
अम्बिकापुर 03 अक्टूबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के तहत पात्र परिवारों तक शासन की स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में आयुष्मान भारत योजना महत्वपूर्ण सहारा बन रही है। लखनपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत लोसंगी निवासी श्रीमती धर्मवती के परिवार तक भी योजना का लाभ पहुंचा है। उनके बेटे राहुल के नाम से आयुष्मान कार्ड बनने के बाद परिवार को जरूरत के समय निःशुल्क उपचार की सुविधा का भरोसा मिला है।
कार्ड नहीं होने से इलाज के समय होती थी परेशानी
धर्मवती बताती हैं कि पहले परिवार के पास आयुष्मान कार्ड नहीं होने के कारण बीमारी की स्थिति में इलाज के खर्च की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ती थी। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच अचानक आने वाला उपचार का खर्च परिवार के लिए परेशानी का कारण बनता था। अब आयुष्मान कार्ड बनने से यह चिंता काफी हद तक कम हुई है।
योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। धर्मवती के परिवार के लिए यह सुविधा बीमारी के समय आर्थिक सुरक्षा का आधार बनेगी।
“अब इलाज के लिए ज्यादा पैसे की चिंता नहीं रहेगी”
आयुष्मान कार्ड बनने पर खुशी जाहिर करते हुए श्रीमती धर्मवती ने कहा, “पहले कार्ड नहीं था तो हम लोगों को बहुत दिक्कत होती थी। अब कार्ड बन गया है तो पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त मिलेगा। कार्ड मेरे बेटे राहुल के नाम से बना है। हम बहुत खुश हैं। बीमारी में अब ज्यादा पैसा नहीं लगेगा।”
उन्होंने योजना का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
गांव तक पहुंच रही स्वास्थ्य सुरक्षा
ग्रामीण परिवारों के लिए बीमारी के समय उपचार के साथ आर्थिक व्यवस्था भी बड़ी चुनौती होती है। आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पात्र परिवारों को इस चिंता से राहत दिलाते हुए उन्हें स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिविरों एवं अन्य माध्यमों से पात्र हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं।
लोसंगी की धर्मवती के परिवार तक आयुष्मान योजना की पहुंच इसी प्रयास की एक तस्वीर है। उनके बेटे राहुल के नाम से बना आयुष्मान कार्ड अब परिवार के लिए जरूरत के समय बेहतर उपचार और आर्थिक सुरक्षा का भरोसा बन गया है।
महतारी वंदन की राशि से हरियालो संभाल रहीं घर की छोटी-छोटी जरूरतें
हर माह मिल रहे एक हजार रुपए, घरेलू सामान से लेकर बच्चों की पढ़ाई और कपड़ों के खर्च में मिल रही मदद
अम्बिकापुर 03 अक्टूबर 2026 / परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों में होने वाले छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने में नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए उपयोगी साबित हो रही है। महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली राशि से महिलाएं अपनी आवश्यकता के अनुसार घरेलू सामान, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्च पूरे कर रही हैं। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मुटकी की श्रीमती हरियालो भी योजना से प्रतिमाह मिलने वाले एक हजार रुपए का उपयोग परिवार की आवश्यकताओं में कर रही हैं।
श्रीमती हरियालो बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर महीने एक हजार रुपए मिलते हैं। इस राशि से कभी घर के लिए हल्दी-मसाले जैसी सामग्री खरीदती हैं तो कभी बच्चों की पढ़ाई और कपड़ों से संबंधित जरूरतों को पूरा करती हैं। हर माह मिलने वाली सहायता से इन छोटे लेकिन जरूरी खर्चों के लिए उन्हें आर्थिक सहारा मिल रहा है।
बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर जरूरतें हो रही पुरी
हरियालो बताती हैं, महतारी वंदन योजना का हर महीने एक हजार रुपए मिलता है, घर का सामान हल्दी, तेल,मसाला और बच्चों का पढ़ाई-लिखाई में खर्चा करते हैं।
हरियालो के अनुभव में महतारी वंदन योजना की सहायता राशि सीधे परिवार की रोजमर्रा की आवश्यकताओं से जुड़ रही है। सहायता राशि मिलने पर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया, उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से हर महीने आर्थिक सहायता मिल रही है।
अम्बिकापुर 03 अक्टूबर 2026/ सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गांव में मेहनत करने वाले हाथों को जब सही संसाधन और अवसर मिल जाएं, तो आत्मनिर्भरता की राह आसान हो जाती है। विकासखंड लखनपुर के ग्राम पंचायत बगदर्री निवासी श्री शिवबालक के लिए ग्रामीण रोजगार योजना से निर्मित डबरी ऐसी ही नई उम्मीद लेकर आई है। कभी खेती-किसानी पर निर्भर रहने वाले शिवबालक अब इसी डबरी में मछली पालन कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं और अपने परिवार की आजीविका को मजबूत बना रहे हैं।
श्री शिवबालक बताते हैं कि ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से उन्होंने अपने गांव में डबरी का निर्माण कराया। इस डबरी को उन्होंने केवल पानी के संग्रहण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी आजीविका का साधन बनाया। वर्तमान में वे इसमें कतला, रोहू, मिर्गल और ग्रास कार्प जैसी मछलियों का पालन कर रहे हैं। मछली पालन से उन्हें नियमित रूप से आमदनी का अवसर मिल रहा है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं।”
शिवबालक के अनुसार अब तक वे डबरी से लगभग दो क्विंटल मछली बेच चुके हैं, जिससे उन्हें करीब 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी हुई है। वे बताते हैं कि पारंपरिक रूप से केवल धान की खेती करने से अपेक्षित आमदनी नहीं हो पाती थी, जबकि मछली पालन से उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिल रहा है। इससे उनकी आय के स्रोत में विविधता आई है और खेती के साथ एक अतिरिक्त आजीविका का साधन भी विकसित हुआ है।
उनकी मेहनत की एक खास बात यह भी है कि डबरी का पानी केवल मछली पालन के काम नहीं आ रहा, बल्कि गर्मी के मौसम में इसी पानी का उपयोग सब्जी की खेती के लिए भी किया जा रहा है। इस तरह एक ही संसाधन से मछली पालन और सब्जी उत्पादन को जोड़कर शिवबालक अपनी आजीविका को और मजबूत कर रहे हैं।
श्री शिवबालक की कहानी बताती है कि ग्रामीण रोजगार योजना के तहत निर्मित परिसंपत्तियां केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उपयोग स्थायी आजीविका और आय के साधन के रूप में भी किया जा सकता है। डबरी के रूप में मिले संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए शिवबालक ने मछली पालन को अपनी आय का माध्यम बनाया और इसके साथ सब्जी उत्पादन को जोड़कर उपलब्ध जल संसाधन का भी सदुपयोग किया है।
आज शिवबालक के लिए यह डबरी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि मेहनत से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों का आधार बन गई है। मछली पालन से हुई आमदनी और सब्जी उत्पादन की संभावना ने उनके परिवार की आजीविका को एक नया सहारा दिया है। सेवा संकल्प अभियान के तहत शिवबालक की यह कहानी इस बात की मिसाल है कि गांव में उपलब्ध संसाधनों और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर ग्रामीण परिवार अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ सकते हैं।









