
“मैं उन घरों के मलबे के बीच खड़ा हूं, जहां आज सुबह तक जिंदगी गुलजार थी. आज इन गरीब आदिवासी किसानों की मेहनत की कमाई टूटे हुए छप्परों के नीचे दबी पड़ी है. JCB से उनके घर तोड़ दिए गए. उनके सपने चकनाचूर हो गए, सालों की मेहनत बर्बाद हो गई और वे बेघर हो गए. उनके पास कुछ भी नहीं बचा है. उनके पास जमीन का एक छोटा-सा टुकड़ा ही तो था’’, यह बात शिवराज सिंह चौहान ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कही.
दरअसल, कोसमी गांव में हुई कार्रवाई की जानकारी मिलते ही केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे. उन्होंने पूरे मामले पर नाराजगी जताई. कोसमी गांव उनके संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है. शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए बुधनी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते थे. अब उन्होंने अपने ही क्षेत्र में गरीब आदिवासी परिवारों के घर उजाड़ने की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.
शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?
वन विभाग और जिला प्रशासन ने कुछ महीने पहले भी गांव में ऐसी कार्रवाई करने की कोशिश की थी. तब शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से बात कर आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने को कहा था. इसके बावजूद रविवार (11 अक्टूबर) को कार्रवाई की गई. शिवराज के कार्यालय के मुताबिक, उन्होंने मौके से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया और पूरे मामले की जानकारी देकर अपनी नाराजगी जताई.
शिवराज सिंह चौहान ने हेमंत खंडेलवाल को फोन किया
शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर गरीब परिवारों के घर तोड़े जाने की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव से बात करेंगे. शिवराज ने साफ कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने मामले पर प्रतिक्रिया दी
मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस प्रकरण को शिवराज और मोहन यादव की आपसी खींचतान बताया और आरोप लगाया कि इस चक्कर में गांव के गरीब पिस रहे हैं. कांग्रेस नेता सिंघार ने कोसमी में की गई कार्रवाई का एक वीडियो शेयर करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मोहन-मामा की आपसी खींचतान में उजड़ रहे आदिवासी परिवार.’’ उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र सीहोर के ग्राम कोसमी में बरेला आदिवासी समुदाय के परिवारों की फसलें नष्ट की जा रही हैं और उनके मकान तोड़े जा रहे हैं.






