
Chirag Paswan Political Strategy शिक्षक-ग्रेजुएट एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद एनडीए के भीतर सियासी खींचतान बढ़ती दिख रही है. चुनाव में जीत दर्ज करने के तुरंत बाद दो निर्दलीय एमएलसी बंशीधर ब्रासवासी और राहुल राज के भाजपा की सदस्यता लेने की खबर सामने आयी. इसको लेकर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दोनों निर्दलीय एमएलसी के साथ-साथ भाजपा पर भी सवाल खड़े कर दिये हैं.
हालांकि, यह पहला मौका नहीं है, जब चिराग पासवान ने एनडीए में रहते हुए गठबंधन की राजनीतिक लाइन से अलग अपना रुख जाहिर किया है। इससे पहले भी वह कई मौकों पर अपनी ही सरकार के कामकाज और नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं. जमुई में नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने यहां तक कहा था कि उन्हें शर्म आती है कि वह ऐसी सरकार का हिस्सा हैं. उनके इस बयान के बाद सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था.
इसी तरह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान भी चिराग पासवान ने एनडीए की राजनीतिक लाइन से अलग अपना रुख जाहिर किया था. राजनीतिक जानकार उनके ऐसे बयानों को प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर देखते हैं. उनका मानना है कि चिराग गठबंधन में रहते हुए अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाए रखने के साथ-साथ सहयोगी दलों पर दबाव भी बनाते हैं.
हालांकि, चिराग पासवान इस तरह की राजनीतिक रणनीति की बात को खारिज करते रहे हैं. उनका कहना है कि गठबंधन में रहने का मतलब यह नहीं है कि वह अपनी बात नहीं रख सकते। इसी क्रम में उनका एक बयान काफी चर्चा में रहा था- ‘गठबंधन में हूं, लेकिन रीढ़विहीन नहीं हूं.’
चिराग पासवान ने कहा कि सच को सच कहना ही पड़ता है. वह कोई भी बात कहते समय यह नहीं सोचते कि उनके बयान से किसे फायदा होगा और किसे नुकसान. उनकी सीधी जिम्मेदारी जनता के प्रति है. वह जनता के हित को ध्यान में रखकर ही काम करते हैं और अपनी बात रखते हैं.
क्यों हो रही है चर्चा?
एमएलसी चुनाव में जीत दर्ज करने वाले दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों को लेकर चिराग पासवान ने गठबंधन धर्म का सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के उम्मीदवार को हराकर दोनों निर्दलीय एमएलसी चुनाव जीते हैं, उसी के गठबंधन वाली पार्टी में शामिल होना कहां तक उचित है? चिराग ने भाजपा से भी सवाल किया कि आखिर गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार को हराकर जीतने वाले नेताओं को अपनी पार्टी में जगह कैसे दी जा सकती है? उन्होंने इसे गठबंधन धर्म का अपमान बताया है.
इस मुद्दे पर जदयू ने भी भाजपा के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है. जदयू नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि दोनों निर्दलीय एमएलसी ने चुनाव में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवारों को हराकर जीत दर्ज की थी. ऐसे में उन्हें भाजपा में कैसे शामिल किया जा सकता है? यह गठबंधन धर्म का उल्लंघन है.
हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद दोनों निर्दलीय एमएलसी अपने पहले के रुख से पीछे हटते नजर आए. दोनों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण नहीं की है, बल्कि पार्टी को बाहर से समर्थन दिया है.
मुझे खुद शर्म आती है कि मैं ऐसी सरकार का हिस्सा हूं
चिराग पासवान इससे पहले भी कई मौकों पर एनडीए की तय राजनीतिक लाइन से अलग बयान देकर चर्चा में रहे हैं. जमुई में एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ की घटना पर उन्होंने कहा था, ‘मुझे खुद शर्म आती है कि मैं ऐसी सरकार का हिस्सा हूं.’ इस दौरान उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे. चिराग ने कहा था कि अगर अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ नहीं होगा, तो कानून-व्यवस्था का क्या मतलब रह जाएगा? उनका यह बयान ऐसे समय आया था, जब इस घटना को लेकर सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर थी. चिराग के इस रुख ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं.
CJP के आंदोलन का समर्थन
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में देशभर में चल रहे आंदोलन के दौरान भी चिराग पासवान ने एनडीए में रहते हुए ऐसा बयान दिया था, जिससे गठबंधन के घटक दलों की मुश्किलें बढ़ गयी थीं. उन्होंने स्पष्ट कहा था कि देश के युवाओं की ऊर्जा को रोका नहीं जा सकता। विरोध के तरीकों पर सवाल उठाने के बजाय उनके मुद्दों को समझने की जरूरत है. चिराग ने यह बयान उस समय दिया था, जब CJP का विरोध प्रदर्शन अपने चरम पर था. उस वक्त सरकार और एनडीए के घटक दल मुख्य चुनाव आयुक्त के समर्थन में एकजुट थे. ऐसे माहौल में चिराग का आंदोलन के प्रति सकारात्मक रुख सरकार और गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला था.
भरत तिवारी एनकाउंटर पर भी उठाये थे सवाल
ऐसा ही रुख चिराग पासवान ने भरत तिवारी एनकाउंटर के मामले में भी अपनाया था. वह भरत तिवारी के गांव बिलौटी पहुंचे थे और उनके परिजनों से मुलाकात कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाये थे. 17 जून को बिहार पुलिस ने भरत तिवारी को एनकाउंटर में मार गिराया था. हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर परिजनों और आसपास के लोगों ने सवाल उठाये थे. उनका आरोप था कि भरत तिवारी ने पिस्तौल फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी. बताया गया था कि मारे जाने से पहले भरत तिवारी फेसबुक लाइव कर रहे थे.
इस मामले पर चिराग पासवान ने कहा था कि भरत तिवारी को जिस तरीके से मारा गया, उससे स्पष्ट है कि कुछ गलत हुआ है. उनकी पहली प्राथमिकता पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है. परिवार के लोगों ने जो बातें बतायी हैं, उन्हें वह उचित मंच तक पहुंचाने का काम करेंगे. उन्होंने यह भी कहा था कि वह और उनकी पार्टी पूरी मजबूती के साथ पीड़ित परिजनों के साथ खड़े हैं.
चिराग पासवान भरत तिवारी के परिजनों से मिलने उस समय पहुंचे थे, जब इस एनकाउंटर को लेकर बिहार में धरना-प्रदर्शन हो रहे थे. इस मामले में सरकार और एनडीए के अन्य घटक दलों का रुख सरकार के समर्थन में था. लेकिन चिराग ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाकर एक बार फिर गठबंधन की आधिकारिक लाइन से अलग अपना पक्ष रखा था.
प्रेशर पॉलिटिक्स के आरोपों को चिराग ने किया खारिज
ऐसे बयानों को लेकर चिराग पासवान पर अक्सर प्रेशर पॉलिटिक्स करने के आरोप लगते रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन में अपनी राजनीतिक हैसियत और दबदबा बनाये रखने के लिए चिराग समय-समय पर अपनी अलग राय रखते हैं. हालांकि, चिराग पासवान इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं.
उनका कहना है कि गठबंधन में रहने का मतलब यह नहीं है कि गलत को भी सही कहा जाए. चिराग के शब्दों में, ‘गठबंधन में हूं, लेकिन रीढ़विहीन नहीं हूं.’ वह कहते हैं कि वही करते हैं, जो उन्हें और मेरी आत्मा को सही लगता है. उनकी जिम्मेदारी गठबंधन से ज्यादा जनता के प्रति है.






