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जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रक्रिया सरलीकृत, आम जनता से त्वरित पंजीयन करवाने की अपील

जगदलपुर  21 मार्च 2025/  प्रदेश में जन्म-मृत्यु पंजीयन प्रक्रिया को वर्तमान में सरलीकृत किया गया है। जिसके तहत जन्म मृत्यु की घटना जहां जिस जगह पर होती है वहां के पंजीयक संस्था यथा ग्राम पंचायत सचिव, शासकीय स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी, स्थानीय नगरीय निकाय के प्रभारी द्वारा उक्त पंजीयन संबंधी प्रक्रिया संपादित की जाती है। इसे मद्देनजर रखते हुए जनसाधारण को जन्म-मृत्यु का पंजीयन त्वरित रूप से अर्थात तीन सप्ताह के भीतर अनिवार्यतः करवाना चाहिए। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लागू जन्म-मृत्यु पंजीयन अधिनियम 1969 एवं जन्म-मृत्यु पंजीयन (संशोधन) अधिनियम 2023 पर आधारित जन्म-मृत्यु पंजीयन नियम 2001 के तहत जन्म-मृत्यु पंजीयन किया जा रहा है। अधिनियम के अंतर्गत जन्म मृत्यु पंजीयन को समान एवं अनिवार्य बनाया गया है और पंजीकरण घटना के स्थान पर संबंधित पंजीयक के द्वारा ही किया जाता है। इसके बाद 16 सितम्बर 2014 से पंजीयक जन्म-मृत्यु पंजीयन नियुक्त किया गया है। जन्म मृत्यु पंजीयन अधिनियम के मुख्य प्रावधान जन्म या मृत्यु की घटना के घटित होने के 21 दिन के अंदर घटना का पंजीयन करवाना होता है। जन्म-मृत्यु होने के 21 दिन के अंदर घटना का पंजीयन एवं प्रमाण पत्र की पहली प्रति निशुल्क दी जाती है।

जन्म-मृत्यु पंजीयन का उद्देश्य जन्म प्रमाणपत्र जन्म के स्थान एवं जन्मतिथि का कानूनी प्रमाण है। इसी तरह मृत्यु प्रमाणपत्र की जरूरत पैतृक संपत्ति एवं बीमा राशि का दावा करने के लिए होती है, भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 के तहत इसका महत्व है। साथ ही हर एक स्थान के लिए जन्म और मृत्यु का एक वैधानिक रजिस्टर है। यह सामाजिक-आर्थिक योजना बनाने हेतु जनसांख्यिकीय आंकड़ों, स्वास्थ्य प्रणालियों के विकास और जनसंख्या नियंत्रण का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। 01 अक्टूबर 2023 या उसके बाद जन्म लेने वाले व्यक्ति के लिए जन्मतिथि एवं जन्म स्थान को प्रमाणित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, जन्मतिथि प्रमाण के रूप में आधार, पैन, पासपोर्ट जैसे दस्तावेज हेतु सरकारी व निजी नौकरी के लिए जन्मतिथि सत्यापन हेतु ड्राइविंग लाइसेंस के लिए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने हेतु विवाह पंजीयन हेतु अनिवार्य है।
जन्म-मृत्यु पंजीयन का पंजीयन अधिकार क्षेत्र के अनुसार ग्राम पंचायत, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल सहित निजी अस्पताल और शहरी क्षेत्र में घर पर होने की स्थिति में स्थानीय शहरी निकाय में किया जाता है। किसी जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीयन, घटना जहां घटित हुई हो वहीं पर करना होता है। लाभार्थी के घर के पास वाली पंजीयन इकाई में घटना का पंजीयन करने का कोई भी प्रावधान नहीं है। लाभार्थी खुद प्रमाण पत्र में नाम नहीं जोड़ सकता है। नियमानुसार जहां बच्चे का जन्म हुआ हो उसी पंजीयन केन्द्र में नाम जोडने हेतु आवेदन करना चाहिए।

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