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7 साल बाद भारत में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, सीमा विवाद से व्यापार तक चर्चा, इसलिए खास है शी का दौरा

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचने वाले हैं. इस दौरान दुनिया की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात पर रहेगी है. दोनों नेताओं की यह लगातार तीसरे साल आमने-सामने होने वाली बैठक है. इस मुलाकात से पहले चीन ने भारत के साथ संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. चीनी राजदूत शू फेइहॉन्ग ने कहा है कि बीजिंग दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग बढ़ाने के साथ मतभेदों को सही तरीके से सुलझाने के लिए भारत के साथ काम करना चाहता है.

इसलिए खास है सात साल बाद शी जिनपिंग का भारत दौरा

  • शी जिनपिंग का भारत दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि 2019 के मामल्लपुरम शिखर सम्मेलन के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है. 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा.
  • हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश तेज हुई है. अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी की मुलाकात हुई थी. इसके बाद 2025 में तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की बातचीत हुई.
  • अब नई दिल्ली में होने वाली बैठक को इसी कूटनीतिक प्रक्रिया की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.
  • PM मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से पहले चीन ने क्या कहा?

    • भारत में चीन के राजदूत शू फेइहॉन्ग ने सोशल मीडिया पर कहा कि दोनों देश राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक की तैयारी कर रहे हैं.
    • उन्होंने कहा कि चीन दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने, द्विपक्षीय संबंधों को लंबे समय के नजरिए से देखने, बातचीत और सहयोग बढ़ाने तथा मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने के लिए भारत के साथ काम करेगा.
      • चीन की ओर से आया यह संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के रिश्तों में सबसे बड़ी चुनौती अभी भी भरोसे की बहाली है.

      मोदी-शी की बैठक में किन मुद्दों पर बातचीत हुई ?

      • रिपोर्ट की मानें तो दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा और वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC का मुद्दा सबसे अहम रह सकता है. गलवान के बाद सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई दौर की सैन्य और राजनयिक बातचीत हुई है. इसके बावजूद दोनों देशों के बीच पूरी तरह पुराना भरोसा कायम होना बाकी है.
      • इसके साथ व्यापार भी बातचीत का बड़ा हिस्सा हो सकता है चीन भारत का बड़ा कारोबारी साझेदार है, लेकिन भारत लंबे समय से चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को लेकर चिंता जताता रहा है.
      • यानी बैठक में सुरक्षा के साथ-साथ कारोबार, निवेश और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्तों पर भी चर्चा की उम्मीद है.

      भारत-चीन की नजदीकी क्यों मायने रखती है?

      • भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक खींचतान और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं.
      • भारत ब्रिक्स के जरिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को प्रमुखता देने पर जोर दे रहा है. चीन भी ब्रिक्स सहयोग को महत्वपूर्ण मानता है और उसने भारत की अध्यक्षता में होने वाले सम्मेलन के लिए समर्थन जताया है.
      • ऐसे में मोदी और शी की बैठक का असर सिर्फ भारत-चीन संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा. दोनों नेताओं के बीच बातचीत से एशिया और ग्लोबल साउथ की राजनीति को लेकर भी एक बड़ा संदेश जा सकता है.

      ब्रिक्स के मंच से भारत का बड़ा दांव

      • भारत इस बार   सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है. 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में वैश्विक शासन में सुधार, व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. 11 सदस्यीय ब्रिक्स अब दुनिया की करीब आधी आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लगभग 40 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.
      • ऐसे में मोदी-शी मुलाकात सिर्फ भारत-चीन संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी. यह बैठक इस बात का भी संकेत दे सकती है कि एशिया की दो बड़ी ताकतें बदलती वैश्विक राजनीति में अपने रिश्तों को किस दिशा में ले जाना चाहती हैं.
      • मोदी-शी बैठक से पहले चीन के सुर निश्चित तौर पर सकारात्मक नजर आ रहे हैं. लेकिन असली तस्वीर बैठक के बाद सामने आएगी. सवाल यही है कि क्या दोनों नेता सिर्फ रिश्तों में गर्मजोशी बढ़ाने पर बात करेंगे या सीमा और व्यापार जैसे मुश्किल मुद्दों पर भी आगे बढ़ने का कोई रास्ता निकलेगा?
      • अगर बातचीत में ठोस प्रगति होती है, तो यह भारत-चीन संबंधों को स्थिर करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है. फिलहाल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में होने वाली इस मुलाकात पर भारत ही नहीं, पूरी दुनिया की नजर है.
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