
Bhutan Flash Flood: भूटान में अचानक आई बाढ़ ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदा का खतरा बढ़ा दिया है. पुनाखा में मो छू नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से सोलर सिंचाई परियोजना को भारी नुकसान पहुंचा है. वहीं, बाढ़ के साथ बहकर आए बड़े-बड़े पत्थरों और मलबे ने पुनाखा-गासा हाईवे के एक हिस्से को जाम कर दिया है. इस घटना के बाद इलाके में जनजीवन प्रभावित हुआ है.
स्थानीय लोगों के लिए यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण थी. दरअसल, इलाके में सिंचाई के पानी की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से इसी साल सोलर आधारित इरिगेशन सिस्टम स्थापित किया गया था. इसके जरिए किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा था. लेकिन अचानक आई बाढ़ ने इस व्यवस्था को ठप कर दिया है. स्थानीय प्रतिनिधि के मुताबिक, सिस्टम फिलहाल काम नहीं कर रहा है. हालांकि, नुकसान का पूरा आकलन अभी किया जाना बाकी है.
बाढ़ के मलबे ने रोका हाईवे का रास्ता, यातायात प्रभावित
फ्लैश फ्लड का असर सिर्फ सिंचाई परियोजना तक सीमित नहीं रहा. बाढ़ के साथ बहकर आए भारी पत्थरों, मिट्टी और अन्य मलबे ने जोमलिंगथांग इलाके में पुनाखा-गासा हाईवे के एक हिस्से को ब्लॉक कर दिया है. सड़क पर मलबा जमा होने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
भूटान में ग्लेशियल झील फटने से आई बाढ़, कई इलाकों में खतरा
इस प्राकृतिक आपदा के पीछे भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू झील से पानी का अचानक बाहर निकलना बताया जा रहा है. गुरुवार शाम 29 अक्टूबर को झील में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटना सामने आई. यह झील मो छू नदी के उद्गम क्षेत्र में स्थित है और भूटान की उन 17 ग्लेशियल झीलों में शामिल है, जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना गया है.
झील से निकला पानी तेजी से निचले इलाकों की ओर बढ़ा. बाढ़ का पानी पुनाखा के करीब काबेसा गेओग के स्रिगांग तक पहुंचने की खबर है. यह इलाका पुनाखा जोंग से लगभग 8 किलोमीटर दूर बताया जा रहा है.
NDRF-SDRF की तैनाती, लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील
संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के तूफानगंज और बॉक्सिरहाट इलाकों में NDRF और SDRF की टीमों को तैनात किया गया है. प्रशासन नदी के जलस्तर और हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. वहीं, अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शाह ने लोगों से घबराने की बजाय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
क्या होता है GLOF, क्यों इतनी खतरनाक होती है यह बाढ़?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसमें ग्लेशियर के पास बनी झील का पानी अचानक बाहर निकलकर तेजी से निचले इलाकों की ओर बहने लगता है. इन झीलों का पानी अक्सर बर्फ, चट्टानों और मिट्टी से बनी प्राकृतिक दीवारों के पीछे जमा रहता है. जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटता है या कमजोर पड़ता है, तो पानी का विशाल बहाव तबाही मचा सकता है.
इस तरह की बाढ़ अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर, पेड़, मिट्टी और भारी मलबा लेकर आती है. इससे सड़कें, पुल, बिजली परियोजनाएं, खेत और रिहायशी इलाके बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं. हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और ग्लेशियल झीलों के बढ़ने के कारण GLOF का खतरा लगातार गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है.






