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रावलपिंडी में 6 महीने के लिए तैनात हुई पाकिस्तानी सेना, मुनीर ने ताकत मिलते ही लिया फैसला; GHQ बना किला

पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील सैन्य शहर रावलपिंडी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. पंजाब सरकार की मांग पर पाकिस्तान की संघीय सरकार ने यहां सेना की तीन कंपनियों को छह महीने के लिए तैनात करने की मंजूरी दे दी है. यह फैसला रावलपिंडी में सेना के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) के पास हुई गोलीबारी की घटना के कुछ ही दिन बाद लिया गया है. इसके साथ ही हाल ही में पाकिस्तानी संसद ने ऐसे कानून पास किए हैं, जिन्होंने आर्मी चीफ आसिम मुनीर के हाथ में बेहिसाब ताकत दी है.

पंजाब सरकार की मांग पर सेना की तैनाती

सीएनएन-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार ने रावलपिंडी में सेना की तीन कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है. यह आदेश 21 अगस्त 2026 को जारी किया गया. पंजाब के गृह विभाग की ओर से रावलपिंडी में सैन्य बल की मांग किए जाने के बाद यह फैसला लिया गया.

सेना के जवानों को सेंसिटिव सिक्योरिटी ड्यूटी में लगाया जाएगा और वे किसी भी अप्रत्याशित सुरक्षा स्थिति से निपटने में जिला प्रशासन की मदद करेंगे. आदेश के मुताबिक, तैनाती तुरंत प्रभाव से छह महीने के लिए होगी.

किन इलाकों में होगी सेना की भूमिका?

के गृह और नारकोटिक्स कंट्रोल मंत्रालय ने सेना की तैनाती को मंजूरी दी है. आदेश में कहा गया है कि सेना के जवानों को रावलपिंडी प्रशासन के अधीन सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में लगाया जाएगा.

इस आदेश की जानकारी पाकिस्तान के कई शीर्ष सरकारी और सैन्य अधिकारियों को भी भेजी गई है. इनमें राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट डिवीजन, पंजाब गृह विभाग, पंजाब के पुलिस महानिरीक्षक और रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) शामिल हैं.

आर्टिकल 245 के तहत हुआ फैसला  की यह तैनाती पाकिस्तान के संविधान के आर्टिकल 245 के तहत की गई है. इस प्रावधान के तहत संघीय सरकार जरूरत पड़ने पर सशस्त्र बलों को नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए तैनात कर सकती है. इसी संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सरकार ने रावलपिंडी प्रशासन की मदद के लिए सेना की तीन कंपनियां उपलब्ध कराने का फैसला किया है.

यह तैनाती इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि रावलपिंडी पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान का प्रमुख केंद्र है. यहीं पाकिस्तानी सेना का GHQ स्थित है और शहर में कई अन्य संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान भी मौजूद हैं.

GHQ के पास हमले के बाद बढ़ी सुरक्षा

सेना की ताजा तैनाती का फैसला 11 अगस्त को GHQ के पास हुई एक सुरक्षा घटना के कुछ दिनों बाद आया है. उस दिन एक हथियारबंद व्यक्ति ने इलाके में एक सैन्य वाहन पर गोलीबारी की थी. हमले में एक पाकिस्तानी सैनिक की मौत हो गई थी. इसके बाद सुरक्षा बलों ने हमलावर को मार गिराया था. इस घटना के बाद अब रावलपिंडी में संवेदनशील सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.

 

क्या बढ़ी हुई ताकत के बल पर मुनीर ने उठाया कदम?

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने ‘डिफेंस फोर्सेस ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026’ और ‘नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2010’ में संशोधन को मंजूरी दे दी है. इन बदलावों के बाद जनरल आसिम मुनीर की भूमिका और अधिकारों में बड़ा विस्तार हुआ है. नए प्रावधानों ने पाकिस्तान की तीनों सेनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सैन्य नेतृत्व की ताकत को पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है.

जनरल  पहले ही चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज हैं, यानी पाकिस्तान की थल सेना, नौसेना और वायुसेना का प्रशासन और कमान उनके हाथ में थी. वहीं नए कानून की मदद से वह पाकिस्तान में के सैन्य शक्ति का केंद्रीकरण कर रहे हैं.

अब मुनीर के हाथ कौन-कौन से अधिकार?

नए कानून के तहत सैन्य कर्मियों को सेवा से हटाने, समय से पहले सेवानिवृत्त करने और इस्तीफा स्वीकार या अस्वीकार करने जैसे फैसलों में जनरल मुनीर की भूमिका बढ़ गई है.

इसके अलावा सैन्य सेवा की उम्र सीमा में बदलाव से जुड़े अधिकार भी नए प्रावधानों का हिस्सा हैं. 

अब जनरल आसिम मुनीर को राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा मामलों में प्रधानमंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार की भूमिका भी मिल गई है.

इस व्यवस्था से रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों में सेना प्रमुख की सीधी भूमिका बढ़ती है.

परमाणु हथियारों और रणनीतिक सैन्य क्षमताओं से जुड़ी कमान को भी नए सैन्य ढांचे में शामिल किया गया है.

पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन के तहत कमांडर ऑफ द नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड (CNSC) का नया चार सितारा पद बनाया गया है, जिस पर पिछले महीने ही जनरल सैयद आमेर रजा की नियुक्ति की गई थी.

पाकिस्तान में सबसे ताकतवर बने आसिम मुनीर

अब डिफेंस लॉ और नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट में किए गए संशोधनों के जरिए पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और रणनीतिक सैन्य क्षमताओं के संचालन से जुड़े नए ढांचे को कानूनी आधार दिया गया है. इस तरह पाकिस्तान के जनरल आसिम मुनीर की सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों में भूमिका पहले की तुलना में काफी अधिक प्रभावशाली हो गई है.

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