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पति के निधन के बाद नहीं टूटा कुसुम का हौसला, सक्षम योजना के सहारे संभाला ईंट व्यवसाय

 

दो लाख रुपये के ऋण और प्रशिक्षण से मिली नई राह, रक्षाबंधन पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को ‘भैया’ कहकर जताया आभार

धमतरी, 22 अगस्त 2026। कभी परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने पति के ईंट व्यवसाय को संभालने की कल्पना भी नहीं की थी। पति के निधन के बाद ग्राम लोहरसी की कुसुम शर्मा के सामने परिवार को संभालने के साथ आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया। पति के ईंट व्यवसाय का उन्हें अनुभव नहीं था और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त पूंजी भी उपलब्ध नहीं थी। ऐसे कठिन समय में महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘सक्षम योजना’ उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।
कुसुम को जब सक्षम योजना के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने योजना की जानकारी जुटाई और आत्मनिर्भर बनने का निर्णय लिया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया। जुलाई माह में उन्हें दो लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। ऋण मिलने के बाद उन्होंने व्यवसाय से संबंधित आवश्यक प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे पति के छोड़े हुए ईंट व्यवसाय को स्वयं संभालना शुरू किया।
कुसुम बताती हैं कि शुरुआत में उनके लिए यह काम आसान नहीं था। व्यवसाय की बारीकियों से परिचित होने के साथ आर्थिक संसाधनों का प्रबंधन करना भी उनके लिए नई चुनौती थी। लेकिन प्रशिक्षण, ऋण से मिली आर्थिक सहायता और स्वयं कुछ करने के मजबूत संकल्प ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। आज वह अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। व्यवसाय से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में बेहतर बनाया है और उन्हें आत्मनिर्भरता का नया भरोसा मिला है।
कुसुम के लिए सक्षम योजना केवल आर्थिक सहायता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर बनी है। उनका मानना है कि महिलाओं को यदि सही समय पर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे परिवार के साथ-साथ समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को शुभकामनाएं देते हुए कुसुम शर्मा कहती हैं कि महिलाओं के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाएं उनके जैसी एकल महिलाओं के लिए नई उम्मीद और आत्मविश्वास लेकर आई हैं। वह अपने ‘भैया’ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि उन्हें मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें फिर से अपने जीवन और आजीविका को नई दिशा देने का अवसर दिया है।
कुसुम की कहानी इस बात की प्रेरक मिसाल है कि हौसले को शासन की योजनाओं का साथ मिले, तो विपरीत परिस्थितियां भी आत्मनिर्भरता की राह में बाधा नहीं बनतीं।

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