
SIR के विरोध में देशभर में सियासत गर्म है. चुनाव आयोग के खिलाफ अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इसके चार दिन बाद, 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसद भी सड़क पर उतर आए और संसद से चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला, लेकिन बीच में ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया. 9 घंटे के विरोध-प्रदर्शन और धरना के बाद राहुल गांधी समेत 250 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया गया.
सवाल है कि अगर मुद्दा एक है, तो फिर CJP और इंडिया गठबंधन के आंदोलन में फर्क क्या है? दोनों की मांगें कितनी मिलती-जुलती हैं और दोनों का तरीका कितना अलग है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं.
CJP और INDIA गठबंधन क्यों आंदोलन कर रहे हैं
- चुनाव आयोग मतदाता सूची की जांच और अपडेट करने के लिए SIR करवा रही है.
- आयोग का कहना है कि इसका मकसद मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि मृत हो चुके, हमेशा के लिए दूसरी जगह जा चुके, डुप्लीकेट या सत्यापन के दौरान नहीं मिलने वाले लोगों की पहचान की जा सके और मतदाता सूची में वही लोग शामिल रहें जो योग्य नागरिक हैं.
- इसको लेकर विपक्षी दलों और कुछ दूसरे संगठनों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाने का खतरा है और इस प्रक्रिया में उतनी पारदर्शिता नहीं है जितनी होनी चाहिए. इसको लेकर विवाद हो रहा है.
2 अक्टूबर को CJP ने क्या किया?
- कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन हुआ. CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की.
- हालांकि इस आंदोलन को लेकर पहले मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया, इसके बाद CJP ने जेल भरो आंदोलन की घोषणा की. CJP के इस प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और विशाल ददलानी समेत दूसरे हस्तियां भी आंदोलन में शिरकत की.
- हालांकि मुंबई पुलिस ने आंदोलन की अनुमति नहीं दी. मामले में अभिजीत दीपके सहित करीब 500 लोगों पर FIR भी दर्ज हुई. पुलिस ने आरोप लगाया कि बिना अनुमति आंदोलन, यातायात में बाधा और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल जैसे नियमों का उल्लंघन हुआ है इसलिए यह कार्रवाई की गई.
- सीजेपी ने कहा कि एसआईआर और चुनाव आयोग से जुड़े फैसलों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, CEC को इसका जवाब देना चाहिए.
सड़क पर क्यों उतरा INDIA गठबंधन?
- 6 अक्टूबर का आंदोलन सीधे तौर पर विपक्षी दलों की राजनीतिक लामबंदी था. इंडिया गठबंधन के सांसद संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन की ओर मार्च करने निकले.
- हालांकि इंडिया गठबंधन के इस मार्च को पुलिस ने संसद मार्ग के पास रोक दिया. जिसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने बैठ गए. इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी।
- हालांकि मंगलवार के आंदोलन में पूरा विपक्ष एक साथ नहीं था. आम आदमी पार्टी ने 6 अक्टूबर के इंडिया गठबंधन के मार्च में शामिल नहीं होने का फैसला किया और कहा कि वह अपना अलग अभियान चलाएगी. आम आदमी पार्टी ने 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर प्रदर्शन किया था.
दोनों आंदोलनों में समानता और अंतर
- 2 अक्टूबर को सीजेपी और 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसदों के प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा एक ही था, SIR और चुनाव आयोग की जवाबदेही.
- दोनों ही आंदोलन में SIR के जरिए मतदाता सूची में हो रहे बदलावों पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की. लेकिन दोनों आंदोलनों में बड़ा अंतर संगठन और राजनीतिक स्वरूप का है.
- सीजेपी का आंदोलन अभिजीत दीपके के नेतृत्व में चल रहा स्वतंत्र राजनीतिक अभियान है. उनका जोर युवाओं की लामबंदी पर है. इसके विपरीत, 6 अक्टूबर का इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन स्थापित विपक्षी दलों और उनके सांसदों का राजनीतिक आंदोलन था.
- यानी मुद्दा काफी हद तक समान है, लेकिन आंदोलन का मंच और तरीका अलग है. सीजेपी इसे युवा आंदोलन के रूप में आगे बढ़ा रही है, जबकि इंडिया गठबंधन ने इसे विपक्षी दलों की सामूहिक राजनीतिक कार्रवाई के तौर पर उठाया है.






