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निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों की समीक्षा पर बैठक की अध्यक्षता की

सीतारमण ने पीएसजीआईसी को नए और उभरते जोखिमों को ध्यान में रखते हुए नवाचारी इंश्योरेंस उत्पाद निर्माण करने का निर्देश दिया

केंद्रीय वित्त मंत्री ने सभी पीएसजीआईसी में सर्विस डिलीवरी और क्षमता में सुधार के लिए डिजिटल बदलाव की तत्काल जरूरत पर जोर दिया

नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों (पीएसजीआईसी) की समीक्षा पर बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सचिव, वित्तीय सेवाएं विभाग (डीएफएस) श्री एम. नागराजू और पीएसजीआईसी के प्रबंध निदेशक – न्यू इंडिया इंश्योरेंस, युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और नेशनल इंश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (रिइंश्योरेंस), एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड और वित्त मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक में, केंद्रीय वित्त मंत्री ने प्रीमियम कलेक्शन, इंश्योरेंस की पहुंच और घनत्व, और किए गए दावों का अनुपात जैसे प्रमुख संकेतकों की समीक्षा की। यह बात रेखांकित हुई कि पीएसजीआईसी की ओर से किए गए कुल प्रीमियम संग्रह में बड़ा उछाल आया है और यह 2019 में ₹80,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में ₹1.06 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कुल मिलाकर जनरल इंश्योरेंस इंडस्ट्री ने प्रगति की है, और वित्त वर्ष 2024-25 में कुल प्रीमियम कलेक्शन ₹3.07 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।

जहां सामान्य बीमा की भारत में पहुंच 2023 के वैश्विक अनुपात 4.2% के मुकाबले- बहुत कम जीडीपी का 1% है – बीमा घनत्व में तेज प्रगति हुई है, जो 2019 में $9 से बढ़कर 2023 में $25 हो गया है। वित्त मंत्री ने पीएसजीआईसी की जरूरत को रेखांकित किया और व्यापक वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहुंच व घनत्व को सुधारने पर काम करने को कहा।

अधिकारियों ने स्वास्थ्य बीमा सेगमेंट के पांच साल का विश्लेषण प्रस्तुत किया, जो निजी बीमाप्रदाता, स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमाप्रदाता (एसएएचआई) और पीएसजीआईसी में सतत प्रीमियम की बढ़ोतरी को दर्शाते हैं। किए गए दावों का अनुपात, जो वित्त वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान अपने उच्चतम स्तर (पीएसजीआईसी 126% पर और निजी बीमाप्रदाता 105% पर) तक पहुंच गया था, तब से घट रहा है। वित्त वर्ष 2024 तक, यह अनुपात पीएसजीआईसी के लिए 103% और निजी बीमाप्रदाता के लिए 89% और एसएएचआई के लिए 65% पर है।

पीएसजीआईसी में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है और वे सभी फिर से मुनाफे में आ गई हैं। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (ओआईसीएल) और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईसीएल) ने क्रमशः वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही से मुनाफा कमाना शुरू कर दिया, जबकि यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (यूआईआईसीएल) ने 7 साल के अंतराल के बाद वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में मुनाफा कमाया। उल्लेखनीय रूप से, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (एनआईएसीएल) ने लगातार बाजार में अग्रणी के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है और नियमित रूप से मुनाफा कमा रही है।

समीक्षा के दौरान, केंद्रीय वित्त मंत्री ने सेवा वितरण और दक्षता में सुधार के लिए सभी पीएसजीआईसी में डिजिटल बदलाव की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। इसमें एआई-संचालित दावा निपटान प्रणालियों को अपनाना शामिल है, विशेष रूप से मोटर की क्षति और स्वास्थ्य बीमा उत्पादों के लिए, ताकि तेजी से और अधिक सटीक दावा समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

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