
Shah Rukh Khan Birthday Special: बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख खान आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने का सपना लाखों लोग देखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी उन्हें सिर्फ 50 रुपये की पहली कमाई हुई थी और बचपन में वह NSD के कलाकारों तक समोसे पहुंचाया करते थे? दिल्ली में बीते उनके बचपन की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर और राज बब्बर जैसे दिग्गजों के बीच रहते हुए शाहरुख ने ऐसा क्या देखा, जिसने उनके मन में एक्टर बनने का सपना जगा दिया? उनके 61वें जन्मदिन पर जानिए किंग खान के संघर्ष और सपनों से जुड़े कुछ अनसुने किस्से.
जब 10 साल के शाहरुख पहुंचाते थे कलाकारों को समोसे
के बचपन से जुड़ा यह किस्सा पंकज कपूर ने Kindle Cast के यूट्यूब पॉडकास्ट पर सुनाया था. पंकज कपूर 1970 के दशक में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में पढ़ाई कर रहे थे. उस दौरान वहां नाटकों के बीच इंटरवल में कलाकारों के लिए समोसे और चाय का इंतजाम होता था. पंकज ने बताया कि उन तक समोसे पहुंचाने वाला कोई और नहीं, बल्कि छोटे शाहरुख खान थे.
पंकज कपूर के मुताबिक, उस समय शाहरुख करीब 10 साल के थे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि शाहरुख के पिता या चाचा उस वक्त कैंटीन चलाते थे. यही वजह थी कि वह अक्सर वहां दिखाई देते थे. पंकज ने शायद उस समय नहीं सोचा होगा कि समोसे पहुंचाने वाला यह छोटा बच्चा आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल होगा.
पिता चलाते थे NSD का मेस, बहन का इंतजार करते हुए देखते थे नाटक
शाहरुख खान का NSD से जुड़ाव सिर्फ इस एक किस्से तक सीमित नहीं था. उन्होंने 19 जून 2014 को टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता मीर ताज मोहम्मद खान नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा का मेस चलाते थे. शाहरुख दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल में पढ़ते थे. स्कूल खत्म होने के बाद वह अपनी बड़ी बहन शहनाज ललारुख खान को लेने NSD पहुंचते थे. वहां उन्हें बहन का इंतजार करने के लिए करीब दो घंटे बिताने पड़ते थे.
शाहरुख ने बताया था कि उनका बचपन NSD के कलाकारों के बीच बीता. वह वहां घूमते रहते और कलाकारों के नाटक तथा रिहर्सल देखते थे. उन्होंने कई महीनों तक इन कलाकारों को मंच पर एक्टिंग करते हुए देखा. शाहरुख के मुताबिक, वह इन्हीं कलाकारों को देखकर बड़े हुए और उनके मन में भी एक्टर बनने की इच्छा पैदा हुई.
सीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर और राज बब्बर से मिली सीख
NSD में को उस दौर के कई दिग्गज कलाकारों को करीब से देखने का मौका मिला. इनमें पंकज कपूर, नसीरुद्दीन शाह, राज बब्बर, रघुबीर यादव, रोहिणी हट्टंगड़ी और अनुपम खेर जैसे नाम शामिल थे. शाहरुख ने अपने इंटरव्यू में इन कलाकारों के साथ बिताए समय को याद किया था.
उनका राज बब्बर से खास लगाव था. शाहरुख उन्हें प्यार से ‘बब्बर शेर अंकल’ कहते थे. राज बब्बर उन्हें कई मशहूर नाटकों के बारे में बताते थे. इनमें ‘सूरज का सातवां घोड़ा’, ‘रजिया सुल्तान’ और ‘तुगलक’ जैसे नाटक शामिल थे. शाहरुख ने खुद बताया था कि उन्होंने इन दिग्गज कलाकारों की एक्टिंग से काफी कुछ सीखा है.
NSD के छात्र नहीं थे शाहरुख, फिर भी थिएटर से रहा गहरा रिश्ता
के बारे में एक बात जानना भी जरूरी है. वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के छात्र नहीं थे. उन्होंने 2016 में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में खुद स्पष्ट किया था कि उनका NSD से जुड़ाव वहां के कलाकारों के साथ रहने और उनके काम को देखने की वजह से था.
हालांकि, दिल्ली में उन्होंने थिएटर जरूर किया. शाहरुख ने बैरी जॉन के थिएटर ग्रुप के साथ काम किया और अभिनय की बारीकियां सीखीं. उन्होंने 2014 के इंटरव्यू में बताया था कि थिएटर ने उन्हें आवाज पर नियंत्रण, शरीर की भाषा, धैर्य और रिहर्सल का महत्व समझाया. उनके मुताबिक, थिएटर में सीखी गई बातें फिल्मों में भी उनके बहुत काम आईं.
