
20 प्रतिशत मत्स्य उत्पादन के स्थानीय विक्रय की दर में 20 रुपये प्रति किलो की वृद्धि
मछुआरा समितियों, समूहों और डुबान क्षेत्र के परिवारों को मिलेगा बेहतर मूल्य
धमतरी, 3 अक्टूबर 2026। सेवा संकल्प अभियान अभियान अंतर्गत धमतरी जिले में मछुआरा समुदाय, मत्स्य समितियों, समूहों एवं मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने की दिशा में जिला पंचायत ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ग्रामीण तालाबों से आखेटित मछलियों में से स्थानीय उपभोक्ताओं को स्थानीय बाजारों में विक्रय की जाने वाली निर्धारित 20 प्रतिशत मछलियों की विक्रय दर में वृद्धि की गई है। अब यह मछली 120 रुपये प्रति किलोग्राम के स्थान पर 140 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय की जाएगी। संशोधित दर 3 अक्टूबर 2026 से प्रभावशील हो गई है।
जिला पंचायत धमतरी की अधीनस्थ कृषि स्थायी समिति की 28 सितंबर 2026 को आयोजित बैठक में प्रस्ताव को अनुमोदित किया गया था। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 को आयोजित जिला पंचायत की सामान्य सभा में अंतिम अनुमोदन प्रदान किया गया। इसके परिपालन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा द्वारा संशोधित विक्रय दर लागू करने संबंधी आदेश जारी कर दिया गया है।
स्थानीय उत्पादन को मिलेगा बेहतर बाजार, मछुआरों की आय बढ़ाने में मदद
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि स्थानीय बाजार में मछली की निर्धारित मात्रा के विक्रय की दर बढ़ाने का सीधा लाभ मछुआरा समुदाय को मिलेगा। उन्होंने कहा कि धमतरी जिले में बड़ी संख्या में धीवर समाज के परिवार मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हैं। जिले के डुबान क्षेत्र में भी अनेक परिवारों की आजीविका मछली आखेट और मत्स्य पालन पर निर्भर है। ऐसे में मछली के बेहतर मूल्य से उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मछुआरा समुदाय की आजीविका को मजबूत करने के लिए गंगरेल क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। पहले जहां गंगरेल में मत्स्य व्यवसाय के लिए टेंडर व्यवस्था अपनाई जाती थी, वहीं अब सीधे मछुआरा समितियों के माध्यम से व्यवस्था की जा रही है, जिससे लगभग चार से पांच हजार परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जोड़ने का कार्य भी किया जा रहा है।
कलेक्टर ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में तालाब हैं तथा खेतों में आजीविका डबरी भी तैयार की जा रही हैं। इन प्रयासों से मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और इसका लाभ धीवर समाज सहित मत्स्य व्यवसाय से जुड़े परिवारों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर उत्पादन और स्थानीय बाजार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने से जिले के मत्स्य क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
डुबान क्षेत्र के परिवारों की आजीविका को मिलेगा संबल
धमतरी जिले के डुबान क्षेत्र में रहने वाले अनेक परिवार पीढ़ियों से जल संसाधनों से जुड़ी गतिविधियों और मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर हैं। मत्स्य आखेट, मछली की छंटाई, परिवहन, स्थानीय विक्रय तथा इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों के माध्यम से इन परिवारों को रोजगार मिलता है। विक्रय दर में वृद्धि से इस पूरी स्थानीय आर्थिक श्रृंखला को लाभ मिलने की उम्मीद है।
जिले में मछुआरा समुदाय की आजीविका को मजबूत करने के लिए मत्स्य उत्पादन के साथ-साथ विपणन व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय बाजार में उत्पादित मछली को बेहतर मूल्य मिलने से मछुआरा समितियों और समूहों के लिए आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ने की संभावना है।
टेंडर से स्थानीय बाजार तक व्यवस्था में बदलाव
ग्रामीण तालाबों से प्राप्त मत्स्य उत्पादन के विक्रय एवं प्रबंधन के लिए पूर्व में निर्धारित प्रक्रिया के तहत टेंडर व्यवस्था प्रमुख रूप से अपनाई जाती रही है। अब स्थानीय उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित 20 प्रतिशत मत्स्य उत्पादन को स्थानीय बाजार में विक्रय की व्यवस्था से स्थानीय मांग और स्थानीय उत्पादन के बीच सीधा संबंध मजबूत होगा।
इस व्यवस्था से एक ओर स्थानीय उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र में उत्पादित ताजा मछली उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर मत्स्य समितियों, समूहों और मछुआरों को स्थानीय मांग के अनुरूप अपने उत्पाद के बेहतर मूल्य का अवसर मिलेगा।
उत्पादन से विपणन तक मजबूत होगी मूल्य श्रृंखला
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा ने बताया कि जिला पंचायत द्वारा संशोधित विक्रय दर संबंधी आदेश जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि निर्धारित 20 प्रतिशत मत्स्य उत्पादन को स्थानीय बाजार में विक्रय करने की व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को स्थानीय मांग से जोड़ना और मत्स्य समितियों एवं मछुआरों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि संशोधित दर के प्रभावी होने से मत्स्य समितियों, समूहों और मत्स्य पालकों को अपने उत्पाद का बेहतर स्थानीय मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, स्थानीय बाजार में ताजा मछली की उपलब्धता बढ़ने से उपभोक्ताओं को भी लाभ होगा। जिला पंचायत द्वारा संबंधित समितियों, समूहों एवं मत्स्य पालकों को निर्धारित प्रक्रिया और प्रावधानों के अनुरूप विक्रय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिला पंचायत का यह निर्णय मछुआरा समुदाय की आय बढ़ाने, डुबान क्षेत्र के परिवारों की आजीविका को संबल देने तथा उत्पादन से स्थानीय बाजार तक मत्स्य क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।









