
अम्बिकापुर 07 अक्टूबर 2026/ क्षेत्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केन्द्र, सरगुजा, अंबिकापुर में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR), हैदराबाद एवं राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के सहयोग से जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMC) के सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम एवं स्थानीय स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत उपयोग के साथ-साथ जैव संसाधनों से जुड़े स्थानीय समुदायों की भूमिका, अधिकारों एवं दायित्वों की व्यवहारिक और संस्थागत जानकारी प्रदान करना था।
इस कार्यशाला में सरगुजा जिले की 07 जनपद पंचायतों के 65 ग्राम पंचायत सचिवों एवं जैव विविधता प्रबंधन समिति के सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यशाला का शुभारंभ श्री अमिताभ बाजपेयी, सदस्य सचिव, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड, श्री विपुल अग्रवाल, वनमंडलाधिकारी, सूरजपुर, श्री कुणाल मिश्रा, अनुविभागीय वन अधिकारी तथा श्री आर.के. खुंटे संयुक्त आयुक्त एवं प्राचार्य क्षेत्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केन्द्र, सरगुजा, अंबिकापुर की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।
जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. सुरजीत विक्रमन, एसोसिएट प्रोफेसर, NIRDPR, हैदराबाद, वैज्ञानिक डॉ. नीतू हरमुख, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड, अरण्य भवन, रायपुर, विशेषज्ञ श्रीमती अनुभा उपाध्याय द्विवेदी, छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड, रायपुर तथा श्री राकेश साहू, राज्य सलाहकार, NIRDPR/SIRD छत्तीसगढ़ ने प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर जानकारी एवं मार्गदर्शन दिया।
प्रशिक्षण में जैव विविधता शासन की अवधारणा और स्थानीय स्तर पर इसकी आवश्यकता, जैव विविधता संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका तथा जैव विविधता प्रबंधन समितियों के दायित्वों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को जैव विविधता अधिनियम, 2002 तथा वर्ष 2023 में किए गए संशोधनों के प्रमुख प्रावधानों एवं स्थानीय स्तर पर उनके प्रभाव की जानकारी दी गई।कार्यशाला में जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC), छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड (SBB) एवं राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की संस्थागत संरचना, दायित्वों और स्थानीय शासन के साथ समन्वय की प्रक्रिया को समझाया गया। ग्राम पंचायत स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण और प्रबंधन में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
जन जैव विविधता अभिलेख तैयार करने की दी गई जानकारी
प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण विषय जन जैव विविधता अभिलेख (People’s Biodiversity Register-PBR) रहा। प्रतिभागियों को PBR तैयार करने की प्रक्रिया, स्थानीय जैव संसाधनों एवं पारंपरिक ज्ञान से संबंधित आवश्यक जानकारी के संकलन, उसके दस्तावेजीकरण तथा अभिलेख को व्यवस्थित एवं उपयोगी रूप में तैयार करने के व्यावहारिक चरणों की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही अभिगम एवं लाभ-साझेदारी (Access and Benefit Sharing-ABS) की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। स्थानीय समुदायों के अधिकारों, जैव संसाधनों के उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं तथा जैव विविधता शासन में समुदाय की भागीदारी और लाभ-साझेदारी के महत्व को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
प्रशिक्षण में मानव कल्याण के लिए जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग तथा स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया। स्थानीय जैव संसाधनों के संरक्षण के साथ उनके विवेकपूर्ण एवं सतत उपयोग के माध्यम से समुदायों के जीवन और आजीविका को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
वहीं, जैव विविधता प्रबंधन समितियों के कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SOP) की जानकारी दी गई, ताकि ग्राम एवं स्थानीय स्तर पर जैव विविधता संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सके।कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुतिकरण, प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक चर्चा तथा व्यावहारिक जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों ने स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण, जन जैव विविधता अभिलेख तैयार करने और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की प्रभावी भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
कार्यशाला का मुख्य संदेश रहा कि स्थानीय स्तर पर जैव विविधता का प्रभावी संरक्षण तभी संभव है, जब स्थानीय समुदाय, ग्राम पंचायत, जैव विविधता प्रबंधन समिति और संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें। इस दिशा में जैव विविधता प्रबंधन समितियों के सदस्यों एवं ग्राम पंचायत सचिवों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
समाचार क्रमांक 112/2026/विशाल
अम्बिकापुर 07 अक्टूबर 2026/ राराष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत जिला सरगुजा में विभिन्न संवर्गों के 60 संविदा पदों पर भर्ती के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद प्राथमिक सूची जारी कर दी गई है। इन पदों के लिए निर्धारित अंतिम तिथि 08 सितंबर 2026 तक कुल 1513 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अभ्यर्थियों को जारी प्राथमिक सूची के संबंध में दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर 16 अक्टूबर 2026 तक दिया गया है।
जारी सूची में अभ्यर्थी यदि किसी प्रकार की त्रुटि, आपत्ति अथवा पात्रता संबंधी तथ्य प्रस्तुत करना चाहते हैं, तो वे निर्धारित अवधि में दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त होने वाली आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।
लिखित एवं कौशल परीक्षा के लिए निर्धारित अनुपात
भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने के लिए लिखित/कौशल परीक्षा हेतु अभ्यर्थियों का चयन निर्धारित अनुपात के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक एक पद के विरुद्ध अधिकतम 10 पात्र अभ्यर्थियों को ही लिखित/कौशल परीक्षा के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
शासकीय अनुभव को ही माना जाएगा मान्य
भर्ती प्रक्रिया में अनुभव संबंधी महत्वपूर्ण प्रावधान भी निर्धारित किए गए हैं। अनुभव प्रमाण-पत्र के रूप में केवल मान्यता प्राप्त शासकीय संस्थाओं में संबंधित पद पर किए गए वेतनिक कार्य का अनुभव ही स्वीकार्य होगा। निजी संस्थाओं, अवैतनिक कार्य अथवा मानदेय रहित कार्यों के अनुभव को मान्य नहीं किया जाएगा। अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यता का परीक्षण भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।
भर्ती से संबंधित विस्तृत चयन सूची, भर्ती नियम, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया एवं अद्यतन जानकारी जिला सरगुजा की आधिकारिक वेबसाइट www.surguja.gov.in पर उपलब्ध है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे भर्ती प्रक्रिया से संबंधित आगामी सूचनाओं के लिए आधिकारिक वेबसाइट का नियमित रूप से अवलोकन करते रहें।









