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प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा केन्द्रीय जेल दुर्ग का किया गया निरीक्षण – बंदियों के अधिकारों, मूलभूत सुविधाओं एवं सुधारात्मक व्यवस्थाओं की हुई व्यापक समीक्षा

दुर्ग, 27 जून 2026/ मुख्यालय स्थित केन्द्रीय जेल दुर्ग का आज प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश  के. विनोद कुजूर द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में उन्होंने महिला प्रकोष्ठ में निरूद्ध महिला बंदियों से उनकी प्रकरण की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता, साफ सफाई एवं स्वच्छता व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली गई। तत्पश्चात उन्होंने जेल में सजायाफ्ता बंदियों के अपील संबंधी प्रकरणों को अद्यतन करने एवं बंदियों को प्रकरण की वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के निर्देश जेल अधिकारियों को दिये। उन्होंने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना और उनकी दैनिक दिनचर्या से संबंधित जानकारी प्राप्त की। नव आगंतुक बंदियों को उनके प्रकरण से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के विषय में बताया गया तथा जो बंदी निजी अधिवक्ता नियुक्त नहीं कर सकते हैं, उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क विधिक सहायता सलाह प्रदान कर उनकी पैरवी हेतु निःशुल्क अधिवक्ता की नियुक्ति किए जाने की जानकारी दी गई। जेल प्रशासन को ऐसे बंदी जिन्हें परिहार का लाभ दिया जा सकता है, उनके आवेदन के लंबित रहने के कारणों सहित जानकारी प्राधिकरण को प्रेषित किए जाने हेतु निर्देशित किया गया।
उन्होंने मुख्य रूप से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की SPRUHA (Supporting Potential and Resilience of the Unseen, Held-back and Affected) Scheme, 2025 के अंतर्गत जेल में निरुद्ध कैदियों से संवाद स्थापित कर उनके आश्रित परिवारजनों को होने वाली सामाजिक, आर्थिक एवं व्यवहारिक कठिनाइयों के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी प्राप्त की गई।
प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा कैदियों से यह जाना गया कि उनके कारावास की अवधि के दौरान उनके आश्रित जैसे पत्नी, बच्चे एवं वृद्ध माता-पिता को आजीविका, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, भरण-पोषण एवं दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति में किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
इस अवसर पर उनके द्वारा यह निर्देशित किया गया कि SPRUHA योजना के अंतर्गत ऐसे पात्र कैदियों एवं उनके आश्रित परिवारजनों की पहचान कर उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाए तथा उन्हें केंद्र एवं राज्य शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा यह भी निर्देश दिए गए कि पैरालीगल वालेंटियर्स के माध्यम से आश्रित परिवारों का फील्ड स्तर पर सत्यापन कर उनकी समस्याओं के निराकरण हेतु संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि कैदियों के परिवारजनों को सामाजिक सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान किया जा सके।
उन्होंने निरीक्षण के उपरांत संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा शंकर महतो प्रकरण में प्रतिपादित सिद्धांतों एवं दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से जेलों में मानवीय गरिमा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, विधिक सहायता तथा पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए आवश्यक सुधारात्मक उपाय सतत रूप से किए जाएं।
निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, जेल अधीक्षक, महिला प्रकोष्ठ प्रभारी, LADCS के कौंसिल व अन्य कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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