
रायपुर, 05 अक्टूबर 2026/ प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से ऋण स्वीकृत कराकर अपना पहला ई-रिक्शा खरीदा। यह ई-रिक्शा श्रीमती शशि देवी कंवर जैसी मातृशक्ति के आर्थिक सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता का मुख्य आधार बन रही है।
धमतरी जिले के सुदूर ग्राम रीवागहन की गलियों में जब आज ई-रिक्शा की घंटी बजती है, तो वह केवल एक वाहन के चलने की आवाज़ नहीं, बल्कि एक महिला के दृढ़ संकल्प और आत्मनिर्भरता की गूंज होती है। कभी आर्थिक तंगी से जूझते हुए मजदूरी करने वाली श्रीमती शशि देवी कंवर आज न केवल स्वयं स्वावलंबी हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं।
*मजदूरी से स्वावलंबन तक की कठिन डगर*
विवाह के बाद शशि देवी का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण था। आय के सीमित साधनों के बीच पति श्री ज्योति कुमार कंवर के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करना एक दैनिक चुनौती थी। बच्चों के बेहतर भविष्य की चिंता और सीमित आय के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
*बिहान अभियान से मिली नई दिशा*
श्रीमती शशि देवी के जीवन का टर्निंग प्वाइंट तब आया जब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की आईसीआरपी टीम उनके गांव पहुंची। स्व-सहायता समूह के महत्व को समझते हुए उन्होंने नव दुर्गा स्व-सहायता समूह का गठन किया और अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व संभाला। मिशन के 11 सूत्रों का पालन करते हुए बचत और समूह संचालन में उन्होंने अनुकरणीय योगदान दिया।
*मुद्रा योजना और आरसेटी से पंखों को मिली उड़ान*
आत्मनिर्भर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए श्रीमती शशि देवी ने जिला पंचायत धमतरी के मार्गदर्शन में श्बड़ौदा आरसेटीश् से 30 दिवसीय ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से ऋण स्वीकृत कराकर उन्होंने अपना पहला ई-रिक्शा खरीदा।
*आर्थिक मजबूती और परिवार की खुशहाली*
ई-रिक्शा चलाकर श्रीमती शशि देवी आज प्रतिदिन 800 से 1000 रुपए तक आजीविका अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता का दायरा यहीं नहीं रुका; उन्होंने परिवार की आय बढ़ाने के लिए एक और ई-रिक्शा खरीदा, जिसे अब उनके पति चलाते हैं।
शासकीय योजनाओं के समावेशी लाभ से उन्हें श्प्रधानमंत्री आवास योजनाश् के तहत पक्का मकान भी मिला, जिससे परिवार को एक सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना प्राप्त हुआ।
*सपनों को लग रहे हैं नए पंख*
श्रीमती शशि देवी की इस सफलता का सबसे खूबसूरत असर उनके बच्चों की शिक्षा पर दिख रहा है। उनकी बेटी बीएससी नर्सिंग कर रही है और बेटा स्नातक की पढ़ाई में रत है। शशि देवी का ध्येय अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देकर समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
*गांव की महिलाओं के लिए बनीं पथ-प्रदर्शक*
आज श्रीमती शशि देवी रीवागहन और आसपास की अन्य ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़ने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन, दृढ़ इच्छाशक्ति और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से कोई भी महिला अपनी तकदीर खुद बदल सकती है।









