
रायपुर। छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका द्वारा 20 जुलाई 2025 को आयोजित कुलपतियों की बैठक में निजी एवं शासकीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक केंद्रीकृत पोर्टल पर विश्वविद्यालयों की आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था। लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह पोर्टल आज तक अस्तित्व में नहीं आ सका है।
ठाकुर ने बताया कि उक्त बैठक में राज्यपाल महोदय द्वारा कुलपतियों को दो माह के भीतर शैक्षणिक सुधार का रोडमैप प्रस्तुत करने, यूजीसी के निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करने तथा बिना छात्र एवं बिना शिक्षक संचालित पाठ्यक्रमों को बंद करने के निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन इन निर्देशों के अनुपालन की स्थिति भी अब तक स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल महोदय द्वारा दिए गए निर्देशों का उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना था। ऐसे में एक वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रस्तावित पोर्टल का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होना गंभीर चिंता का विषय है।
ठाकुर ने की ये मांगें
संजय सिंह ठाकुर ने राज्य सरकार, राजभवन एवं छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग से मांग की है कि—
1. राज्यपाल महोदय द्वारा 20 जुलाई 2025 को दिए गए सभी निर्देशों के अनुपालन की सार्वजनिक समीक्षा रिपोर्ट तत्काल जारी की जाए।
2. निजी विश्वविद्यालयों के लिए प्रस्तावित केंद्रीकृत पोर्टल को तत्काल प्रारंभ कर उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि विद्यार्थी, अभिभावक एवं आम नागरिक विश्वविद्यालयों से संबंधित आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकें।
3. जिन विश्वविद्यालयों द्वारा राज्यपाल महोदय के निर्देशों एवं निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन नहीं किया गया है, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
4. प्रत्येक विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक सुधार रोडमैप एवं उसकी प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
ठाकुर ने कहा कि राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देश केवल औपचारिक घोषणा या कागजी कार्यवाही बनकर नहीं रह जाने चाहिए। इन निर्देशों का वास्तविक, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को उच्च शिक्षा संस्थानों से संबंधित मान्यता, पाठ्यक्रम, शिक्षक, अधोसंरचना, शुल्क एवं अन्य महत्वपूर्ण जानकारी पारदर्शी रूप से उपलब्ध होना आवश्यक है। इससे विद्यार्थियों को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी और विश्वविद्यालयों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।









