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धमतरी जिले में धान खरीदी का खुशियों भरा मौसम

किसानों के खेतों से उपार्जन केंद्र तक उम्मीदों की संपन्न यात्रा

लेखराम बताते हैं किसानी जीवन आसान नहीं, पर जब व्यवस्था साथ दे तो राहें सरल हो जाती हैं

धमतरी । खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में इस बार धमतरी जिले के उपार्जन केंद्र किसी उत्सव स्थल से कम नहीं दिख रहे। सुबह-सुबह जैसे ही धान से भरी गाड़ियाँ केंद्रों की ओर बढ़ती हैं, हवा में मिट्टी की सौंधी महक और किसानों के चेहरों पर झलकता विश्वास—दोनों मिलकर एक अलग ही माहौल रच देते हैं। 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी ने जिले में मानो रौनक ला दी है। सुव्यवस्थित प्रबंधन, ऑनलाइन टोकन की सुविधा और समर्थन मूल्य पर खरीद—इन सब ने किसानों को राहत के साथ नई ऊर्जा दी है।

इस मौसम की खास बात यह है कि कृषक उन्नति योजना के तहत 3100 रुपये प्रति क्विंटल का मूल्य मिलने से किसानों की खुशी दोगुनी हो चली है। खेतों में सालभर की मेहनत जब उचित दाम में बदलती है, तो किसान का मन भी फसल जितना ही भरपूर हो उठता है। कुछ यही अनुभव ग्राम अछोटा के किसान श्री लेखराम देवांगन का भी रहा। आज जब वे 80.40 क्विंटल धान लेकर केंद्र पहुंचे, तो चेहरे पर संतोष साफ झलक रहा था।

लेखराम बताते हैं किसानी जीवन आसान नहीं, पर जब व्यवस्था साथ दे तो राहें सरल हो जाती हैं। पिछले वर्ष धान बिक्री से मिली राशि और कुछ जामापूजी से उन्होंने नया ट्रैक्टर खरीदा। अब न सिर्फ खेती में तेजी आई, बल्कि कृषि संबंधी ऋण भी उसी आय से चुका पाए। बोरवेल के भरोसे सिंचाई सुचारू है और सहकारी समिति से खाद-बीज समय पर मिलने से उन्हें खेती पर पूरा ध्यान देने का अवसर मिलता है।

सरकार की नीतियों से मिले इस सहारे पर वे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार भी जताते हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने इस बार पूरी तैयारी के साथ खरीदी प्रक्रिया को इतना सरल बनाया है कि किसान बिना दिक्कत अपने धान की बिक्री कर पा रहे हैं।

उपार्जन केंद्रों में इस वर्ष कुछ नई तस्वीरें देखने को मिल रही हैं—सटीक तौल के लिए इलेक्ट्रॉनिक मशीनें, पर्याप्त बारदाना, पेयजल की व्यवस्था, प्रतीक्षारत किसानों के लिए छांव, और बायोमैट्रिक सत्यापन जैसी सुविधाएँ। ‘टोकन तुंहर हाथ’ मोबाइल ऐप ने भी किसानों को लाइन में खड़े रहने की चिंता से मुक्त कर दिया है।

जिले के सभी केंद्रों में मोटा, पतला और सरना किस्म के धान की खरीदी सुचारू रूप से चालू है। दर सूची भी केंद्रों में प्रदर्शित है ताकि हर किसान को पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी मिल सके।

धान के दानों से भरे बोरों की कतारें, व्यवस्थाओं को सराहते किसान और प्रशासन की तत्परता—इन सबके बीच इस बार की खरीदी सिर्फ आर्थिक लेन-देन नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों, मेहनत और खुशी से सजी एक प्यारी-सी कहानी बन गई है।

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