

ऋषि कपूर और रीना राॅय में प्रेम था। रीना को ज्योतिषी बताते हैं कि उनकी शादी के चालीस दिन के अंदर उनके पति की मृत्यु हो जाएगी। तब रीना अपने प्रेमी ऋषि से सांठगांठ कर उसको चाहने वाले जितेन्द्र से शादी कर लेती है और कहती है कि चालीस दिनों में जितेन्द्र की मृत्यु के बाद हम शादी कर लेंगे।
तब ऋषि किसी बहाने से जितेन्द्र से दोस्ती करके अपनी प्रेमिका रीना के घर (ससुराल) में जाकर रहने लगता है और जितेन्द्र को अलग-अलग तरीकों से मारने का प्रयास करता है। ताकि ज्योतिषीय भविष्यवाणी के अनुसार जितेन्द्र की मुत्यु हो जाए तो ऋषि और रीना आपस में शादी कर सकें।
लेकिन उनके इन प्रयासों से रीना के मन में पति के प्रति सहानुभूति और प्रेमी के प्रति रोष पैदा होने लगता है और अंत में पति जितेन्द्र की जान बचाने के लिये रीना राय अपने प्रेमी ऋषि कपूर पर गोली चला देती है। यानि एक आदर्श पतिव्रता नारी का चरित्र प्रस्तुत करती है।
दूसरी ओर ऋषिकपूर भी भागते हुए रीना के भाई असरानी से मिलता है और बताता है कि रिश्ते बदल गये हैं और अब रीना मुझसे नफरत करने लगी है। वास्तव में ऋषि कपूर जानबूझ कर रीना के मन में अपने लिये नफरत और उसके पति के लिये प्रेम पैदा करने का रोेल निभाते हैं।
जीवन में पग-पग पर बदलते हैं रिश्ते
1980 के आसपास ऋषि कपूर, जितेन्द्र और रीना राॅय की एक फिल्म आई थी ‘बदलते रिश्ते’। हालांकि इन शब्दों को चरितार्थ करती फिल्में हम जीवन के हर मोड़ पर देखते रहते हैं। हर कोई अपने मतलब से या परिवार की खातिर या समाज के हित के लिये या देशहित के लिये बदल जाता है। इसमें हमेशा बुराई नहीं देखनी चाहिये।
सियासत में रिश्ते बदल जाते हैं अक्सर। मालूम नहीं कैसी सियासत हो रही है। प्रदेश में भाजपा की सरकार से नाराजगी के चलते हड़ताल पर गये लोगों को प्रदेश के दो सासद समर्थन कर रहे हेैं न… न…. ये सांसद कांग्रेस के नहीं हैं।
ये सांसद जो भाजपा की सरकार के खिलाफ खड़े हुए हड़तालियों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं भाजपा के ही हैं। बृजमोहन अग्रवाल और विजय बघेल… । इसे ही कहते हैं शायद ‘बदलते रिश्ते’। वैसे ये एक सधी हुई रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। लोकप्रिय नेता बृजमोहन का हर कदम जनहित में और सधा हुआ ही होता है।
वैसे सही का साथ देना एक अच्छी बात है और जनता का काम करना शासन में आदर्श स्थिति कही जाएगी। कांग्रेस शासन में उपमुख्यमंत्री रहे टीएस सिंहदेव ने अपने एक बयान में कहा है कि हमने काम नहीं किया इसलिये हम हारे हैं।
इतनी साफगोई की उम्मीद सिंहदेव से ही की जा सकती है। छत्तीसगढ़ की सियासत में इतना साफ बोलने वाले नेता दुर्लभ हैं। हालांकि इस गुण के लिये वे अपने साथियों की आंख में किरकिरी भी बने नजर आते हैं कई बार।
ये रिश्ता क्या कहलाता है पाक का बाप हमारा दोस्त
एक बार शायद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने कहा था देशों के संबंध व्यक्तिगत नहीं देशों के फायदे के हिसाब से बदलते हैं। यानि देश का भला होगा तो दोस्ती होगी और देश का नुकसान, तो मंुह मोड़ लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी भला देखकर अमेरिका से पक्की दोस्ती निभाई पर उन नामुरादों को हमारा महत्व समझ नहीं आया तो उछलकूद मचाने लगे। जब मोदी ने कोई तवज्जो नहीं दी तो अपनी पर उतर आए और शेर की तरह आंख दिखाने लगे। पता तब चला जब मोदीजी ने उन्हें सर्कस का शेर बना दिया।
दूसरी ओर जो चीन कभी हमारे दुश्मन का खुलेआम दोस्त हुआ करता था अब हमारा दोस्त बना हुआ है। रूस तो पहले से ही दोस्त था और है। चीन हमेशा पाक का बाप बना हुआ था अब हमारा दोस्त बन गया तो स्वाभाविक ही पाक अनाथ महसूस कर रहा है। सबसे ज्यादा अखरा पाकिस्तान और अमेरिका को।
तो बस यूं ही बदलते हैं रिश्ते…..

जवाहर नागदेव,
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
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‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’








