हे रिश्वत खोरों, कर्मफल से डरोगे-बेमौत नहीं मरोगे, दुख नहीं मिलेगा औलाद से, खुशी से जीवन यापन करोगे, कर्मांे का फल, आज नही ंतो कल, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
एक बेहद सात्विक, ईमानदार और सच्चे इंसान की जीवनी मुझे देखने को मिली। वह एक टीचर थे और मेरे पिताजी को कभी पढ़ाया करते थे। कई साल बाद उन्हें रिटायर…
Read moreराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर विशेष पंच परिवर्तन से बदल जाएगा समाज का चेहरा-मोहरा प्रो. संजय द्विवेदी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर इतिहास के चक्र में किसी सांस्कृतिक संगठन के सौ साल की यात्रा साधारण नहीं होती। यह यात्रा बीज से बिरवा और अंततः उसके…
Read moreदो शेर-दोनों ढेर, ताला है चाबी नहीं, अमित शाह के दरवाजे बंद, उद्धव-राज को राजपाट मुश्किल वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
इमली का बूटा बेरी का बेर, इमली खट्टी मीठे बेर, इस जंगल में हम दो शेर, चल घर जल्दी हो गयी देर….. ये पंक्तियां सौदागर फिलिम के दो हीरो जाॅनी…
Read moreगिरते पुल, ढहती ज़िम्मेदारियाँ: बुनियादी ढांचे की सड़न और सुधार की ज़रूरत”
वडोदरा में पुल गिरना कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि भारत के जर्जर होते बुनियादी ढांचे की डरावनी सच्चाई है। पुरानी संरचनाएं, घटिया सामग्री, भ्रष्टाचार और निरीक्षण की अनुपस्थिति —…
Read more(13 जुलाई जयंती विशेष) गुरु दक्ष प्रजापति: सृष्टि के अनुशासन और संस्कारों के प्रतीक
सृष्टिकर्ता ब्रह्मा के पुत्र गुरु दक्ष प्रजापति वेदों, यज्ञों और परिवार प्रणाली के आधार स्तंभ माने जाते हैं। उन्होंने अनुशासन और मर्यादा को समाज में स्थापित किया, किन्तु शिव-सती…
Read moreसास भी कभी बहु थी-फिर स्मृति ईरानी,कान पकड़वाने पर कलेक्टर को खेद, शाबाश बिजली कर्मी,महानुभाव को महा अनुभव वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी…. खरी….
पुराने दिन लौटे स्मृति के क्यांेकि सास भी कभी बहु थी का एक और सीज़न चालू होने वाला है। इसकी उस समय की सबसे चर्चित कलाकार स्मृति ईरानी ने अपनी…
Read moreधर्म-भाषा विवाद : खत्म होती राजनीति को बचाने की कोशिश (आलेख : मुकुल सरल)
कोई कहता है– जय श्रीराम बोलना होगा (हिंदुत्ववादी) कोई कहता है– मराठी बोलनी होगी (महाराष्ट्र में मनसे) कोई कहता है– हिंदी पढ़नी होगी (सरकार का त्रिभाषा फ़ार्मूला) कोई कहता है–…
Read more“बचपन को अख़बारों में जगह क्यों नहीं?”
रविवार की सुबह बेटे प्रज्ञान को गोद में लेकर अख़बार से कोई रोचक बाल-कहानी पढ़ाने की इच्छा अधूरी रह गई। किसी भी प्रमुख अख़बार में बच्चों के लिए एक भी…
Read moreई-वोटिंग: लोकतंत्र की मजबूती या तकनीकी जटिलता?
ई-वोटिंग मतदान प्रक्रिया को सरल, सुलभ और व्यापक बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है। बिहार के प्रयोग से स्पष्ट है कि मोबाइल ऐप के माध्यम…
Read moreकृष्ण कल्पित प्रसंग : केवल एक कवि का पतन नहीं, समूचे काव्य-प्रेमी समाज की आत्मपरीक्षा है (टिप्पणी : अरुण माहेश्वरी)
पटना में कृष्ण कल्पित की हरकत केवल एक सामाजिक अपराध नहीं, बल्कि एक विकृत आत्म-संरचना का उदाहरण भी है। वह जो अपने भाषिक तेवर में विद्रोही और मुक्त दिखाई…
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