
4 अक्टूबर को हुए पहले दौर के चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो 47.03 प्रतिशत वोट के साथ पहले स्थान पर रहे थे, जबकि लूला दा सिल्वा को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन दूसरे दौर में लूला ने यह अंतर खत्म करते हुए जीत दर्ज की ब्राजील के चुनावी अधिकारियों के मुताबिक, मतगणना के दौरान लूला दा सिल्वा को 51.75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.25 प्रतिशत वोट हासिल हुए.
यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि पहले दौर की मतगणना में लूला अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे चल रहे थे. इसके बाद उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में बदलाव किया और युवा मतदाताओं तक पहुंचने पर जोर दिया. उन्होंने कई रैलियां कीं और समर्थकों के साथ सोशल मीडिया पर भी सक्रियता बढ़ाई.
2002 में पहली बार बने थे राष्ट्रपति
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार लूला दा सिल्वा ने 1989 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें जीत के लिए 2002 तक इंतजार करना पड़ा. उस साल वह पहली बार ब्राजील के राष्ट्रपति चुने गए. इसके बाद 2006 में उन्होंने दूसरी बार चुनाव जीता और लगातार दूसरा कार्यकाल हासिल किया.
2010 और 2014 में वह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार नहीं थे. उस दौरान उनकी पार्टी की दिलमा रूसेफ राष्ट्रपति बनीं. इसके बाद 2022 के चुनाव में लूला ने वापसी की और तीसरी बार राष्ट्रपति चुने गए. अब 2026 में जीत के साथ उन्होंने चौथा राष्ट्रपति कार्यकाल हासिल किया है.
जेल में बिताए 580 दिन, फिर की सत्ता में वापसी
लूला का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. 2022 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने से पहले उन्होंने करीब 580 दिन जेल में बिताए थे. बाद में उनके खिलाफ मामलों में कानूनी घटनाक्रम बदला और वह चुनावी राजनीति में लौटे.
लूला ने अपने राजनीतिक जीवन में गरीबी कम करने, सामाजिक कल्याण योजनाओं और मजदूरों के अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बनाया है. उनके समर्थकों ने चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के कार्यकाल और उनकी नीतियों की आलोचना को भी प्रमुखता दी.
5 जनवरी 2027 से शुरू होगा नया कार्यकाल
लूला दा सिल्वा का चौथा राष्ट्रपति कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होने वाला है. उनकी जीत के बाद ब्राजील में मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व जारी रहेगा, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो की हार से उनके राजनीतिक खेमे को झटका लगा है.









