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(अम्बिकापुर समाचार)लखनपुर विकासखंड में सरगुजा ओलंपिक 2026 का भव्य शुभारंभ, खिलाड़ियों में दिखा उत्साह दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम 10 अक्टूबर तक चलेंगी प्रतियोगिताएं, विजेता खिलाड़ियों को किया जाएगा पुरस्कृत

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/  सरगुजा जिले के आकांक्षी विकासखंड लखनपुर में गुरुवार को विकासखंड स्तरीय सरगुजा ओलंपिक 2026 का उत्साहपूर्ण वातावरण में शुभारंभ हुआ। कलेक्टर श्री अजीत वसंत एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रोमा श्रीवास्तव के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में तथा जनपद पंचायत लखनपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती खुशबू शास्त्री के नेतृत्व में खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता का शुभारंभ जिला पंचायत सदस्य श्री विजय अग्रवाल एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शशिकला सिंह ने खिलाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर किया।
सरगुजा ओलंपिक के शुभारंभ अवसर पर खिलाड़ियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रतियोगिता के पहले दिन 100 मीटर, 200 मीटर एवं 400 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक, भाला फेंक, चक्का फेंक, 4×100 मीटर रिले दौड़ तथा वॉलीबॉल सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में महिला एवं पुरुष वर्ग के साथ ही जूनियर एवं सीनियर वर्ग के खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल प्रतिभा, शारीरिक क्षमता एवं खेल कौशल का प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अतिथियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक जैसे खेल आयोजनों से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। ऐसे आयोजन युवाओं में खेल भावना, अनुशासन, टीम भावना एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को मिल रहा अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर
सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से विकासखंड के विभिन्न क्षेत्रों के खिलाड़ियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जहां वे अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। प्रतियोगिताओं का उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करना तथा युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करना है। प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए उत्साह एवं खेल भावना का परिचय दिया।
विकासखंड स्तरीय सरगुजा ओलंपिक की प्रतियोगिताएं 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की जाएंगी। प्रतियोगिताओं के समापन अवसर पर विभिन्न खेल विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम में जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री कामेश्वर राजवाड़े, श्री यतेन्द्र पांडेय, जनपद सदस्य श्रीमती नीतू झरिया, श्री चक्रभान राजवाड़े, ग्राम पंचायत पुहपुटरा के सरपंच श्री गोविंद, श्री मोहरलाल राजवाड़े, श्री विक्रम सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। साथ ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री डी.के. गुप्ता, मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी श्री देव सिंह पैकरा, विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, सचिव, अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

 
सेवा संकल्प अभियान-2026 के तहत पीजी कॉलेज अम्बिकापुर में नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता का आयोजन
विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया सेवा, राष्ट्र भावना एवं सामाजिक सुधार का संदेश

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/  सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बिकापुर में  नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का विषय ‘विकसित भारत अभियान की परिकल्पना, सेवा एवं राष्ट्र भावना तथा सामाजिक सुधार’ रखा गया था। इस अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मक एवं प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज में जनजागरूकता का संदेश दिया।

प्रतियोगिता में गंगा ग्रुप, यमुना ग्रुप एवं यूथ एक्शन क्लब ग्रुप के विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका, समाज के प्रति सेवा भावना, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी एवं सकारात्मक बदलाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता, नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन तथा राष्ट्र निर्माण में सामूहिक सहभागिता का संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक जागरूकता का दिया संदेश
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी अभिनय कला, संवाद शैली एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से सेवा और समर्पण के महत्व को रेखांकित किया। प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विकसित भारत के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों, सेवा कार्यों एवं राष्ट्रहित की गतिविधियों में भी आगे आना चाहिए।

इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, रचनात्मकता एवं राष्ट्र भावना का विकास करना तथा उन्हें जनजागरूकता के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना रहा।

निर्णायक मंडल ने किया प्रस्तुतियों का मूल्यांकन

नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए गठित निर्णायक मंडल में महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. शम्भू तिर्की, डॉ. विजय लक्ष्मी शास्त्री एवं श्रीमती दीपिका स्वर्णकार शामिल रहे। निर्णायक मंडल द्वारा प्रतिभागी समूहों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में आयोजन समिति की सदस्य सहायक प्राध्यापक श्रीमती सुनन्ना लकड़ा, हिन्दी विषय की अतिथि व्याख्याता डॉ. प्रियंका तिवारी, अंग्रेजी विषय की अतिथि व्याख्याता कु. श्वेता मिश्रा तथा भूगोल विषय के अतिथि व्याख्याता श्री ओमकार कुशवाहा की महत्वपूर्ण सहभागिता रही।

सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत आयोजित इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही सामाजिक एवं राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को सेवा, समर्पण, सामाजिक सुधार एवं राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।

 
सेवा संकल्प अभियान के तहत नवीन शासकीय महाविद्यालय धौरपुर में नशामुक्ति जागरूकता रैली एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन
विद्यार्थियों ने रैली एवं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/  सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत नवीन शासकीय महाविद्यालय धौरपुर में  नशामुक्ति जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा नशे के दुष्प्रभावों के प्रति आम नागरिकों को जागरूक करने के उद्देश्य से जागरूकता रैली निकाली गई तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।
जागरूकता रैली महाविद्यालय परिसर से प्रारंभ होकर बस स्टैंड चैक तक निकाली गई। इस दौरान विद्यार्थियों ने नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक किया। बस स्टैंड चैक पर आयोजित नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने नशे की लत से व्यक्ति, परिवार एवं समाज पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहकर स्वस्थ, सुरक्षित एवं सकारात्मक जीवनशैली अपनाने तथा समाज में नशामुक्ति के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व, सेवा भावना एवं जनजागरूकता की भावना विकसित करना तथा नशामुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण में उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना रहा।

 
 
प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हुआ शुकुनर बीबी का पक्के घर का सपना, परिवार को मिला सुरक्षित आशियाना

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/  हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना एक पक्का घर हो, जहां वह अपने परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर सके। लेकिन आर्थिक परेशानियों के कारण कई परिवारों के लिए यह सपना लंबे समय तक अधूरा रहता है। ऐसे में शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से लाभान्वित होकर सरगुजा जिले के सीतापुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रायकेरा की निवासी श्रीमती शुकुनर बीबी का भी पक्के घर का सपना पूरा हुआ है।
श्रीमती शुकुनर बीबी, प्रधानमंत्री आवास योजना की हितग्राही हैं। वे पिछले कई वर्षों से ग्राम पंचायत रायकेरा में निवासरत हैं। पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था, जहां सीमित सुविधाओं के बीच दैनिक जीवन व्यतीत करना पड़ता था। कच्चे मकान में रहकर परिवार का भरण-पोषण करना और सुरक्षित आवास की चिंता के बीच जीवन गुजारना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। उनका सपना था कि परिवार को एक ऐसा पक्का घर मिले, जहां सभी सदस्य सुरक्षित रह सकें और बेहतर वातावरण में जीवन व्यतीत कर सकें।
वर्ष 2025-26 में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से लाभान्वित होने के बाद श्रीमती शुकुनर बीबी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया। योजना के माध्यम से पक्का आवास मिलने से उनका वर्षों पुराना सपना साकार हुआ। अब उनका परिवार कच्चे मकान की परेशानियों से राहत पाकर पक्के घर में जीवन व्यतीत कर रहा है। सुरक्षित छत मिलने से परिवार को सुकून और भविष्य के प्रति विश्वास मिला है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ग्रामीण क्षेत्रों के पात्र परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास देकर उनके जीवन स्तर में सुधार लाना तथा उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है। श्रीमती शुकुनर बीबी की कहानी इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है, जहां शासन की योजना से एक परिवार का वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ।
आज श्रीमती शुकुनर बीबी अपने परिवार के साथ पक्के मकान में रहकर बेहतर और सुरक्षित जीवन की ओर आगे बढ़ रही हैं। उनका यह सफर बताता है कि पक्का आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, सम्मान और खुशहाल भविष्य का आधार भी है।

 
 
पशुपालन और मछली पालन से समृद्ध हो रही सरगुजा के किसानों की आजीविका
शासकीय योजनाओं, अनुदान और विभागीय मार्गदर्शन से स्वरोजगार को मिल रहा बढ़ावा, किसानों के लिए आय के नए अवसर
डेयरी व्यवसाय और सूकर पालन से लेकर मछली पालन तक, ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती का आधार बन रहीं आजीविका गतिविधियां
(विशाल कुमार जायसवाल
सहायक सूचना अधिकारी अम्बिकापुर)

