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किसान अपना रहे ढैंचा की हरित खाद तकनीक, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता होगी कम, भूमि की उर्वरता बढ़ाने की दिशा में पहल

 

अम्बिकापुर 18 जुलाई 2026/  खरीफ मौसम में भूमि की उर्वरता बनाए रखने तथा रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा किसानों को हरित खाद के रूप में ढैंचा की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग के मार्गदर्शन का सकारात्मक परिणाम अब जिले के विभिन्न गांवों में देखने को मिल रहा है, जहां किसान स्वयं आगे बढ़कर अपने खेतों में ढैंचा की बुवाई कर रहे हैं।

विकासखंड लुंड्रा के ग्राम नवापारा निवासी किसान इग्नासियस एक्का भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने कृषि विभाग की सलाह पर अपने खेत में लगभग दो एकड़ क्षेत्र में ढैंचा की बुवाई की है। किसान ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा उन्हें हरित खाद के महत्व की जानकारी दी गई तथा खेत की उर्वरता बढ़ाने के लिए ढैंचा लगाने की सलाह दी गई। इसी मार्गदर्शन के अनुरूप उन्होंने अपने खेत में ढैंचा बोया है।

किसान ने बताया कि ढैंचा की फसल लगभग 25 से 26 दिन की हो चुकी है। फसल की अच्छी बढ़वार हो रही है। पर्याप्त वर्षा एवं नमी मिलने के बाद इस फसल को जुताई कर खेत की मिट्टी में मिला दिया जाएगा। मिट्टी में मिल जाने के बाद ढैंचा प्राकृतिक रूप से सड़कर जैविक खाद में परिवर्तित हो जाएगा, जिससे भूमि में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ेगी तथा आगामी खरीफ एवं रबी फसलों के लिए खेत अधिक उपजाऊ बनेगा।

उन्होंने बताया कि हरित खाद के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होगी, जिससे खेती की लागत में भी कमी आएगी। साथ ही मिट्टी की संरचना में सुधार होने से फसलों की वृद्धि बेहतर होगी तथा उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होने की संभावना है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ढैंचा एक अत्यंत उपयोगी हरित खाद फसल है। इसकी जड़ों में उपस्थित सूक्ष्म जीवाणु वातावरण की नाइट्रोजन को भूमि में स्थिर करने का कार्य करते हैं। खेत में ढैंचा को पलटने से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जल धारण क्षमता में सुधार होता है तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है। इससे भूमि का स्वास्थ्य बेहतर होता है।  विभाग द्वारा किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा हरित खाद के उपयोग के संबंध में लगातार प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।

कृषि वैज्ञानिकों एवं मैदानी अमले द्वारा किसानों को समय-समय पर खेत स्तर पर भी आवश्यक सलाह दी जा रही है, जिससे वे वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें। कृषि विभाग ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे मिट्टी के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने एवं कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए हरित खाद तकनीक सहित अन्य वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाएं। ताकि किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।

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