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जनजातीय समुदाय के अधिकारों की रक्षा के लिए आयोग प्रतिबद्ध : डॉ. आशा लकड़ा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा की अध्यक्षता में जनजातीय समुदाय के प्रमुखों के साथ हुई बैठक

 डॉ. लकड़ा ने कहा सभी वैध मामलों का नियमानुसार निराकरण किया जाएगा सुनिश्चित

जशपुरनगर 02 जुलाई 2026 / राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों एवं समाज प्रमुखों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में डॉ. लकड़ा ने जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याएं, सुझाव और शिकायतें विस्तार से सुनीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी वैध मामलों का नियमानुसार निराकरण कराया जाएगा।बैठक में विधायक श्रीमती गोमती साय एवं श्रीमती रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय और छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती मौजूद रहे। बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का प्रमुख उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों को न्याय दिलाना, उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना तथा उनके हितों का संरक्षण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से आयोग छत्तीसगढ़ प्रवास पर है, जिसके तहत जनजातीय क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक पहल की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आयोग केवल शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन के साथ बैठक कर जनजातीय क्षेत्रों में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा भी करता है। जिन समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर संभव नहीं हो पाता, उन्हें संबंधित विभागों तक पहुंचाकर न्याय दिलाने का प्रयास किया जाता है। डॉ. लकड़ा ने अपने संबोधन में आदिवासी जननायकों के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का उल्लेख करते किया। विशेष रूप से हूल क्रांति के अमर सेनानियों सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव के संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक विद्रोह के बाद अंग्रेजी शासन को झुकना पड़ा और संथाल परगना टेनेंसी एक्ट (एसपीटी एक्ट) लागू करना पड़ा, जिसने जनजातीय भूमि की सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ. लकड़ा ने कहा कि यदि किसी गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, विद्यालय, शिक्षक, आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है अथवा किसी व्यक्ति के साथ अन्याय, शोषण, जातिसूचक टिप्पणी या अनुसूचित जनजाति अत्याचार से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो आयोग ऐसे सभी मामलों की सुनवाई कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि जनजातीय अधिकारों, विकास योजनाओं और सेवा संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए आयोग पूरी गंभीरता से कार्य करता है।
डॉ. लकड़ा ने बताया कि देश में लगभग 12 करोड़ अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं तथा 725 से अधिक जनजातीय समुदाय हैं। इनके अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के लिए वर्ष 2004 में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि यह आयोग संविधान के अनुच्छेद 338 (क) के तहत गठित एक संवैधानिक निकाय है, जिसे अनुसूचित जनजातियों को प्राप्त संवैधानिक एवं कानूनी संरक्षणों के क्रियान्वयन की निगरानी तथा उनसे संबंधित शिकायतों की जांच का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि आयोग अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करता है तथा सरकार को आवश्यक सुझाव भी देता है। प्रधानमंत्री आवास योजना, हर घर नल से जल योजना, धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष ग्राम अभियान, जनमन योजना तथा विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन

(VB-G RAM G) जैसी योजनाओं का लाभ जनजातीय क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचे, इसके लिए आयोग लगातार कार्य कर रहा है। डॉ. लकड़ा ने कहा कि संविधान के तहत किसी मामले की जांच के दौरान आयोग को दीवानी न्यायालय जैसी शक्तियां प्राप्त हैं।
उन्होंने बताया कि आयोग किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को समन जारी कर उपस्थित होने के निर्देश दे सकता है, सार्वजनिक दस्तावेज तलब कर सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को भी आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए निर्देशित कर सकता है। उन्होंने बताया कि आयोग की अनुशंसाएं संबंधित विभागों की कार्रवाई रिपोर्ट के साथ संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत की जाती हैं। इसलिए जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक शिकायत एवं सुझाव का विधिवत दस्तावेजीकरण कर उस पर गंभीरतापूर्वक कार्रवाई की जाती है।
 ऑनलाइन  ncstgrams.gov.in के माध्यम भी दर्ज करा सकते हैं शिकायत
डॉ. आशा  लकड़ा ने जनजातीय समुदाय से अपनी समस्याएं एवं शिकायतें लिखित रूप में प्रस्तुत करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि आयोग की वेबसाइट  ncstgrams.gov.in   के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज होने के बाद आवेदक को डायरी नंबर जारी किया जाता है, जिसके आधार पर आयोग प्रकरण की सुनवाई करता है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन आवेदन करते समय पूरा पता, मोबाइल नंबर और पिन कोड सही एवं पूर्ण रूप से दर्ज करना आवश्यक है। बैठक में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के कंसल्टेंट श्री एच.आर. मीणा एवं श्री जे.पी. सिंह, सीनियर इन्वेस्टिगेटर सोनल राज, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्री संजय सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
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