Ro no D15139/23

2007 वाला करिश्मा दोहराएंगी मायावती? यूपी में अखिलेश-योगी के बीच BSP का ‘कमबैक प्लान’ तैयार!

UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन इसकी तैयारी का असर अभी से दिखने लगा है. कभी यूपी की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ राज करने वाली बहुजन समाज पार्टी अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मायावती 2027 में फिर मजबूत वापसी कर पाएंगी और अखिलेश यादव व योगी आदित्यनाथ के बीच अपनी सियासी जगह बना पाएंगी?

BSP के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

बीएसपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना पुराना वोट बैंक वापस जोड़ने की है. इसी बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर भी चर्चा तेज है. सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती 2027 से पहले किसी पेशेवर चुनावी रणनीतिकार की मदद लेंगी? हालांकि, अब तक प्रशांत किशोर और मायावती या बीएसपी के किसी शीर्ष नेता के बीच औपचारिक बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है.

2007 में सत्ता के शिखर पर पहुंची थी BSP

बीएसपी के सियासी सफर पर नजर डालें तो पार्टी की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. 2007 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ एक सीट पर सिमट गई. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी का खाता तक नहीं खुल सका. यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सियासी जमीन को फिर से मजबूत करने की है.

प्रशांत किशोर का नाम क्यों आया चर्चा में?

महाराष्ट्र में हाल ही में चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार से मुंबई में लंबी मुलाकात की. इस दौरान महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति और मराठा, दलित व मुस्लिम समीकरण को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई.

क्या मायावती भी PK की मदद लेंगी?

इसी घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती भी यूपी चुनाव से पहले प्रशांत किशोर की मदद ले सकती हैं. हालांकि, बीएसपी की अब तक की राजनीति को देखें तो मायावती बाहरी चुनावी रणनीतिकारों के बजाय अपने पारंपरिक कैडर, भाईचारा कमेटियों और राज्य स्तरीय समन्वयकों के नेटवर्क पर भरोसा करती रही हैं.

अखिलेश यादव भी कर चुके हैं I-PAC के साथ काम

वहीं, अखिलेश यादव प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC के मार्गदर्शन में काम कर चुके हैं. ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले बीएसपी और प्रशांत किशोर के संभावित समीकरण को लेकर सियासी चर्चा होना स्वाभाविक है, हालांकि इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है.

दलित वोट बैंक BSP की सबसे बड़ी ताकत रहा

बीएसपी का सबसे मजबूत आधार लंबे समय से दलित वोट रहा है, खासकर जाटव समाज. पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग में दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम समीकरण भी अहम रहा है. लेकिन पिछले एक दशक में गैर-जाटव दलित समुदायों में बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत की है. पासी, धोबी, वाल्मीकि और कोरी जैसी जातियों के बीच बीजेपी की पैठ बढ़ी है.

मुस्लिम वोटों के खिसकने से भी लगा झटका

दूसरी तरफ, 2019 के गठबंधन और फिर 2022 व 2024 के चुनावों में बीएसपी की कमजोर स्थिति के बीच मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी को हराने के लिए बड़े पैमाने पर सपा और कांग्रेस का रुख किया. इसका सीधा असर बीएसपी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा.

जानकारों के मुताबिक सड़क पर उतरना जरूरी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद बीएसपी और उसके नेताओं की जमीनी सक्रियता कम हुई. आंदोलन और सड़क पर संघर्ष से दूरी को भी पार्टी के कमजोर होते जनाधार की एक बड़ी वजह माना जा रहा है.

सिर्फ सोशल मीडिया से नहीं बनेगी बात

जानकारों के मुताबिक अगर बीएसपी 2027 में वापसी करना चाहती है तो उसे केवल प्रेस नोट और सोशल मीडिया तक सीमित रहने के बजाय दलित, पिछड़े और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जमीन पर उतरना होगा.

पेपर लीक से महंगाई तक मुद्दों पर आंदोलन की जरूरत

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पेपर लीक, महंगाई और कस्टडी डेथ जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन खड़ा करना और गैर-जाटव दलितों व अति-पिछड़ों को संगठन में अहम जिम्मेदारी देना पार्टी के लिए जरूरी हो सकता है.

‘संविधान बचाओ’ नैरेटिव से BSP को नुकसान

2024 में सपा और कांग्रेस ने ‘संविधान बचाओ’ के नैरेटिव के जरिए दलित वोटों में सेंध लगाई थी. ऐसे में बीएसपी के सामने अपने पारंपरिक मतदाताओं को फिर से अपने साथ जोड़ने की चुनौती है.

