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लता मंगेशकर के दौर में बनाई पहचान, फिर बॉलीवुड से बनाई दूरी… जानिए अनुराधा पौडवाल की कहानी

Anuradha Paudwal Birthday Special: बॉलीवुड में एक समय ऐसा था, जब अनुराधा पौडवाल की आवाज हर तरफ सुनाई देती थी. ‘धक धक करने लगा’, ‘बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम’ और ‘नजर के सामने जिगर के पास’ जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया था. करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था, लेकिन फिर उन्होंने फिल्मी गानों से दूरी बनानी शुरू कर दी और भक्ति संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. हैरानी की बात यह है कि जिस भक्ति संगीत ने उन्हें घर-घर में मशहूर किया, उसे अपनाने की बात सुनकर वह कभी रो पड़ी थीं.

27 अक्टूबर को अनुराधा पौडवाल के जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी के ऐसे किस्से, जो उनकी कामयाबी के साथ-साथ उनके फैसलों के पीछे की कहानी भी बताते हैं.

लता मंगेशकर को सुनकर करती थीं घंटों रियाज

अनुराधा पौडवाल ने गायकी में अपनी पहचान बनाने के लिए लता मंगेशकर को अपना आदर्श माना. स्टार्सअनफोल्डेड पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, उन्होंने शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग लेने की कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें सहज नहीं हो पाईं. इसके बाद उन्होंने लता मंगेशकर को सुन-सुनकर घंटों रियाज किया.

अनुराधा पौडवाल ने बताया था कि बचपन से ही उनकी आवाज थोड़ी भारी थी. जब वह चौथी कक्षा में पढ़ती थीं, तभी उनके मन में लता मंगेशकर को सामने बैठकर गाते हुए सुनने की इच्छा हुई. लता जी के गानों से उनका लगाव धीरे-धीरे बढ़ता गया और आगे चलकर यही उनके संगीत सफर की प्रेरणा बना.

शुरुआत में ही कह दिया गया था- तुम बड़ी सिंगर नहीं बन पाओगी

1980 के दशक में हिंदी फिल्मों के गानों पर लता मंगेशकर और आशा भोसले की आवाज का जादू छाया हुआ था. ऐसे में अनुराधा पौडवाल के लिए अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था. करियर की शुरुआत में अनुराधा को यह सुनने को मिला था कि लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी बड़ी गायिकाओं के रहते वह ज्यादा आगे नहीं बढ़ पाएंगी.

लेकिन अनुराधा ने इन बातों को खुद पर हावी नहीं होने दिया. उन्होंने गाना जारी रखा और धीरे-धीरे उनकी आवाज भी लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगी. आगे चलकर वह हिंदी फिल्म संगीत की चर्चित गायिकाओं में शामिल हो गईं. जिस करियर में आगे बढ़ने को लेकर शुरुआत में सवाल उठाए गए थे, उसी में अनुराधा ने अपनी अलग पहचान बना ली.

भक्ति संगीत की भविष्यवाणी सुनकर क्यों रो पड़ी थीं अनुराधा?

अनुराधा पौडवाल की जिंदगी में एक ऐसा वक्त भी आया, जब भक्ति संगीत को लेकर कही गई एक बात सुनकर वह रो पड़ी थीं. बॉलीवुडशादिस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में एक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि करीब 1981 में एक ज्योतिषी ने उनसे कहा था कि वह भक्ति संगीत की दुनिया में बड़ा बदलाव लाएंगी.

यह सुनकर अनुराधा रो पड़ी थीं. वजह उस समय वह हिंदी फिल्मों में गाने गाकर बड़ी गायिका बनना चाहती थीं. ऐसे में भक्ति गीतों में नाम कमाने की बात उनके लिए बिल्कुल नई थी. वह फिल्मों में अपनी पहचान बनाने का सपना देख रही थीं, जबकि ज्योतिषी की बात उन्हें एक अलग रास्ते की ओर इशारा कर रही थी.

हालांकि, आगे चलकर अनुराधा पौडवाल ने भक्ति संगीत में भी खूब नाम कमाया. उनके भजन घर-घर में सुने जाने लगे और इस क्षेत्र में भी उनकी अलग पहचान बन गई. जिस बात को सुनकर वह कभी रो पड़ी थीं, आगे चलकर वही उनके करियर का अहम हिस्सा बन गई.

