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1-2 बकरियों से शुरू किया सफर, अब तक बकरी पालन से हुई लाखों की कमाई

पवन कुमार सोनवानी की मेहनत और नवाचार बनी पशुपालकों के लिए प्रेरणा

अम्बिकापुर 19 सितम्बर 2026/    मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिलासपुर निवासी श्री पवन कुमार सोनवानी ने बकरी पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2012-13 में पवन कुमार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत मिले लाभ से महज 1-2 बकरियों के साथ बकरी पालन की शुरुआत की। पारंपरिक खेती के साथ उन्होंने बकरी पालन को धीरे-धीरे व्यवस्थित और व्यावसायिक रूप दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर मेहनत, उचित देखभाल और पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन से उनका यह छोटा प्रयास आगे बढ़ता गया।

मेहनत के साथ अपनाया नवाचार
पवन कुमार ने बकरियों के बेहतर स्वास्थ्य और प्रजनन के लिए विभागीय सलाह को अपनाया। वर्ष 2021-22 में बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) जैसी तकनीक का लाभ लेकर उन्होंने अपने पशुधन की गुणवत्ता और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। उचित आहार, नियमित देखभाल और पशु चिकित्सा विभाग से मिलने वाले मार्गदर्शन ने भी उनके बकरी पालन को मजबूत आधार दिया। उनके प्रयासों को देखते हुए उन्हें ATMA योजना के तहत पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया, जिससे उनका उत्साह और बढ़ा।

आज 10-12 स्वस्थ बकरियां, लाखों की आय
एक-दो बकरियों से शुरू हुआ पवन कुमार का सफर अब विस्तार ले चुका है। वर्तमान में उनके पास लगभग 10 से 12 स्वस्थ बकरियां हैं। वर्ष 2012-13 से अब तक वे बकरी पालन के माध्यम से लगभग 5 से 6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई कर चुके हैं। पवन कुमार बताते हैं कि शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन नियमित देखभाल, विभागीय मार्गदर्शन और नई तकनीकों को अपनाने से उन्हें लगातार आगे बढ़ने का अवसर मिला। बकरी पालन अब उनके लिए अतिरिक्त आय का साधन होने के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बन गया है।

आज पवन कुमार सोनवानी की कहानी यह संदेश देती है कि सही योजना, मेहनत, पशुओं की उचित देखभाल और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सीमित संसाधनों से भी पशुपालन को आय का स्थायी साधन बनाया जा सकता है। उनकी यह यात्रा क्षेत्र के अन्य किसानों और पशुपालकों के लिए प्रेरणा है कि पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक पशुपालन को अपनाकर परिवार की आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।

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