
Brahmaputra River: भारत में ऐसी नदी भी है, जिसे पुरुष नदी कहा जाता है. आखिर गंगा, यमुना और नर्मदा से अलग इस नद का नाम क्या है, जिसे पुरुष नदी के रूप में जाना जाता है?
इस नद (पुल्लिंग रूप वाली नदी) का नाम ब्रह्मपुत्र है, जिसका अर्थ ब्रह्मा का पुत्र होता है. आखिर इस नदी का नाम ब्रह्मपुत्र क्यों पड़ा और इसके पीछे कौन सी पौराणिक कहानी प्रचलित है? कितने और नद भारत में है? जानिए नद से जुड़े इस दिलचस्प रहस्य के बारे में.
ब्रह्मपुत्र ही क्यों कहलाती है पुरुष नदी?
गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी और कावेरी जैसी नदियों को धार्मिक मान्यताओं में देवी और माता के रूप में पूजा जाता है. वहीं, ब्रह्मपुत्र शब्द का अर्थ ब्रह्मा का पुत्र होता है. इसी वजह से इसे पुरुष नदी कहा जाता है. हिंदी में पुल्लिंग रूप वाली नदी के लिए ‘नद’ शब्द का भी इस्तेमाल किया जाता है.
हालांकि, ब्रह्मपुत्र भारत की एकमात्र पुरुष नदी नहीं है. दामोदर, अजय, रूपनारायण और पगला जैसी नदियों के नाम भी पुरुषवाचक हैं.
क्या है ब्रह्मपुत्र नदी के जन्म की पौराणिक कहानी?
ब्रह्मपुत्र की उत्पत्ति को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं. इनमें एक कथा ब्रह्मा, ऋषि शांतनु और उनकी पत्नी अमोघा से जुड़ी है.
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रह्मा जी अमोघा पर मोहित हो गए थे, लेकिन अमोघा ने उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया. इसके बाद ब्रह्मा जी ने ऋषि शांतनु (अमोघा के पति) से कहा कि उनके (ब्रह्मा जी) और अमोघा के मिलन से पैदा होने वाली संतान संसार के लिए लाभदायक होगी.
कथा के मुताबिक, जिसके बाद ऋषि शांतनु के कहने पर अमोघा मान गई. फिर ब्रह्मा जी और अमोघा के मिलन से एक पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम ब्रह्मकुंड बताया जाता है. मान्यता है कि उसे कैलाश पर्वत के पास रखा गया था. इस कथा को ब्रह्मपुत्र नदी के नाम और उत्पत्ति से जोड़ा जाता है. हालांकि, यह पौराणिक मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उत्पत्ति का विवरण नहीं.
तिब्बत से भारत और बांग्लादेश तक बहती है यह नदी
ब्रह्मपुत्र नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट हिमालय के ऊंचे क्षेत्र से होता है. तिब्बत में इसे यारलुंग त्सांगपो कहा जाता है. इसके बाद यह अरुणाचल प्रदेश और असम से गुजरते हुए बांग्लादेश पहुंचती है, जहां इसे जमुना के नाम से जाना जाता है. अंत में यह बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है.
ब्रह्मपुत्र असम और अरुणाचल प्रदेश के लिए जीवन का महत्वपूर्ण आधार है. इसकी कुल लंबाई अलग-अलग स्रोतों में लगभग 2,900 से 3,850 किलोमीटर तक बताई जाती है. वहीं भारत में इस नदी की लंबाई लगभग 916 किलोमीटर है. यह अंतर नदी की लंबाई मापने के तरीके और पूरे नदी तंत्र को शामिल करने के कारण मिलता है.
ब्रह्मपुत्र के अलावा ये नदियां भी हैं खास
भारत में दामोदर, अजय, रूपनारायण और पगला जैसी नदियों के नाम भी पुरुष नामों से जुड़े हैं. दामोदर और अजय पश्चिम बंगाल के नदी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
इस तरह भारत में नदियों के नाम और उनसे जुड़ी मान्यताएं विविध हैं. जहां कई नदियों को मां के रूप में पूजा जाता है, वहीं ब्रह्मपुत्र अपनी पुरुषवाचक पहचान, पौराणिक कथा और विशाल नदी तंत्र (नदियों का बड़ा जाल) के कारण खास मानी जाती है.