करियर के शिखर पर ही फिल्मी गानों से क्यों बनाई दूरी?

अनुराधा पौडवाल का फिल्मी करियर सफल रहा, लेकिन एक समय के बाद उन्होंने फिल्मों में गाना कम कर दिया और भक्ति संगीत पर ध्यान देने लगीं. उन्होंने कहा था कि करियर के शिखर पर रहते हुए रिटायर होना बेहतर है, क्योंकि बहुत लंबे समय तक टिके रहने पर एक वक्त ऐसा भी आ सकता है, जब लोग खुद आपको किनारे कर दें.

उनका यह फैसला इसलिए भी खास था, क्योंकि वह उस समय फिल्मी संगीत में अपनी पहचान बना चुकी थीं. इसके बावजूद उन्होंने एक अलग रास्ता चुना. उन्होंने भक्ति संगीत को अपनी प्राथमिकता बनाया और इसी क्षेत्र में भी बड़ी लोकप्रियता हासिल की.

अनुराधा पौडवाल के इन भजनों ने घर-घर में बनाई पहचान

अनुराधा पौडवाल ने माता रानी, भगवान शिव, गणेश जी और भगवान विष्णु की भक्ति में कई लोकप्रिय भजन गाए हैं. उनके भजनों में ‘मैं बालक तू माता शेरांवालीये’, ‘मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा’, ‘जय गणेश देवा’, ‘शिव अमृतवाणी’ और ‘श्री दुर्गा अमृतवाणी’ जैसे नाम शामिल हैं. उन्होंने ‘जय अम्बे गौरी’ और ‘ॐ जय जगदीश हरे’ जैसी आरतियों को भी अपनी आवाज दी है. टी-सीरीज भक्ति सागर पर उनके भजनों का बड़ा संग्रह मौजूद है.

किशोर कुमार के अमेरिका दौरे से भी जुड़ा है उनका नाम

अनुराधा पौडवाल के शुरुआती संगीत सफर का एक कम चर्चित किस्सा किशोर कुमार से भी जुड़ा है. साथई मैगजीन में प्रकाशित एक संस्मरण के मुताबिक, अनुराधा अपने पति और संगीतकार अरुण पौडवाल के साथ 1978 में किशोर कुमार के अमेरिका कॉन्सर्ट टूर पर गई थीं.

यह किस्सा उनके करियर के शुरुआती दौर की झलक देता है. उस समय भारतीय कलाकारों के विदेशी लाइव कार्यक्रम संगीत की दुनिया में खास महत्व रखते थे. अनुराधा के सफर का यह पहलू उनके फिल्मी गानों और भक्ति संगीत से अलग एक और अनुभव सामने लाता है.

कन्नड़ में और गाने गाना चाहती थीं अनुराधा

अनुराधा पौडवाल की संगीत में दिलचस्पी केवल हिंदी गानों तक सीमित नहीं रही. उन्होंने कन्नड़ भाषा में और गाने गाने की इच्छा भी जाहिर की थी. वह मैसूर दशहरा में लाइव प्रस्तुति दे चुकी हैं. इससे पता चलता है कि अलग-अलग भाषाओं और संगीत की शैलियों को लेकर भी उनकी रुचि रही है.

आज भी अधूरी है यह ख्वाहिश

अनुराधा पौडवाल ने अपने करियर में फिल्मी गानों से लेकर भक्ति संगीत तक कई पड़ाव देखे हैं. लेकिन उनकी कुछ इच्छाएं अब भी बाकी हैं. स्टार्सअनफोल्डेड पर प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, उन्होंने कविता और आदि शंकराचार्य की रचनाओं को रिकॉर्ड करने की इच्छा जताई थी.

अनुराधा पौडवाल की कहानी सिर्फ एक सफल गायिका बनने की नहीं है, बल्कि अपने लिए एक अलग रास्ता चुनने की भी है. उन्होंने हिंदी फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा और फिर भक्ति संगीत की ओर रुख कर वहां भी अपनी खास पहचान बनाई. उनके भजन आज भी लोगों के घरों और मंदिरों में सुनाई देते हैं. फिल्मी गानों से लेकर भक्ति संगीत तक का उनका सफर बताता है कि संगीत की दुनिया में पहचान बनाने के कई रास्ते हो सकते हैं.

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