
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को ‘रिफाइनिंग सुपरपावर’ बताया है. 20 अक्टूबर को मुंबई में उन्होंने कहा कि भारत के पास भारी कच्चे तेल को साफ करके उपयोगी ईंधन बनाने की क्षमता और इसका अनुभव रखने वाली कंपनियां हैं. वेनेजुएला से अधिक तेल बाजार में आने की संभावना का जिक्र करते हुए उन्होंने भारत की इस क्षमता की अहमियत बताई. उनकी टिप्पणी के केंद्र में रिलायंस और गुजरात का जामनगर रिफाइनरी परिसर है.
इसका जवाब एक शब्द में है- लचीलापन.
यानी अलग-अलग तरह का कच्चा तेल खरीदने, उसे इस्तेमाल योग्य बनाने और बाजार की जरूरत के मुताबिक ईंधन तैयार करने की क्षमता. जामनगर का बड़ा आकार और उसकी जटिल तकनीकी व्यवस्था मिलकर उसे यह ताकत देते हैं.
तेल निकालना और उसे इस्तेमाल लायक बनाना अलग बातें हैं
तेल के कुएं से निकलने वाला कच्चा तेल सीधे कार, ट्रक या विमान में नहीं भरा जा सकता.
हर कच्चा तेल एक जैसा नहीं होता
अलग-अलग क्षेत्रों से निकलने वाले कच्चे तेल की बनावट अलग होती है. कोई हल्का होता है, कोई भारी. किसी में सल्फर अधिक होता है, तो किसी में कम. इन अंतरों से तय होता है कि उसे साफ करना कितना कठिन होगा और उससे कौन-से उत्पाद बनाए जा सकेंगे.
इसे रसोई के उदाहरण से समझ सकते हैं.
क्या है नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स?
किसी रिफाइनरी की तकनीकी बनावट समझने का एक पैमाना है नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स, जिसे संक्षेप में NCI कहते हैं. यह बताता है कि कच्चे तेल को शुरुआती स्तर पर अलग करने वाली मूल इकाई के मुकाबले वहां अतिरिक्त प्रसंस्करण और गुणवत्ता सुधारने वाली कितनी सुविधाएं हैं.
आसान भाषा में, अधिक NCI आम तौर पर बताता है कि रिफाइनरी में तेल के भारी और कम मूल्य वाले हिस्सों को अधिक उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए ज्यादा सुविधाएं मौजूद हैं.
जामनगर का 21.1 अंक क्यों महत्वपूर्ण है?
रिलायंस के अनुसार, जामनगर परिसर का NCI 21.1 है और उसकी कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता प्रतिदिन लगभग 14 लाख बैरल है. कंपनी इसे एक ही स्थान पर स्थित दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जटिल रिफाइनरी परिसर बताती है.