मायावती अब भी दलित राजनीति का बड़ा चेहरा

यूपी में मायावती आज भी दलित समाज की सबसे बड़ी और सर्वमान्य राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं. हालांकि, उनकी आक्रामक राजनीति में आई कमी से पार्टी कैडर में निराशा की बात कही जाती है. वहीं, चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा आक्रामक अंदाज में राजनीति करते नजर आए हैं.

आकाश आनंद से BSP को नई उम्मीद

दूसरी ओर, मायावती के भतीजे आकाश आनंद को बीएसपी का भविष्य माना जा रहा है. फिलहाल वह पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर हैं. अपनी जनसभाओं में आकाश आनंद आक्रामक भाषण शैली के साथ युवाओं, खासकर Gen-Z से संवाद बनाने की कोशिश करते दिखाई दिए हैं.

रोजगार और शिक्षा पर युवाओं से कनेक्ट करने की कोशिश

आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद में रोजगार, शिक्षा और स्वाभिमान जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा. वहीं, पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में अब भी मायावती का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव बीएसपी के लिए महज सत्ता में वापसी की कोशिश नहीं, बल्कि अपने पुराने राजनीतिक आधार को दोबारा मजबूत करने और उसे बचाए रखने की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है.

पदयात्राओं से कैडर में आ सकती है नई ऊर्जा

अगर मायावती आकाश आनंद को संगठन और चुनावी फैसलों में ज्यादा स्वतंत्रता देती हैं और वह चुनाव से पहले पूरे उत्तर प्रदेश में आक्रामक पदयात्राएं करते हैं, तो पार्टी के कमजोर पड़े जनाधार में नई ऊर्जा आ सकती है.

  • Related Posts

    यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; भारत भी बना रहा ऐसी तकनीक

    यूक्रेन ने दावा किया है कि रूस के खिलाफ जारी जंग में रोबोट सैनिकों की मदद से 15,700 से ज्यादा मिशन पूरे किए और 3000 सैनिक मारे गए. इसके साथ-साथ…

    Read more

    बिहार भाजपा कोर कमिटी की बैठक प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े रहे मौजूद

      आगामी कार्ययोजना पर हुआ मंथन ‎ ‎सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के संकल्प को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का हो रहा…

    Read more

    NATIONAL

    यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; भारत भी बना रहा ऐसी तकनीक

    यूक्रेन का दावा, रूस से जंग में रोबोट सैनिकों ने 3000 रूसी सैनिक मार गिराए; भारत भी बना रहा ऐसी तकनीक

    बिहार भाजपा कोर कमिटी की बैठक प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े रहे मौजूद

    बिहार भाजपा कोर कमिटी की बैठक  प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े रहे मौजूद

    चुनाव विभाग कार्यालय विवाद पर जयराम का हमला बोले, आरोपियों पर हो सख्त कार्रवाई, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की मांग नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की कमी का मुद्दा उठाया, खिलाड़ियों को घोषित पुरस्कार राशि देने को कहा

    चुनाव विभाग कार्यालय विवाद पर जयराम का हमला  बोले, आरोपियों पर हो सख्त कार्रवाई, संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने की मांग  नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट की कमी का मुद्दा उठाया, खिलाड़ियों को घोषित पुरस्कार राशि देने को कहा

    शिमला प्रदर्शन पर बिंदल का सरकार पर हमला हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल बोले, कानून सबके लिए समान हो कांग्रेस प्रदर्शन में सरकारी संपत्ति नुकसान का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

    शिमला प्रदर्शन पर बिंदल का सरकार पर हमला  हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल बोले, कानून सबके लिए समान हो  कांग्रेस प्रदर्शन में सरकारी संपत्ति नुकसान का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

    केएनएच में नहीं बनेंगे विधायकों के आवास, हाईकोर्ट में सरकार ने दिया बयान खाली होने वाले परिसर का इस्तेमाल अस्पताल सेवाओं के विस्तार के लिए ही होगा

    केएनएच में नहीं बनेंगे विधायकों के आवास, हाईकोर्ट में सरकार ने दिया बयान  खाली होने वाले परिसर का इस्तेमाल अस्पताल सेवाओं के विस्तार के लिए ही होगा

    हिमाचल के कर्मचारियों को दिवाली से पहले डीए सीएम सुक्खू ने डीए भुगतान का किया एलान

    हिमाचल के कर्मचारियों को दिवाली से पहले डीए  सीएम सुक्खू ने डीए भुगतान का किया एलान