Ro no D15139/23

मां पार्वती ने हल्दी से कैसे बनाए गणेश जी? जानें जन्म की पूरी कहानी

Ganesh Chaturthi Special: 2026 का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा. इसी खास मौके पर प्रभात खबर की धर्म बीट में शुरू हो रही ‘गणेश चतुर्थी स्पेशल’ सीरीज में हम भगवान गणेश से जुड़ी ऐसी कथाएं आपको बताने जा रहे हैं, जिनमें आस्था के साथ-साथ जीवन के गहरे संदेश भी छिपे होंगे. सीरीज की पहली कड़ी में जानिए भगवान गणेश के जन्म से लेकर उनके गजानन बनने और प्रथम पूज्य कहलाने की रोचक कथा.

मां पार्वती ने कैसे बनाया गणेश जी को?

भगवान गणेश के जन्म की कथा अलग-अलग पुराणों और परंपराओं में कुछ अंतर के साथ मिलती है. शिव पुराण के रुद्र संहिता के कुमार खंड में बताया गया है कि एक बार मां पार्वती स्नान करने जा रही थीं. वह चाहती थीं कि उस दौरान कोई उनके पास न आए. इसलिए उन्होंने एक ऐसे बालक की रचना की, जो उनकी आज्ञा का पूरी तरह पालन करे. मां पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन या लेप से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें जीवन डाला. उन्होंने उसे अपना पुत्र माना और द्वार पर पहरा देने की जिम्मेदारी दी.

स्कंद पुराण में भी इससे मिलता-जुलता प्रसंग मिलता है. इसमें भी पार्वती द्वारा अपने शरीर के लेप से बालक की रचना किए जाने का उल्लेख है. यही कारण है कि गणेश जी के जन्म को केवल ‘हल्दी से बने गणेश’ कहना पूरी पौराणिक कथा को नहीं दर्शाता, बल्कि हल्दी के उबटन वाली कथा लोक परंपरा में अधिक प्रचलित है.

मां की आज्ञा को माना सबसे बड़ा कर्तव्य

पार्वती ने बालक से कहा कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक किसी को भी अंदर न आने न दें. बालक ने मां की आज्ञा को अपना कर्तव्य मान लिया और द्वार पर पहरा देने लगा. कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे. गणेश जी उन्हें पहचानते नहीं थे. उन्होंने शिव को भी अंदर जाने से रोक दिया. शिव ने बताया कि वह पार्वती के पति हैं और उन्हें अंदर जाने से कोई नहीं रोक सकता. लेकिन गणेश जी अपनी मां की आज्ञा से पीछे नहीं हटे. उनके लिए मां का आदेश सबसे महत्वपूर्ण था.

शिव के गणों से हुआ युद्ध

गणेश जी को हटाने के लिए भगवान शिव ने अपने गणों को भेजा. तब गणेश जी ने अकेले ही उनका सामना किया. शिव पुराण में   और शिव के गणों के बीच हुए युद्ध का विस्तार से वर्णन मिलता है. गणेश जी के साहस और पराक्रम से सभी आश्चर्यचकित रह गए. जब वह किसी भी तरह वहां से हटने को तैयार नहीं हुए, तब भगवान शिव स्वयं उनके सामने आए.

शिव ने क्यों काटा गणेश जी का सिर?

भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध हुआ. युद्ध के दौरान शिव ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर अलग कर दिया. जब   को इस घटना का पता चला, तो वह क्रोधित हुईं. उन्होंने शिव से गणेश जी के सिर को पुनः स्थापित करने की मांग की. पार्वती जी का क्रोध इतना बढ़ गया कि उन्होंने पूरी सृष्टि के विनाश की चेतावनी तक दे दी. परिस्थिति को देखते हुए भगवान शिव ने गणेश जी को फिर से उस रूप में वापस लाने का वचन दिया.

हाथी का सिर लगाकर मिला नया जीवन

ने अपने गणों को उत्तर दिशा की ओर जाने और वहां मिलने वाले पहले जीव का सिर लाने का आदेश दिया. गणों को उत्तर दिशा में एक हाथी मिला. वे उसका सिर लेकर लौटे. इसके बाद हाथी का सिर गणेश जी के शरीर पर लगाया गया और मंत्रों के माध्यम से उन्हें नया जीवन दिया गया. शिव पुराण में गणेश जी के पुनर्जीवन और उनके गजानन स्वरूप से जुड़ा यह प्रसंग मिलता है. इस तरह गणेश जी को हाथी के मुख वाला (गजानन) स्वरूप प्राप्त हुआ. इसलिए गणेश जी को गजानन कहा जाता है.

 

ऐसे बने गणपति और प्रथम पूज्य

गणेश जी के जीवित होने के बाद भगवान शिव ने उन्हें गले लगाया. इसके बाद उन्हें अपने गणों का प्रमुख बनाया. इस वजह से गणेश जी का एक नाम ‘गणपति’ पड़ा. इस घटना के बाद गणेश जी को कई महत्वपूर्ण वरदान मिले. पौराणिक मान्यता के अनुसार उन्हें शुभ कार्यों और देवपूजा में सबसे पहले पूजे जाने का अधिकार प्राप्त हुआ. यही वजह है कि आज भी किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जाती है.

