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होशयारी दिखा हारे कवासी, केजरीवाल

‘दिल्ली के मालिक हम ऐं’बेलने वाले की जनता ने करा दी टैं
वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…
अति आत्मविश्वास, बड़बोलापन दोनों एक सीमा तक ही काम करते हैं। उस सीमा के बाद ये एक बड़े नुकसान का कारण बनते हैं।
बस यही भूल कवासी लखमा और केजरीवाल कर बैठे। पानी पी-पी कर अपने विरोधियों को कोसने मे किसी सीमा का पालन न करना और दबंगता के साथ अपनी बात फिर चाहे वो गलत ही क्यों न हो, दहाड़कर कहना इनकी विशेषता रही जो हमेशा से आम आदमी को प्रभावित भी करती रही।
कवासी लखमा झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में बड़े नेताओं के साथ शामिल थे। सारे सीनियर लीडर मारे गये पर आश्चर्यजनक रूप् से कवासी लखमा बच निकले। उन्हें वहां पर खड़ी एक बाईक मिल गयी जिस पर वे आनन-फानन में निकल गये।
इससे पहले उन्होनंे नक्सलियो से बातचीत भी की। आज भी ये संदेह कायम है कि नक्सलियों ने जब किसी भी नेता को नहीं छोड़ा तो लखमा को क्यों छोड़ा और फिर वहां पर बाईक कहां से आई जिससे वे भाग निकले।
ये फंस गये
वे अभी बाकी हैं
आज वही लखमा ईडी के घेरे में हैं 2161 करोड़ के घोटाले में। कहते हैं मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं अधिकारियों ने जहां कहा वहां साईन कर दिया। दूसरी ओर केजरीवाल समर्थक कहते हैं वे इतना ज्यादा पढ़े-लिखे हैं कि विरोधी उनसे जलते हैं और उनकी कद्र नहीं करते। यानि एक शून्य पे एक शिखर पे।
लेकिन दोनों की होशियारी धरी रह गयी। जिस तरह कवासी अधिकारियों पर थोप रहे हैं उसी तरह केजरीवाल ने भी आतिशी को लपेट लिया था। आरोपी के लेनदेन के बारे में ईडी की पूछताछ मे उन्होंने बयान दिया कि आरोपी सीधे आतिशी को रिपोर्ट करती थी, मुझे नहीं पता।
एक बार अपने घमण्ड का परिचय देते हुए केजरीवाल ने विधानसभा मे हुंकार भरी थी कि ‘दिल्ली के मालिक हम ऐं…. ’ और ऐसी ही एक दम्भोक्ति यह भी कि ‘मोदीजी इस जनम में तो आप हमको नहीं हरा सकते। हमको हराने के लिये आपको एक और जनम लेना पड़ेगा’।
आज जमाना केजरीवाल की दुर्गति पर हंस रहा है और अब केजरीवाल को खुद को वो मुकाम हासिल करने के लिये दूसरा जनम लेना होगा, जनता ने उनसे ‘टें’ बुलवा दी।
बहरहाल कवासी और केजरीवाल दोनों का अति आत्मविश्वास चुक गया।
यमुना मंे जहर
भावी विधायकों की खरीदी झूठ की पराकाष्ठा
केजरीवाल यमुना में जहर और पंद्रह करोड़ में विधायक खरीदने के मूर्खता पूर्ण आरोप भाजपा पर लगाकर अपने गले में फंदा डाल चुके हैं जिसमें एक बार फिर वे फंसंेगे।
पहले के भ्रष्टाचार के मामले तो यथावत कायम हैं ही।क्या कोई भी सरकार किसी नदी में जहर घोल कर हजारों लोगों को मारने का षड्यंत्र कर सकती है
और
जिन विधायक प्रत्याशियों का अभी रिजल्ट भी नहीं आया है। पता ही नहीं कि वे विधायक बन पाएंगे या नहीं, उन्हें खरीदने का मूर्खतापूर्ण प्रयास कोई कर सकता है वो भी पंद्रह करोड़ में।
ऐसे उलजुलूल आरोप केजरीवाल भाजपा पर लगाते रहे।
दोनों नेता बिखरने के कगार पर वक्त ने ढाया सितम
झूठ और ढोंग की पराकाष्ठा देखिये कि कवासी अपने करोड़ों के बंगले पर अपने ही बेटे को लपेट रहे हैं कि वो बंगला तो बेटे ने बनाया है मेरी तो बेटे से बोलचाल ही बंद है।
जबकि ये सरेआम देखा गया कि वे कार में अपने बेटे के साथ ही ईडी के कार्यालय पहुंचे। ईधर कई गिरफ्तार अधिकारियों ने ये साफ स्वीकार किया है कि वे आबकारी मंत्री कवासी लखमा को हर महीेने रकम पहुंचाते थे जो दो करोड़ से अधिक होती थी।
कवासी और केजरीवाल में एक समानता और है कि दोनों इस सारे कार्यवाही के लिये सरकार को जवाबदार बताते हैं और बदले की कार्यवाही कहते हैं।
चुनाव जीतने के बाद उन्होंने हर मंगलवार मंदिर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करने का वादा किया था, लेकिन फिर उन्होंने हनुमानजी को शकल नहीं दिखाई और दूसरी ओर मौलवियों की सुविधाओं पर सुविधाएं बढ़ाते गये।
अंततः छत्तीसगढ़ में पूर्व मंत्री कवासी लखमा की तरह दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जनता के सामने बेनकाब हो गये।
वक्त ने दोनों के छल को बेनकाब कर दिया।

जवाहर नागदेव वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक, विश्लेषक,
मोबा. 9522170700‘
बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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