के बारे में रिलायंस से चर्चा करेंगे. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारी कच्चे तेल को ऐसे उच्च-क्षमता वाले रिफाइनिंग केंद्रों की ओर मोड़ना है, जहां उसकी अधिकतम वैल्यू निकाली जा सके. यह अमेरिका और भारत दोनों के हित में है.”
भारत के 22 रिफाइनिंग प्लांट कहां-कहां पर हैं?
पश्चिम बंगाल के हल्दिया शहर में और बिहार के बरौनी में भी रिफानरी मौजूद हैं, जहां से पेट्रोल-डीजल को क्रूड ऑयल से छान कर निकाला जाता है।
हालांकि जामनगर का दबदबा सबसे ज्यादा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसी की चर्चा होती है, लेकिन भारत में सरकारी और निजी क्षेत्र की कई सुविधाओं के जरिए कच्चे तेल की प्रोसेसिंग की जाती है. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी कंपनियां देश के ज्यादातर सप्लाई को संभालती हैं.