यानी जिस अभिनय की दुनिया से उनका परिचय बचपन में NSD के गलियारों में हुआ था, उसे समझने और सीखने के लिए उन्होंने आगे खुद मेहनत भी की. लेकिन फिल्मों में आने से पहले उनकी जिंदगी में एक और दिलचस्प पड़ाव आया, जहां उनकी पहली कमाई सिर्फ 50 रुपये थी.
पहली कमाई सिर्फ 50 रुपये, उन पैसों से दोस्तों के साथ देखने गए ताजमहल
आज शाहरुख खान की गिनती दुनिया के सबसे अमीर फिल्मी सितारों में होती है, लेकिन उनकी पहली कमाई सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. उन्हें अपनी पहली नौकरी के लिए सिर्फ 50 रुपये मिले थे. यह कमाई उन्होंने दिल्ली में मशहूर गजल गायक पंकज उधास के एक कॉन्सर्ट में काम करके की थी.
शाहरुख वहां बतौर ‘उशर’ काम कर रहे थे. उनका काम कॉन्सर्ट में आने वाले मेहमानों को उनकी सीट तक पहुंचाना था. इस काम के बदले उन्हें 50 रुपये मिले. जनवरी 2017 में फिल्म ‘रईस’ के प्रमोशन के दौरान उन्होंने इस पुराने किस्से को याद किया था.
लेकिन शाहरुख ने अपनी पहली कमाई से कोई महंगी चीज नहीं खरीदी. उन्होंने दोस्तों के साथ आगरा जाकर ताजमहल देखने का प्लान बना लिया. उस सफर से जुड़ा एक किस्सा भी उन्होंने सुनाया था. आगरा में उन्होंने गुलाबी रंग की लस्सी पी थी, जिसके बड़े गिलास में एक भौंरा भी गिर गया था. इसके बाद दिल्ली लौटते वक्त ट्रेन में उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें रास्ते भर उल्टियां होती रहीं.
50 रुपये की पहली कमाई, दोस्तों के साथ ताजमहल की सैर और रास्ते में हुई परेशानी. शाहरुख के लिए यह एक छोटा-सा सफर था, लेकिन आज उनकी जिंदगी के सबसे यादगार किस्सों में शामिल है.
फौजी से शुरू हुआ सफर, फिर ‘दीवाना’ ने बदल दी जिंदगी
थिएटर में सीखी गई बातें और बचपन में देखे गए कलाकारों का असर अब शाहरुख के काम में दिखाई देने लगा था. उन्होंने टेलीविजन से अपने करियर की शुरुआत की. साल 1988 में आए शो ‘फौजी’ में अभिमन्यु राय के किरदार ने उन्हें पहचान दिलाई. इसके बाद ‘सर्कस’ जैसे शो में भी उन्होंने काम किया.
फिर आया साल 1992, जब फिल्म ‘दीवाना’ से शाहरुख ने बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद ‘बाजीगर’ और ‘डर’ जैसी फिल्मों में उनके अलग अंदाज ने दर्शकों को चौंकाया. ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ने उन्हें रोमांस का बादशाह बना दिया. फिर ‘दिल तो पागल है’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को और मजबूत किया.
आगे चलकर शाहरुख ने रोमांटिक हीरो की छवि से बाहर निकलकर एक्शन, ड्रामा और कॉमेडी में भी अपनी अलग पहचान बनाई. आज वह सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में अपनी जबरदस्त पॉपुलैरिटी के लिए जाने जाते हैं.
समोसे पहुंचाने वाले बच्चे से दुनिया के किंग खान तक
शाहरुख खान के सफर को देखें तो उनकी कहानी में कई ऐसे छोटे-छोटे किस्से मिलते हैं, जो शायद उनकी फिल्मों से भी ज्यादा दिलचस्प हैं. कभी NSD में कलाकारों तक समोसे पहुंचाना, कभी राज बब्बर को ‘बब्बर शेर अंकल’ बुलाना और कभी 50 रुपये कमाकर दोस्तों के साथ ताजमहल घूमने निकल जाना. ये सभी यादें उस शाहरुख की हैं, जिसे दुनिया आज किंग खान के नाम से जानती है.
दिल्ली में बिताए बचपन ने उन्हें बड़े कलाकारों को करीब से देखने का मौका दिया. उन्हीं कलाकारों से प्रेरित होकर उनके मन में एक्टिंग का सपना जगा और फिर थिएटर से टीवी होते हुए वह फिल्मों तक पहुंचे. आज शाहरुख के जन्मदिन पर उनके स्टारडम की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन उनकी जिंदगी के ये छोटे-छोटे किस्से बताते हैं कि किंग खान बनने से पहले उनकी दुनिया कितनी अलग और दिलचस्प थी.









