
स्व-सहायता समूहों की दीदियों की अनूठी पहल, बीज राखियों से रक्षाबंधन पर गूंजेगा हरियाली का संदेश*
*’भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार’ थीम पर एनआरएलएम बिहान का अभिनव अभियान*
रायपुर, 19 जुलाई 2026/ रायगढ़ जिले में इस बार रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) बिहान के सहयोग से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं धान, मक्का, सेमी, करेला, बरबटी सहित विभिन्न देसी बीजों से आकर्षक बीज राखियां तैयार कर रही हैं।
‘भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार’ थीम पर चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ना है। इन राखियों की विशेषता यह है कि उपयोग के बाद यदि इन्हें मिट्टी में डाल दिया जाए, तो इनमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले सकते हैं। इस तरह एक राखी भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक होने के साथ-साथ हरियाली बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है।
बीज राखी अभियान के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अपनी रचनात्मकता और नवाचार का परिचय देने के साथ समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश भी दे रही हैं।
धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार की कृष्णा स्व-सहायता समूह की सदस्य कविता राठिया ने धान, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी के बीजों से आकर्षक राखियां तैयार की हैं। जय ठाकुर देव ग्राम संगठन एवं रोशनी महिला संकुल संगठन, दुर्गापुर से जुड़ी कविता राठिया की यह पहल अन्य समूहों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।
रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में बीज राखी निर्माण का कार्य उत्साहपूर्वक चल रहा है। रायगढ़ विकासखंड के बैसपाली (नंदेली सीएलएफ), जुनवानी ग्राम संगठन, लोइंग क्लस्टर, गोपालपुर एवं संबलपुरी सीएलएफ, धरमजयगढ़ में कृषि सखियां, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव का जननी स्व-सहायता समूह, घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा का गायत्री स्व-सहायता समूह तथा पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिलेभर की महिलाएं पर्यावरण अनुकूल बीज राखियां तैयार कर रही हैं। गांव-गांव में आयोजित समूह बैठकों में भी इस अभियान को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
*सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी*
अभियान के तहत 20 जुलाई को जिले के सभी सातों विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन के दौरान आकर्षक डिजाइन, नवाचार, देसी बीजों का उपयोग, पर्यावरण संरक्षण का संदेश और रचनात्मकता जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।
*विजेता दीदियां अधिकारियों को बांधेंगी बीज राखी, होगा सम्मान*
20 जुलाई को चयनित सातों विजेता दीदियों को 27 जुलाई को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर वे कलेक्टर सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने हाथों से बीज राखी बांधेंगी। पर्यावरण संरक्षण और नवाचार की दिशा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा।
यह पहल केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास है। एनआरएलएम बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं यह संदेश दे रही हैं कि यदि पारंपरिक त्योहारों को प्रकृति से जोड़ा जाए, तो सामाजिक सरोकारों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी नई गति मिल सकती है।









