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अबूझमाड़ के सुदूर वनांचल में फूटी विकास की नई ‘जल-धारा’: मुसपरसी गांव बना ‘हर घर जल ग्राम’

*महाराष्ट्र सीमा से सटे अंदरूनी गांव में जल जीवन मिशन ने ख़त्म किया पेयजल का बरसों पुराना संघर्ष*

 

*अब नल खोलते ही घरों में पहुंच रहा स्वच्छ पानी*

 

रायपुर, 12 जून 2026 (IMNB NEWS AGENCY) अबूझमाड़—एक ऐसा क्षेत्र जिसे कभी उसकी भौगोलिक विषमताओं और दुर्गमता के लिए जाना जाता था, आज विकास की एक नई और सुखद इबारत लिख रहा है। नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 123 किलोमीटर दूर, महाराष्ट्र की सीमा से सटा ओरछा विकासखंड का एक छोटा सा वनांचल गांव है—मुसपरसी जो ग्राम पंचायत कोंगे के अंतर्गत आता है। इस गांव की तस्वीर और तकदीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। कभी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने वाला यह गांव आज देश के नक्शे पर ‘हर घर जल ग्राम’ के रूप में अपनी चमक बिखेर रहा है। जल जीवन मिशन (JJM) के सफल क्रियान्वयन ने यहाँ के ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है।

 

*बरसों का दर्द: जब पानी जुटाने में ही बीत जाती थी आधी जिंदगी*

 

मुसपरसी गांव के लिए पेयजल की उपलब्धता हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही। इस सुदूर वनांचल में रहने वाले ग्रामीण सदियों से झरिया, नदी और पारंपरिक प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर थे। सुबह की पहली किरण के साथ ही गाँव की महिलाओं और बच्चों के कंधों पर पानी के बर्तनों का बोझ आ जाता था।

 

पथरीले रास्तों से गुजरकर, लंबी दूरी तय कर पानी लाना उनकी दैनिक दिनचर्या का सबसे कठिन हिस्सा था। इस कड़े संघर्ष का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता था। पानी का इंतजाम करने में ही उनका इतना समय और श्रम खर्च हो जाता था कि वे किसी अन्य रचनात्मक या आर्थिक गतिविधि के बारे में सोच भी नहीं पाती थीं।

 

*जल जीवन मिशन: इंजीनियरिंग और दृढ़ इच्छाशक्ति का संगम*

 

इस दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाना और पानी पहुंचाना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और जल जीवन मिशन के तहत तैयार की गई सटीक कार्ययोजना ने इस असंभव को संभव कर दिखाया।गांव की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जल स्रोतों का सुदृढ़ीकरण किया गया। घने जंगलों और पथरीले रास्तों के बीच से होते हुए गांव के कोने-कोने तक पाइपलाइन का विस्तार किया गया। योजना के तहत गांव के हर एक घर को घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) से जोड़ा गया, जिससे मुसपरसी को ‘हर घर जल ग्राम’ का गौरव प्राप्त हुआ।

 

*महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान, बच्चों को मिला भविष्य*

 

मुसपरसी की महिलाएं पहले सूरज उगने से पहले ही पानी की चिंता सताने लगती थी। पूरा दिन इसी उधेड़बुन में निकल जाता था। लेकिन अब घर के आंगन में ही नल लग गया है। बस टोटी खोलो और साफ पानी हाजिर है। ऐसा लगता है जैसे हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी हमेशा के लिए खत्म हो गई। घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचने से इस आदिवासी अंचल में एक नई सामाजिक और आर्थिक क्रांति की शुरुआत हुई है। पानी लाने में बर्बाद होने वाला समय अब बच रहा है। महिलाएं इस समय का उपयोग अपने घरेलू कार्यों, बच्चों की परवरिश और स्व-सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं। पानी भरने के काम से मुक्ति मिलने के बाद अब गांव के बच्चे नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं। उनका बचपन अब सुरक्षित है और उन्हें पढ़ाई व खेलकूद के पूरे अवसर मिल रहे हैं। फ्लोराइड और अन्य अशुद्धियों से मुक्त, शुद्ध पेयजल मिलने से गांव में जलजनित बीमारियों जैसे डायरिया, पेट की बीमारियां में भारी कमी आई है। इसके साथ ही ग्रामीणों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है।

 

*विकास की एक नई मिसाल*

 

मुसपरसी गांव की यह सफलता कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सही नीति और निष्ठा के साथ काम किया जाए, तो देश के सबसे सुदूर और चुनौतीपूर्ण अंचलों तक भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। ‘हर घर जल’ का यह तमगा सिर्फ पानी की उपलब्धता का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अबूझमाड़ के आदिवासियों के जीवन स्तर में आए सुधार, उनके सम्मान और एक सुरक्षित भविष्य की नई शुरुआत है।

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