Ro no D15139/23

कांकेर ऐतिहासिक पुरानी कचहरी बनी शिक्षा और संस्कृति का नया केंद्र

 

प्रतिदिन 1000 विद्यार्थी कर रहे अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बना प्रमुख केंद्र

*सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-मावा मोदोल से 89 युवाओं ने पाई शासकीय सेवाओं में सफलता*

*कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय और गोंडी-हल्बी भाषा शिक्षण से सहेजी जा रही सांस्कृतिक विरासत*

रायपुर. 26 जून 2026. जिला मुख्यालय कांकेर स्थित ऐतिहासिक पुराना कचहरी परिसर में शिक्षा, संस्कृति और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त केंद्र बनकर उभर रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-मावा मोदोल विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राएं न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, बल्कि अपने सपनों को साकार करने की दिशा में भी मजबूती से कदम बढ़ा रहे हैं।

जिला प्रशासन की महत्वाकांक्षी पहल ‘हमर लक्ष्य’ के अंतर्गत विकसित यह केंद्र आज शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन, भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। यह पहल युवाओं के सपनों को नई दिशा देने के साथ-साथ जिले की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-मावा मोदोल के नोडल अधिकारी एवं जिला मिशन समन्वयक श्री नवनीत पटेल ने बताया कि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग एक हजार विद्यार्थी इस अध्ययन केंद्र का लाभ ले रहे हैं। यहां विद्यार्थियों के लिए शांत एवं सुव्यवस्थित अध्ययन वातावरण उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही उप निरीक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए मैराथन क्लासेस आयोजित की जा रही हैं, जिनका लाभ बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उठा रहे हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी श्री रमेश कुमार निषाद के मार्गदर्शन में इस अध्ययन केंद्र को और अधिक विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यहां उपलब्ध सुविधाओं और विशेषज्ञ मार्गदर्शन का सकारात्मक परिणाम है कि अब तक इस केंद्र से अध्ययन कर चुके 89 युवाओं ने विभिन्न शासकीय पदों पर सफलता प्राप्त की है। यह उपलब्धि इस केंद्र की उपयोगिता और प्रभावशीलता को प्रमाणित करती है।

पुराना कचहरी परिसर केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। परिसर में स्थापित कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय स्थानीय जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, जीवन-शैली और इतिहास को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। इसके साथ ही यहां गोंडी एवं हल्बी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 80 विद्यार्थी इन भाषाओं के अध्ययन से जुड़े हुए हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रह सकें। परिसर का ऐतिहासिक प्रवेश द्वार, उद्यान, हरियाली और स्वच्छ वातावरण इसे और आकर्षक बनाते हैं। यहां आने वाले विद्यार्थी, अभिभावक एवं पर्यटक इस परिसर की सुंदरता और व्यवस्थाओं की सराहना करते हैं।

  • Related Posts

    झीरम पर भूपेश का दोहरा चरित्र, पांच साल सत्ता में रहे तो ‘सबूत’ क्यों दबाए बैठे रहे? : शिव नारायण पाण्डेय

      *झीरम की पीड़ा पर राजनीति बंद करें भूपेश, प्रदेश को बताएं पांच साल में क्या किया* *फैसले से पहले न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करना बघेल की हताशा का…

    Read more

    दलपत सागर के कायाकल्प की तैयारी

    एनएमडीसी नगरनार और नगर निगम के बीच हुआ एमओयू 50 लाख रुपए की सीएसआर राशि से हटेगी जलकुंभी जगदलपुर, 31 अगस्त 2026/ बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर दलपत सागर को स्वच्छ, सुंदर…

    Read more

    NATIONAL

    केंद्र से 11000 करोड़ रुपये CM सम्राट ने मांगे, कोसी हाई डैम से कोसी-मेची लिंक तक कई प्रोजेक्ट्स होंगे पूरे

    केंद्र से 11000 करोड़ रुपये CM सम्राट ने मांगे, कोसी हाई डैम से कोसी-मेची लिंक तक कई प्रोजेक्ट्स होंगे पूरे

    7.8% GDP को PM मोदी ने बताया बड़ी उपलब्धि, कहा- ‘जरूरत न हो तो सोना नहीं खरीदे’

    7.8% GDP को PM मोदी ने बताया बड़ी उपलब्धि, कहा- ‘जरूरत न हो तो सोना नहीं खरीदे’

    सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 भारतीयों का भी नहीं मिला सुराग

    सुरंग में जिंदगी की तलाश, 500 से ज्यादा मजदूर लापता, 275 भारतीयों का भी नहीं मिला सुराग

    नेपाल में दो जिलों को जोड़ने वाला पुल नदी की तेज धार में बहा, उफान पर त्रिशूली नदी

    नेपाल में दो जिलों को जोड़ने वाला पुल नदी की तेज धार में बहा, उफान पर त्रिशूली नदी

    Video news आरक्षण पर तेजसवी का एनडीए पर बड़ा हमला… गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज! : तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष बिहार

    Video news आरक्षण पर तेजसवी का एनडीए पर बड़ा हमला…  गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज! : तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष बिहार

    लद्दाख से थार तक चीन-पाक की खैर नहीं, इंडियन आर्मी को मिलने जा रहा है सटीक हथियार

    लद्दाख से थार तक चीन-पाक की खैर नहीं, इंडियन आर्मी को मिलने जा रहा है सटीक हथियार