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/   छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। पशुपालन और मत्स्य पालन ग्रामीण आजीविका के ऐसे महत्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहे हैं, जिनसे किसानों को कृषि कार्यों के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। पशुधन विकास विभाग की योजनाओं, राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना तथा ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरियों जैसी पहलों से जिले के हितग्राही लाभान्वित हो रहे हैं। इन गतिविधियों से जुड़े किसानों की सफलता अन्य ग्रामीणों को भी पशुपालन, डेयरी व्यवसाय और मछली पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से संध्या को मिला आत्मनिर्भरता का आधार
सरगुजा जिले के लमगांव निवासी संध्या ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के सहयोग से डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। वर्ष 2024 में योजना के अंतर्गत अनुदान मिलने से उन्हें गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता मिली। वर्तमान में उनके पास प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें प्रतिदिन करीब 1,200 रुपये की आय प्राप्त होती है। चारा-पानी और अन्य खर्चों को घटाने के बाद वे प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की बचत कर रही हैं। इस प्रकार उनकी वार्षिक बचत लगभग एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रही है।
संध्या ने पशुपालन को केवल वर्तमान आय तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि भविष्य में व्यवसाय के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। गायों से प्राप्त तीन बछियों को वे भविष्य में प्रजनन के लिए तैयार कर रही हैं, जिससे उनके पशुधन में वृद्धि और दूध उत्पादन बढ़ने की संभावनाएं हैं। उनकी सफलता दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाला सहयोग, नियमित देखभाल और मेहनत ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

सूकर पालन से अनिल ने खड़ा किया सफल व्यवसाय

सरगुजा जिले के ग्राम शिवनाथपुर निवासी अनिल कुमार खेस ने सूकर पालन को सफल व्यवसाय के रूप में विकसित कर अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। वर्ष 2018 में पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना के अंतर्गत मिली सहायता से उन्होंने महज दो कमरों में सूकर पालन की शुरुआत की। सीमित संसाधनों से शुरू किए गए इस व्यवसाय को उन्होंने मेहनत, अनुभव और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे आगे बढ़ाया।
अनिल कुमार  की सफलता यह बताती है कि पशुपालन के लिए बड़े निवेश या व्यापक संसाधनों की अनिवार्यता नहीं है। उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग, पशुओं की उचित देखभाल और व्यवसाय से प्राप्त आय का पुनर्निवेश करके इसे धीरे-धीरे विस्तारित किया जा सकता है। उनके अनुभव से ग्रामीण युवाओं और किसानों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार शुरू करने की प्रेरणा मिलती है। सूकर पालन जैसे व्यवसायों से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

आजीविका डबरी से सिंचाई और मछली पालन का मिला दोहरा लाभ

अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम सकालो निवासी किसान बाबूनाथ के लिए आजीविका डबरी का गहरीकरण और मरम्मत खेती-किसानी में उपयोगी साबित हुई है। ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत डबरी की जल संग्रहण क्षमता बेहतर होने से अब उन्हें साग-सब्जियों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है। इससे वे अपने खेत में सब्जी उत्पादन कर पा रहे हैं। घर की जरूरतों के लिए सब्जियां मिलने के साथ आवश्यकता के अनुसार बाजार में बिक्री करने का अवसर भी मिल रहा है। सब्जी उत्पादन से प्राप्त आमदनी खेती से जुड़े खर्चों को पूरा करने में मदद कर रही है।
डबरी में मछली बीज डाले जाने से बाबूनाथ को मत्स्य पालन का अवसर भी मिला है। अब एक ही जल संसाधन का उपयोग सिंचाई और मछली पालन, दोनों गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। बाबूनाथ के अनुसार, डबरी में पानी उपलब्ध होने से खेती में सुविधा मिली है और मछली पालन से भी लाभ की संभावना बनी है। यह उदाहरण बताता है कि जल संरक्षण से जुड़ी परिसंपत्तियों का समुचित उपयोग किसानों के लिए आजीविका के एक से अधिक साधन विकसित कर सकता है।