गणेश जी की कथा में छिपा जीवन संदेश

गणेश जी की यह कथा केवल जन्म और पुनर्जीवन की कहानी नहीं है. इसमें जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी छिपे हैं. गणेश जी का अपनी मां की आज्ञा के लिए अडिग रहना कर्तव्य, निष्ठा और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है. वहीं, उनका सिर कटना और फिर हाथी का सिर लगाया जाना आध्यात्मिक रूप से अहंकार से विवेक की ओर बढ़ने का संकेत है. हाथी को भारतीय परंपरा में बुद्धि, धैर्य, शक्ति और स्मरण शक्ति से जोड़कर देखा गया है. इसलिए गणेश जी का गजानन स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में केवल शक्ति पर्याप्त नहीं है बल्कि सही निर्णय के लिए बुद्धि, धैर्य और विवेक भी जरूरी हैं.

पुराणों में अलग-अलग रूपों में मिलती है कथा

गणेश जी के जन्म की कथा सभी पुराणों में बिल्कुल एक जैसी नहीं है. शिव पुराण में पार्वती द्वारा अपने शरीर के लेप से बालक की रचना का प्रसंग प्रमुख है. स्कंद पुराण में भी इसी तरह की कथा मिलती है. वहीं, लोक परंपराओं में हल्दी के उबटन से गणेश जी के जन्म की कहानी अधिक लोकप्रिय है. इसलिए गणेश जी के जन्म से जुड़ी इन कथाओं को अलग-अलग पौराणिक और लोक परंपराओं के रूप में समझना चाहिए.

  • Related Posts

    काश हर अफसर ऐसा हो ये तरीका जनता के लिये हितकारी बहुत साल पहले दुर्गा काॅलेज के प्रिंसिपल हुआ करते थे…. रणवीर सिंह शास्त्री।

      इनका इतना नाम था कि सारा प्रदेश उनकी चर्चा करता था। एकदम मजबूत, छोटे कद काठी मगर मजबूत इरादों के मालिक। कितनी भी ंिहंसा हो, कोई कितना भी बड़ा…

    Read more

    यमदूतों को भी लौटना पड़ा खाली हाथ, जानें पापांकुशा एकादशी की पौराणिक कथा

    Papankusha Ekadashi Vrat Katha: आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी को   कहा जाता है. साल 2026 में यह व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में इस…

    Read more

    NATIONAL

    काश हर अफसर ऐसा हो ये तरीका जनता के लिये हितकारी बहुत साल पहले दुर्गा काॅलेज के प्रिंसिपल हुआ करते थे…. रणवीर सिंह शास्त्री।

    काश हर अफसर ऐसा हो ये तरीका जनता के लिये हितकारी बहुत साल पहले दुर्गा काॅलेज के प्रिंसिपल हुआ करते थे…. रणवीर सिंह शास्त्री।

    पेट्रोल और बैटरी दोनों का कॉम्बिनेशन, इलेक्ट्रिक मोटर और पेट्रोल जनरेटर एक साथ, चीन की कंपनी Chery उतारेगी हाई-टेक टू-व्हीलर

    पेट्रोल और बैटरी दोनों का कॉम्बिनेशन, इलेक्ट्रिक मोटर और पेट्रोल जनरेटर एक साथ, चीन की कंपनी Chery उतारेगी हाई-टेक टू-व्हीलर

    12 साल में तीन गुना बढ़ा भारत का रक्षा बजट, फिर चीन से मुकाबला क्यों मुश्किल? ITBP चीफ के बयान से उठे सवाल

    12 साल में तीन गुना बढ़ा भारत का रक्षा बजट, फिर चीन से मुकाबला क्यों मुश्किल? ITBP चीफ के बयान से उठे सवाल

    बिहार-बंगाल सहित इन राज्यों के 22 शहर में पेट्रोल-डीजल निकालने वाले तेल रिफाइनरी प्लांट, अमेरिका को जामनगर ही क्यों भाया?

    बिहार-बंगाल सहित इन राज्यों के 22 शहर में पेट्रोल-डीजल निकालने वाले तेल रिफाइनरी प्लांट, अमेरिका को जामनगर ही क्यों भाया?

    ‘भारत है रिफाइनिंग सुपरपावर’! आखिर रुबियो ने ऐसा क्यों कहा?

    ‘भारत है रिफाइनिंग सुपरपावर’! आखिर रुबियो ने ऐसा क्यों कहा?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने कहा- हम बेहद करीब, पिछले समझौतों से बिल्कुल अलग होगी यह डील

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने कहा- हम बेहद करीब, पिछले समझौतों से बिल्कुल अलग होगी यह डील