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भूपेश, कवासी, लालू का बेटा, ईडी ने सबको लपेटा, सुप्रीम कोर्ट से भूपेश की याचिका वापस, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी…. खरी…..

भूपेशपुत्र,
कवासीपुत्र, की तरह
लालूपुत्र भी लाईन में


भूपेश बघेल ने अपनी गिरफ्तारी की आशंका के चलते सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। माननीय शीर्ष अदालत ने याचिका को ये कहते हुए लौटा दिया कि प्रार्थी को हाईकोर्ट जाना चाहिये।
जानकार कानूनविदों को कहना है कि इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गयी है।
कुछ दिन पूूर्व लालू यादव ने भी सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी जिसे माननीय न्यायालय ने खारिज कर दिया था।
अब लालू यादव को चारा घोटाले के अलावा एक और मामले में जेल जाना पड़ सकता है।
इस मामले मे लालू के परिवार के और भी सदस्य लपेटे में हैं। जैसे छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने माल कमाया तो अपने बेटे के नाम से बंगला बनवा लिया। जैसा कि आरोप है पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शराब घोटाले का माल बेटे चैतन्य बघेल को दिया।
ये कोई नयी बात नहीं है। इंसान परिवार के लिये ही जीता है और स्वाभाविक तौर पर अपनी कमाई को बच्चों के नाम पर लगाता है।
वैसे भी इस बेईमान जमाने में परिवार के अलावा किसी के नाम किया तो मौका मिलते ही वो खा जाएगा, संपत्ति हड़प कर लेगा। यानि सारे लोग अपनी कमाई को बच्चों के नाम से इन्वेस्ट करते ही हैं।
बहरहाल लालू यादव ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई कि लॅण्ड फाॅर जाॅब का निचली अदालत में चलने वाला केस बंद किया जाए।
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश देने से इन्कार कर दिया। और अब ये केस निचली अदालत में चालू है।
क्या है लैण्ड फॉर जॉब
संक्षेप में जान लें कि लैण्ड फाॅर जाॅब क्या है। दरअसल रेल्वे मंत्री रहते हुए लालू यादव ने बहुत से लोगों को नौकरिया दीं और इन नौकरियों के बदले में उनसे जमीन लिखवा लीं।

कई जमीने परिवार के सदस्यों के नाम पर भी रजिस्ट्रियां करवाईं। इस तरह करोड़ों की काली संपत्ति इकट्ठा कर ली।
बाद में ये मामला खुला तो हायतौबा मची।
तो नौकरी के बदले जमीन के मामले में भी लालू यादव के साथ उनके पुत्र-पुत्री भी सजा पा सकते हैं।
लगभग दस साल पहले अदालतों द्वारा आरोपी के साथ परिवार को भी दंडित करने का चलन दिखा था, यह कहकर की काली कमाई करने वाले की कमाई का मजा परिवार ने भी लिया है
लेकिन इन मामलों में तो सीधे-सीधे कमाई का पैसा बच्चों को बांटा गया है।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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