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10 साल के कमलेश को मिला कृत्रिम पैर, अब मंजिल की ओर बढ़ेंगे कदम

 

चिरायु कार्यक्रम की पहल से बदलेगी जिंदगी की राह, अब स्कूल जाने और आगे बढ़ने का बढ़ेगा आत्मविश्वास

रायपुर 03 सितम्बर 2026। उम्र महज 10 साल, मन में बड़े सपने और आगे बढ़ने का जज्बा… लेकिन जीवन की राह में एक कमी हर कदम पर उसका साथ रोकती थी। बीजापुर जिले के ग्राम पीडिया निवासी 10 वर्षीय कमलेश ओयम, पिता श्री सुक्कू, के लिए अब यह कहानी बदलने वाली है। चिरायु कार्यक्रम के माध्यम से कमलेश को दाएं पैर का कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया गया है। जिला अस्पताल, दंतेवाड़ा में कृत्रिम पैर का सफल प्रत्यारोपण होने के बाद कमलेश के जीवन में नई उम्मीद जगी है।

कमलेश वर्तमान में सक्षम आवासीय विद्यालय, आवरगा, जिला दंतेवाड़ा में अध्ययनरत है। पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों में आगे बढ़ने की इच्छा रखने वाले कमलेश के लिए चलना-फिरना हमेशा आसान नहीं रहा। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उसकी आवश्यकता की पहचान की गई। इसके बाद चिरायु कार्यक्रम के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसे कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने की पहल की गई।

कृत्रिम पैर मिलने के बाद कमलेश के लिए रोजमर्रा की गतिविधियों के साथ-साथ विद्यालयीन जीवन में भी आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे। अब उसके लिए स्कूल परिसर में आना-जाना, दैनिक गतिविधियों में भाग लेना और अपने साथियों के साथ अधिक आत्मविश्वास से समय बिताना आसान हो सकेगा।

कमलेश के लिए यह केवल एक कृत्रिम अंग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता एक नया कदम है। परिवार के लिए भी यह राहत और खुशी का क्षण है कि उनके बच्चे को उसकी जरूरत के अनुरूप स्वास्थ्य सुविधा मिली और वह अपनी पढ़ाई तथा भविष्य के सपनों को और मजबूती के साथ आगे बढ़ा सकेगा।

चिरायु कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक उपचार एवं सेवाओं से जोड़ा जाता है। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिन्हित किए जाने के बाद कमलेश को कृत्रिम अंग की आवश्यकता के अनुरूप उपचार एवं सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी ऐसी समस्याएं, जो उनके सामान्य जीवन, पढ़ाई या विकास में बाधा बन सकती हैं, समय रहते चिन्हित हों और उन्हें आवश्यक उपचार एवं सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। कमलेश को कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया जाना इसी प्रयास की एक मिसाल है।

कमलेश की जिंदगी में आया यह बदलाव उसके लिए केवल चलने की सुविधा नहीं है। यह उसके भीतर यह विश्वास पैदा करने वाला कदम है कि मुश्किलें रास्ता रोक सकती हैं, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला नहीं। कृत्रिम पैर के सहारे अब कमलेश अपने स्कूल, पढ़ाई और भविष्य के सपनों की ओर पहले से अधिक आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ा सकेगा। चिरायु कार्यक्रम की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि समय पर की गई स्वास्थ्य जांच और जरूरतमंद बच्चे तक उचित सुविधा पहुंचाकर उसके जीवन को बेहतर दिशा दी जा सकती है।

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