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प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा आत्मनिर्भरता का संबल

पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देकर महिला उद्यमिता को नई दिशा देने की पहल

 

में प्रथम चरण में 100 महिला पशु उद्यमियों की इकाइयां होंगी स्थापित

 

धमतरी, 17 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत धमतरी जिले में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, उनकी आजीविका के साधनों का विस्तार करने तथा पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी की शुरुआत की जा रही है। प्रस्तावित यह पहल महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पशु उद्यमी के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने और परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जयंत नाहटा के निर्देशन में यह पहल की शुरुआत होगी ।

 

कृषि के साथ आय के अतिरिक्त साधन विकसित करने पर जोर

 

धमतरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार कृषि एवं मौसमी मजदूरी पर निर्भर हैं। धान की एक प्रमुख फसल, सीमित रोजगार अवसर और मौसम तथा बाजार की अनिश्चितताओं के कारण कई परिवारों को वर्षभर नियमित आय बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बकरीपालन, देशी मुर्गीपालन और डेयरी जैसे पशुपालन आधारित व्यवसाय ग्रामीण परिवारों के लिए आय के वैकल्पिक एवं टिकाऊ साधन बन सकते हैं। प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी के माध्यम से महिलाओं की स्थानीय संसाधनों पर आधारित आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

 

दो चरणों में स्थापित होंगी 600 महिला पशु उद्यमी इकाइयां

 

यह पहल छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करेगी। परियोजना में विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के अभिसरण की भी परिकल्पना की गई है। प्रथम चरण में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जिले के चयनित संकुलों में 100 महिला पशु उद्यमियों की इकाइयां पायलट परियोजना के रूप में स्थापित की जाएंगी। इस चरण से प्राप्त अनुभवों एवं सफल क्रियान्वयन के आधार पर वित्तीय वर्ष 2027-28 में 500 अतिरिक्त इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस प्रकार आगामी चरण में कुल 600 महिला पशु उद्यमी इकाइयों के विकास की दिशा में कार्य किया जाएगा।

 

वैज्ञानिक पशुपालन, बेहतर देखभाल और बाजार से जुड़ाव

 

परियोजना के अंतर्गत महिला उद्यमियों को उन्नत एवं वैज्ञानिक पद्धतियों से बकरीपालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही देशी मुर्गीपालन को आजीविका के एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुओं के उचित पोषण, नियमित टीकाकरण, बीमा तथा स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पशुधन की सुरक्षा के साथ उद्यमों की आर्थिक व्यवहार्यता भी सुनिश्चित हो सके।

 

पशुपालन से प्राप्त गोबर एवं अन्य जैविक संसाधनों से खाद तैयार करने, उसके संग्रहण और विक्रय को प्रोत्साहित करने की भी योजना है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और महिलाओं के लिए आय के अतिरिक्त अवसर विकसित हो सकेंगे। उत्पादों के विपणन के लिए बायबैक व्यवस्था के माध्यम से बाजार से जुड़ाव सुनिश्चित करने की परिकल्पना की गई है, जिससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के विक्रय में सुविधा मिल सके।

 

आत्मनिर्भर महिला, सशक्त परिवार और समृद्ध गांव की दिशा में पहल

 

सीईओ जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा के निर्देशन में परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभागीय समन्वय, महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी और आजीविका गतिविधियों की निरंतरता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पशुपालन संबंधी जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से महिलाओं को व्यवस्थित उद्यम संचालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

प्रोजेक्ट आंगन लक्ष्मी का उद्देश्य महिलाओं को केवल आय अर्जित करने के अवसर उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक निर्णयों में अधिक भागीदारी और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देना भी है। यह पहल सफल होने पर ग्रामीण परिवारों की आय में विविधता लाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और महिला उद्यमिता को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सेवा संकल्प अभियान की भावना के अनुरूप यह परियोजना ग्रामीण आजीविका को मजबूती प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर महिलाओं और सशक्त गांवों के निर्माण की दिशा में सार्थक पहल साबित हो सकती है।

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