
Cyclone Murasu : बंगाल की खाड़ी में उठ रहा चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ 2 नवंबर की आधी रात आंध्र प्रदेश तट को हिट कर सकता है. पहले ‘अर्नब’ और अब ‘मुरासु’, एक के बाद एक तूफान के आने से लोगों के जान-माल का नुकसान तो हो ही रहा है. साथ ही त्योहारों का भी मजा किरकिरा हो सकता है. दिवाली और छठ आने वाले हैं. जिसकी तैयारियां हफ्ते भर पहले से ही लोग शुरू कर देते हैं. छठ महापर्व से तो लोगों की भावनाएं तक जुड़ी होती हैं. आपको याद होगा ठीक दिवाली के ही दिन साल 2022 में जोरदार बारिश हुई थी, बामुश्किल ही इस साल दिवाली के दीए जल सके थे.
‘अर्नब’ ने झारखंड-बिहार के किसानों को कितना नुकसान पहुंचाया?
चक्रवात अर्नब के कारण बिहार और झारखंड के किसानों को भारी आर्थिक और फसलों का नुकसान उठाना पड़ा है. कृषि वैज्ञानिकों डॉ. अजय कुमार और डॉ. प्रकाश सिंह के अनुसार अकेले बिहार के 32 जिलों में धान की खड़ी और तैयार फसलें बर्बाद होने से करीब ₹5,000 करोड़ के वित्तीय नुकसान का अनुमान है, जिससे धान उत्पादन में 10 से 15% की गिरावट आ सकती है. इसके साथ ही खेतों में जलजमाव के कारण केला, सब्जियां और आगामी रबी फसलों की बुआई प्रभावित हुई है.
झारखंड के रामगढ़ और गढ़वा सहित कई जिलों में भी बेमौसम बारिश से धान, आलू और दलहन की फसलें तबाह हो गईं. दोनों राज्यों की सरकारें नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की तैयारी कर रही हैं.
2022 में सितरंग से हुए नुकसान
2022 में आए चक्रवात सितरंग का मुख्य असर बांग्लादेश और पूर्वोत्तर भारत (विशेषकर असम) के किसानों पर पड़ा था. भारत में इसके कारण सबसे ज्यादा नुकसान असम में हुआ, जहां लगभग 325.5 हेक्टेयर कृषि भूमि पर खड़ी धान की फसलें बर्बाद हो गईं. इसके अलावा तटीय ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बेमौसम बारिश से धान की अगेती फसलों को आंशिक नुकसान पहुंचा था. इस चक्रवात का सबसे भीषण रूप बांग्लादेश में देखा गया, जहां लगभग 82,000 एकड़ में लगी अमन धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई और 1.5 लाख से अधिक किसान प्रभावित हुए थे.
आपको 2022 की दिवाली याद है?
पिछली दफा साल 2022 की दिवाली में ऐसा देखने को मिला था जब दिवाली के ही दिन झारखंड के कई इलाकों में बारिश हुई थी. वहीं बिहार के कई जिलों में 2 से 3 डिग्री तक की कमी आई थी और बूंदाबांदी भी देखने को मिली थी. उस चक्रवाती तूफान का नाम था- ‘सितरंग’. जिसने त्योहार के उत्साह में खलल डालने का काम किया था.
बिहार और झारखंड में ‘मुरासु’ कितना असर छोड़ेगा
बिहार और झारखंड के कई हिस्सों में 2 से 4 नवंबर के बीच बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना है. बिहार के उत्तर सहित विभिन्न इलाकों में बादलों की आवाजाही रहेगी, जहां कुछ जगहों पर हल्की बूंदाबांदी भी हो सकती है. वहीं, झारखंड में मुरासु के सीमित प्रभाव के कारण कोल्हान, सिमडेगा, पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम, रांची और खूंटी समेत कई दक्षिणी और संताल परगना जिलों में गरज के साथ हल्की वर्षा या बौछारें पड़ने की उम्मीद है.
त्योहारों में दिखेगा ‘मुरासु’ का असर?
चक्रवात मुरासू (Cyclone Murasu) के प्रभाव से झारखंड में छिटपुट बारिश, घने बादल और ठंडी हवाओं के कारण दिवाली और आगामी छठ पूजा के बाजारों पर काफी असर पड़ने की आशंका है. धूप न निकलने और लगातार नमी रहने से स्थानीय कुम्हारों के मिट्टी के दीये व मूर्तियां सूख नहीं पा रही हैं, जिससे उनका तैयार माल खराब हो रहा है.
इसके साथ ही, त्योहार के ऐन वक्त पर होने वाली बूंदाबांदी से कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सजावट और विशेषकर खुले मैदानों में लगने वाले पटाखा बाजारों में ग्राहकों की भीड़ (फुटफॉल) कम हो सकती है. ग्रामीण इलाकों में फसलों को होने वाले नुकसान से किसानों की क्रय शक्ति घटेगी, जिससे कुल मिलाकर राज्य के खुदरा व्यापार को भारी आर्थिक मंदी का सामना करना पड़ सकता है.
धान की फसल पर क्यों बढ़ सकती है किसानों की चिंता
बिहार और झारखंड में इस समय धान की कटाई और फसल को सुखाने का काम कई इलाकों में चल रहा है. ऐसे में लगातार बादल छाने या बारिश होने से खेतों में खड़ी फसल के गिरने, कटे हुए धान के भीगने और अनाज में नमी बढ़ने का खतरा रहता है. यदि बारिश का दौर लंबा चलता है, तो धान की गुणवत्ता और भंडारण पर असर पड़ सकता है. हालांकि, मुरासु के कारण दोनों राज्यों में कितने क्षेत्र में फसल खराब होगी, इसका कोई प्रमाणित सरकारी आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है.
छठ की तैयारियों पर भी पड़ सकता है असर
बिहार और झारखंड में छठ की तैयारियों के दौरान घाटों की सफाई, रास्तों की मरम्मत और अस्थायी व्यवस्थाओं का काम किया जाता है. यदि किसी इलाके में लगातार बारिश होती है, तो घाटों पर कीचड़, फिसलन और जलभराव की समस्या हो सकती है. इससे स्थानीय प्रशासन और पूजा समितियों को तैयारियों में अतिरिक्त काम करना पड़ सकता है. लेकिन इसका असर जिले-दर-जिले बारिश की वास्तविक स्थिति पर निर्भर करेगा.
बिहार-झारखंड में इस साल दिवाली का कारोबार
2026 के दिवाली-धनतेरस त्योहारी सीजन में बिहार और झारखंड में कुल मिलाकर ₹35,000 करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड कारोबार होने की संभावना है. इस कुल व्यापार में बिहार की हिस्सेदारी ₹20,000 करोड़ और झारखंड की हिस्सेदारी ₹15,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15% की वृद्धि को दर्शाता है.
कारोबार में आ सकती है गिरावट?
दोनों राज्यों में दिवाली के तुरंत बाद छठ पूजा और शादियों का सीजन होने के कारण ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सोना-चांदी, कपड़े और बर्तनों के बाजारों में सबसे ज्यादा धनवर्षा हो रही है. वहीं अगर तूफान और बारिश का खेल जारी रहता है, तो हजारों करोड़ के इस कारोबार में भी गिरावट आ सकती है.






