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बांग्लादेश में ‘शैडो कैबिनेट’ की तैयारी, क्या ब्रिटेन वाले फॉर्मूले में फंसेंगे तारिक रहमान?

Bangladesh Shadow Cabinet: बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद सत्ता की चाबी तारिक रहमान के हाथ आ गई है. मंगलवार दोपहर ढाका के संसद परिसर (साउथ प्लाजा) में उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली. राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें और उनके साथ 25 मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों को शपथ दिलाई. यह 2024 के छात्र आंदोलन और शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद पहला चुनाव था, जिसमें BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने बंपर जीत हासिल की है.

लेकिन इस जीत के बीच एक नया शब्द चर्चा में है‘शैडो कैबिनेट’. आइए आसान भाषा में जानते हैं कि यह क्या है और बांग्लादेश की राजनीति में इसे क्यों लाया जा रहा है.

क्या है यह ‘शैडो कैबिनेट’? 

शैडो कैबिनेट का आइडिया ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली (वेस्टमिंस्टर सिस्टम) से आया है. आसान शब्दों में कहें तो, जैसे स्कूल में एक असली मॉनिटर होता है और एक उसकी जगह लेने वाला तैयार रहता है, वैसे ही विपक्ष अपना एक ‘नकली मंत्रिमंडल’ बनाता है.

काम क्या है? इसमें विपक्ष के सीनियर नेता उन मंत्रालयों पर नजर रखते हैं जो सरकार के पास हैं. अगर सरकार का कोई मंत्री रक्षा या शिक्षा विभाग संभाल रहा है, तो शैडो कैबिनेट में भी एक ‘शैडो मंत्री’ होगा जो उस विभाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगा.

वॉचडॉग की तरह: यह सरकार की गलतियां पकड़ने और अपनी वैकल्पिक नीतियां (अल्टरनेटिव पॉलिसी) पेश करने का काम करता है.

क्यों हो रही है इसकी मांग?

चुनाव के नतीजे आने के बाद नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के प्रवक्ता आसिफ महमूद शोजीब भुइयां ने फेसबुक पर इसकी चर्चा छेड़ी. उन्होंने कहा कि सरकार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक ‘शैडो कैबिनेट’ की तैयारी है. जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार शिशिर मुनीर ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि इससे संसद में बहस का स्तर सुधरेगा.

क्या बांग्लादेश में यह पहले कभी हुआ है?

नागरिक सुशासन (सिटिजन्स फॉर गुड गवर्नेंस) के सचिव और राजनीतिक विश्लेषक बदीउल आलम मजूमदार के अनुसार, बांग्लादेश के इतिहास में आज तक कभी औपचारिक रूप से शैडो कैबिनेट नहीं बनी है. उन्होंने इसे एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि इससे सड़क पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों के बजाय संसद के भीतर बेहतर बहस हो सकेगी.

तारिक रहमान: 35 साल बाद मिला देश को पुरुष प्रधानमंत्री

तारिक रहमान का पीएम बनना कई मायनों में ऐतिहासिक है:

  • पहला पुरुष पीएम: पिछले 35 सालों से बांग्लादेश में सिर्फ महिलाएं (शेख हसीना और खालिदा जिया) ही पीएम बन रही थीं. तारिक रहमान इस सिलसिले को तोड़ने वाले पहले पुरुष हैं.
  • वनवास खत्म: वे लगभग 17 साल लंदन में निर्वासित जीवन बिताने के बाद दिसंबर में ढाका लौटे थे.
  • पारिवारिक विरासत: वे पूर्व पीएम खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं.

चुनाव के आंकड़े: किसने कितनी सीटें जीतीं?

बांग्लादेश की 350 सदस्यों वाली संसद में इस बार मुकाबला दिलचस्प रहा:

  • BNP: 212 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी.
  • जमात-ए-इस्लामी (11 पार्टियों का गठबंधन): 77 सीटें जीतीं.
  • वोटिंग सिस्टम: बांग्लादेश में 300 सीटों पर डायरेक्ट वोटिंग होती है, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होती हैं, जिन्हें पार्टियों की जीत के अनुपात में बांटा जाता है.
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