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फिलहाल बंद हो गया हार्वेस्टिंग का ढोल, सरकार निगम अधिकारियों को कमीशन देने लगे तब होगा सफल  वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी…. खरी….. 

कमीशन का खून ऐसा मुंह में लगा है कि कोई भी अधिकारी तनख्वाह को अपना फोकट का अधिकार समझता है और काम करने के लिये क्लाईंट से अलग से कमीशन यानि रिश्वत लेता है। जिस काम में तसल्लीबख्श कमीशन नहीं वो काम ही नहीं।.

अधिकारियों के इस रवैये से सरकार भी सहमत ही है क्योंकि सरकार भी तो इन अधिकारियों से ही बनती है। सब आपस में मिल बैठकर बांटकर खाते हैं।

यही कारण है कि जनता का जीवन संकट में पड़ता जा रहा है और अधिकारी आराम से चैन की नींद सोते रहे हैं।

जनता पीने के पानी के लिये त्राहि-त्राहि करती है, इनके घरों के अंदर फूल खिलाने के लिये गार्डन में टैंकर पानी देते हैं।

अरबों लिटर पानी

रोक सकते हैं पर रोकते नहीं

जीवन के लिये जरूरी जल की जरूरत समझते हुए सरकार ने वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के महत्व को समझा और इसे बनवाने के लिये प्रयास चालू किये। प्राईवेट काॅम्प्लेक्स में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने की अनिवार्यता कर दी और मकान बनवाने वालों के लिये भी अनिवार्य कर दिया।

निमार्णाधीन मकान को एनओसी देने से पहले ये सुनिश्चित करने का नियम बनाया। इसके लिये मकान मालिक से डिपाॅज़िट कराया जाने लगा।

मजे की बात यह है कि डिपाॅज़िट कराने वाले भयभीत लोग निगम के हत्थे चढ़ना नहीं चाहते। भयभीत इसलिये कि निगम का आदमी आएगा तो बिना कारण पैसे ले जाएगा या नक्शे में नुक्ताचीनी निकालेगा।

इसलिये मकान मालिक अपना डिपाॅज़िट वापस लेने ही नहीं आता।

इस तरह लगभग 14 करोड़ रूप्ये निगम मे जमा हो गये जिसका कोई दावेदार नहीं है।

शायद छोटा-मोटा कमीशन होने से

किसी अफसर की दिलचस्पी नहीं

एक प्रस्ताव ये आया कि जमा रकम का उपयोग घरों में हार्वेस्टिंग के लिये किया जाए लेकिन इस दिशा में कोई कदम नहीं बढ़ाया गया। लगभग 5 साल पहले सरकार ने बिना हार्वेस्टिंग वाले घरों पर जुर्माना लगाने का ऐलान किया जो टांय-टांय फिस्स साबित हुआ।

फिर घर-घर जाकर ये काम करने के लिये टेण्डर मंगवाने का निर्णय लिया गया। कदाचित् इसमें कोई विशेष कमीशन नहीं दिखी होगी तो अधिकारियों की दिलचस्पी भी नहीं दिख रही। या फिर कमीशन के और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट हाथ में हांेगे तो छोटे-मोटे कमीशन को अनदेखा कर दिया होगा।

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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक

मोबा. 9522170700

बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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