अनुपयोगी जमीन पर बनी डबरी से मिली नई राह
ग्रामीण रोजगार योजना के तहत निर्मित डबरी ने सनी लाल के लिए भी आजीविका के नए अवसर तैयार किए हैं। पहले उनकी जमीन खाली पड़ी रहती थी और उसका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था। डबरी बनने के बाद उसमें पानी संग्रहित होने लगा, जिससे उन्हें मछली पालन शुरू करने और साग-भाजी की खेती करने की सुविधा मिली। अब वे डबरी में मछलियां पाल रहे हैं और उन्हें तैयार होने पर बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने की उम्मीद कर रहे हैं।
सनी लाल बताते हैं कि डबरी बनने से सिंचाई की सुविधा मिली है और अब वे साग-भाजी भी उगा रहे हैं। इस प्रकार पहले अनुपयोगी रहने वाली जमीन का उपयोग बढ़ा है और उपलब्ध जल संसाधन खेती से जुड़ गया है। मछली पालन से भविष्य में अतिरिक्त आमदनी की संभावना के साथ सब्जी उत्पादन से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में भी सहायता मिल रही है। यह उदाहरण ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन के आपसी संबंध को दर्शाता है।

योजनाओं के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
राज्य शासन द्वारा पशुपालन और मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं और विभागीय गतिविधियों के माध्यम से हितग्राहियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के जरिए पात्र हितग्राहियों को डेयरी व्यवसाय के लिए अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। पशुधन विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से पशुपालन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत डबरी निर्माण और गहरीकरण जैसे कार्य जल संरक्षण के साथ खेती तथा मछली पालन के अवसर विकसित करने में सहायक हो रहे हैं।
इन पहलों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अपनी जरूरतों के अनुरूप आजीविका के साधन विकसित करने का अवसर मिलता है। डबरी में वर्षा जल का संग्रहण, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता, सब्जी उत्पादन और मछली पालन जैसी गतिविधियों को एक साथ अपनाने से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो रहा है। इसी तरह डेयरी और सूकर पालन जैसे व्यवसाय कृषि पर निर्भरता के साथ आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार करने में मदद कर रहे हैं।
इन हितग्राहियों के अनुभव यह संदेश देते हैं कि शासकीय योजनाओं की जानकारी, विभागीय सहयोग और स्वयं की मेहनत से ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाया जा सकता है। इनकी पहल से अन्य किसानों और ग्रामीण परिवारों को भी पशुपालन, डेयरी व्यवसाय तथा मत्स्य पालन अपनाने की प्रेरणा मिल रही है। इस प्रकार योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों को उपलब्ध संसाधनों के आधार पर स्थायी आजीविका विकसित करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना भी है।़

 
 
सेवा की कहानीः ममता शर्मा बनीं रोजगार सृजन की मिसाल, ईवी वर्कशॉप स्थापित कर 7 लोगों को दिया काम
पीएमईजीपी से मिले 20 लाख रुपए के ऋण ने खोली उद्यमिता की राह, तकनीकी क्षेत्र में बनाई अपनी पहचान
स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनीं ममता, अन्य महिलाओं को भी उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कर रहीं प्रेरित

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/  आत्मनिर्भर बनने के संकल्प और शासन की योजना से मिले सहयोग ने अम्बिकापुर की ममता शर्मा को एक सफल उद्यमी के रूप में आगे बढ़ने का अवसर दिया है। कभी स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का सपना देखने वाली ममता आज इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) वर्कशॉप का संचालन कर रही हैं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्होंने न केवल अपने लिए स्वरोजगार का रास्ता बनाया, बल्कि 6 से 7 अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है। तकनीकी क्षेत्र में उनका यह कदम महिला उद्यमिता के साथ स्थानीय रोजगार सृजन का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है।

20 लाख रुपए के ऋण से साकार हुआ उद्यम स्थापित करने का सपना
ममता शर्मा ने बताया कि उन्हें इंटरनेट के माध्यम से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की जानकारी मिली थी। स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा के साथ उन्होंने योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया। इसके अंतर्गत उन्हें 20 लाख रुपए का ऋण लेकर उन्होंने अम्बिकापुर में इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप की स्थापना की।

नए क्षेत्र में व्यवसाय शुरू कर ममता ने अपनी उद्यमशीलता का परिचय दिया है। आज वे अपनी वर्कशॉप का संचालन करने के साथ वहां कार्यरत कर्मचारियों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। उनकी यह उपलब्धि बताती है कि वित्तीय संसाधन और सही अवसर मिलने पर महिलाएं तकनीक आधारित व्यवसायों में भी आगे बढ़ सकती हैं।

