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दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना: सशक्त दाम्पत्य, आत्मनिर्भर जीवन और सम्मान की नई पहचान

रायपुर, 31 जनवरी 2026 (IMNB NEWS AGENCY)
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संवेदनशील एवं दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। विशेष रूप से दिव्यांगजनों के सामाजिक पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और मुख्यधारा में प्रभावी सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना आज जमीनी स्तर पर बदलाव की मजबूत मिसाल बन रही है।
समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित यह योजना दिव्यांग दम्पत्तियों को विवाह के पश्चात् आर्थिक संबल प्रदान कर उनके दाम्पत्य जीवन को सुदृढ़ आधार दे रही है, साथ ही उन्हें आत्मविश्वास और सामाजिक सम्मान के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दे रही है।

इस योजना के अंतर्गत जिला गरियाबंद के छुरा विकासखंड स्थित ग्राम कुटेना, पोस्ट पाण्डुका निवासी श्रीमती कुलेश्वरी निषाद एवं उनके पति श्री लकेश निषाद को लाभान्वित किया गया। श्रीमती कुलेश्वरी निषाद 45 प्रतिशत अस्थिबाधित तथा श्री लकेश निषाद 40 प्रतिशत श्रवण बाधित हैं। योजना के प्रावधान अनुसार पति-पत्नी दोनों के दिव्यांग होने की स्थिति में उन्हें एक लाख रुपये की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस सहायता से दम्पत्ति ने अपने दाम्पत्य जीवन को सशक्त बनाया और आज वे किसी पर निर्भर नहीं होकर आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
गरियाबंद जिला के ही विकासखण्ड मैनपुर के ग्राम भाठीगढ़ निवासी 30 वर्षीय श्रीमती विजेश्वरी कोमर्रा, जो 65 प्रतिशत अस्थिबाधित दिव्यांग हैं एवं तहसील छुरा के ग्राम अमलोर निवासी 35 वर्षीय श्री केशर कोमर्रा पति-पत्नि है। दम्पत्ति को योजना के तहत 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई। स्वीकृत राशि ने दम्पत्ति को उनके दाम्पत्य जीवन को सुदृढ़ आधार देने में मदद की है।

इसी प्रकार, जिला बलौदाबाजार भाटापारा के ग्राम मिरगी निवासी श्री टिकेश्वर साहू को भी इस योजना का लाभ मिला है। अस्थिबाधित दिव्यांगता के बावजूद श्री साहू ने शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से स्वयं को सक्षम बनाया। विवाह पश्चात् स्वरोजगार प्रारंभ करने के उद्देश्य से उन्होंने दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आवेदन किया, जिसके पश्चात् उन्हें 50 हजार रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से उनके संयुक्त खाते में प्रदाय की गई। प्राप्त सहायता से उन्होंने टेंट एवं साउंड सिस्टम का व्यवसाय प्रारंभ कर परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए आत्मसम्मान के साथ जीवनयापन शुरू किया।

दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 18 से 45 वर्ष की दिव्यांग महिला एवं 21 से 45 वर्ष के दिव्यांग पुरुष, जो आयकरदाता नहीं हों, को विवाह के पश्चात् आर्थिक सहायता दी जाती है। यदि दम्पत्ति में एक व्यक्ति दिव्यांग हो तो 50 हजार रुपये तथा दोनों दिव्यांग होने पर 1 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता का प्रावधान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक इस योजना से 631 से अधिक हितग्राही लाभान्वित हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ स्थापित करना है। वहीं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का कहना है कि यह योजना दिव्यांगजनों के जीवन में स्थायित्व, सुरक्षा और स्वाभिमान का मजबूत आधार तैयार कर रही है।

दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना छत्तीसगढ़ शासन की समावेशी, मानवीय और जनकल्याणकारी नीति का सशक्त उदाहरण है, जो दिव्यांग दम्पत्तियों के सपनों को नया आधार देकर उन्हें आत्मनिर्भर भविष्य की ओर अग्रसर कर रही है।

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