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प्रगति बैठक: प्रधानमंत्री ने की अध्यक्षता, 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की

प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं में देरी से निपटने और समय पर पूरा करने पर जोर दिया; दक्षता और जवाबदेही को प्राथमिकता देने का आग्रह किया

प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से सभी पात्र रियल एस्टेट परियोजनाओं का रेरा के तहत अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज केंद्र और राज्य सरकारों को शामिल करते हुए सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए आईसीटी-आधारित मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति बैठक की अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित सड़क परिवहन, बिजली और जल संसाधन के क्षेत्रों में 62,000 करोड़ रुपये से अधिक की कुल लागत वाली तीन प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा की। इन परियोजनाओं के रणनीतिक महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कार्यान्वयन की बाधाओं को दूर करने और उन्हें समय पर पूरा करने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।

परियोजना में देरी के प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री ने दोहराया कि इस तरह की रुकावटों से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि नागरिकों को आवश्यक सेवाओं और बुनियादी ढांचे से भी वंचित होना पड़ता है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से दक्षता और जवाबदेही को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर दिया कि समय पर डिलीवरी सामाजिक-आर्थिक परिणामों को अधिकतम करने के लिए महत्वपूर्ण है।

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रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) से जुड़ी सार्वजनिक शिकायतों की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने घर खरीदने वालों के लिए न्याय और निष्पक्षता सुनिश्चित करने हेतु शिकायत निपटान की गुणवत्ता और समयबद्धता में सुधार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राज्य सरकारों से रेरा अधिनियम के तहत सभी पात्र रियल एस्टेट परियोजनाओं का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि आवास बाजार में विश्वास बहाल करने के लिए रेरा प्रावधानों का सख्त अनुपालन महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के विकास से संबंधित उल्लेखनीय सर्वोत्तम परिपाटियों की जांच की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस तरह की पहल दूसरों के लिए मार्गदर्शक मॉडल के रूप में काम कर सकती है और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापक रूप से अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन को मजबूती मिलेगी।

वर्तमान प्रगति बैठकों तक, लगभग 20.64 लाख करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 373 परियोजनाओं की समीक्षा की गई है।

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