प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से मिला आगे बढ़ने का अवसर
ममता के अनुसार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता के साथ उद्यम संचालन से संबंधित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की सुविधा भी मिलती है। योजना के तहत नए उद्यमियों को व्यवसाय प्रबंधन और कार्य को बेहतर बनाने की जानकारी दी जाती है। इससे स्वरोजगार की शुरुआत करने वाले हितग्राहियों को अपने उद्यम को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में मदद मिलती है।

ममता ने कहा कि महिलाओं को अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर आगे बढ़ना चाहिए। गांव और शहर की ऐसी महिलाएं, जो कुछ नया करना चाहती हैं, वे शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर पात्रतानुसार उनका लाभ उठा सकती हैं।

खुद आत्मनिर्भर बनीं, दूसरों की आजीविका का भी बनीं सहारा
ममता शर्मा की सफलता की विशेषता उनका रोजगार प्रदाता के रूप में उभरना है। इलेक्ट्रिक वाहन वर्कशॉप के माध्यम से उन्होंने स्वरोजगार को अन्य लोगों की आजीविका से जोड़ा है। उनका यह प्रयास महिला सशक्तिकरण के साथ स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार की संभावनाओं को भी रेखांकित करता है।

ममता शर्मा ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया। उन्होंने अन्य महिलाओं से भी आगे आकर अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप उद्यम स्थापित करने का आह्वान किया।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ममता शर्मा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि शासन की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकती हैं।

 
 
सेवा संकल्प अभियान के तहत शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय में प्लास्टिक मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने दिया सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/  सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शुक्रवार को शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, अम्बिकापुर में प्लास्टिक मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को सिंगल यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का संदेश देना था।
इस अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्लास्टिक मुक्त भारत की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने सिंगल यूज प्लास्टिक से पर्यावरण, जल, भूमि एवं जीव-जंतुओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को दर्शाते हुए इसके उपयोग को बंद करने का संदेश दिया। साथ ही दैनिक जीवन में प्लास्टिक के स्थान पर कपड़े एवं जूट के थैलों सहित अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त परिसर तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संदेश दिया कि प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण को स्वच्छ, सुंदर एवं सुरक्षित बनाया जा सकता है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के माध्यम से स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

 
 
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के लिए 30 अक्टूबर तक आमंत्रित किए गए आवेदन

अम्बिकापुर 09 अक्टूबर 2026/   मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिभावान एवं निम्न आय वर्ग के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित उच्च व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में अध्ययन के लिए तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, नवा रायपुर द्वारा संचालित इस योजना के तहत शिक्षण सत्र 2026-27 में पात्र संस्थानों में प्रवेश लेकर अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों से ऑफलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक पात्र विद्यार्थी 30 अक्टूबर 2026 को शाम 4 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

योजना का उद्देश्य राज्य के प्रतिभावान निम्न आय वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना तथा प्रतिष्ठित संस्थानों में अध्ययन के दौरान आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), भारतीय विधि संस्थान (एनएलयू) तथा एमबीबीएस जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त कर अध्ययनरत पात्र विद्यार्थियों को लाभान्वित करने का प्रावधान है।

योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थी का छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी होना आवश्यक है। साथ ही, विद्यार्थी छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अधिसूचित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल होना चाहिए। संबंधित संस्थान में चयनित होने का प्रमाण पत्र तथा प्रवेश के लिए संस्था द्वारा जारी सूचना पत्र भी आवेदन के साथ प्रस्तुत करना होगा। पात्र विद्यार्थियों के पालक की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। शासकीय सेवकों के आश्रित इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगे, हालांकि चतुर्थ श्रेणी शासकीय कर्मचारियों के बच्चे योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। आवेदन निर्धारित प्रपत्र में ही स्वीकार किए जाएंगे।

पात्र विद्यार्थी निर्धारित आवेदन पत्र एवं आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना आवेदन कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, कम्पोजिट बिल्डिंग, प्रथम तल, कलेक्टोरेट परिसर, अम्बिकापुर, जिला सरगुजा में जमा कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं।
योजना की पात्रता, शर्तों तथा आवेदन पत्र का निर्धारित प्रारूप सरगुजा जिले की आधिकारिक वेबसाइट  www.surguja.nic.in   से डाउनलोड किया जा सकता है।

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